कोसी क्षेत्र की जीवनरेखा एनएच-107 का निर्माण कार्य साढ़े छह वर्ष बाद भी अधूरा: प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं के कारण लेट-लतीफी से जनता त्रस्त; अधिकारियों ने दी मौजूदा स्थिति की जानकारी
सहरसा (वरीय संवाददाता): बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्र के विकास, सुगम आवागमन और आर्थिक समृद्धि की रीढ़ माने जाने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-107 (NH-107) के निर्माण कार्य को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक सुस्ती और लेट-लतीफी पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया और कटिहार जैसे प्रमुख जिलों को जोड़ने वाली इस अति-महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का कार्य शुरू हुए साढ़े छह वर्ष (6.5 Years) से अधिक का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद यह प्रोजेक्ट आज तक पूरी तरह मुकम्मल नहीं हो सका है। नियत समय-सीमा और कई बार बढ़ाई गई डेडलाइन (Deadline) पार हो जाने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले लाखों आम नागरिकों, वाहन चालकों और व्यापारियों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
परियोजना की पृष्ठभूमि और विलंब के मुख्य कारण
एनएच-107 के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण का कार्य क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़े सपने के साकार होने जैसा था, लेकिन यह सपना पिछले कई वर्षों से प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों के दलदल में फंसा हुआ है।
शुरुआत और वादे: इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को लेकर जब काम की शुरुआत हुई थी, तब यह उम्मीद जताई गई थी कि निर्धारित समय के भीतर इसे पूरा कर लिया जाएगा ताकि कोसी क्षेत्र के लोगों को आवागमन में सहूलियत मिल सके। लेकिन शुरुआती सुस्ती के बाद से ही कभी भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition), कभी यूटिलिटी शिफ्टिंग (बिजली के खंभे और पाइपलाइन हटाना), तो कभी निर्माण एजेंसी की उदासीनता के कारण काम लगातार पिछड़ता चला गया।
समय-सीमा में कई बार विस्तार: निर्माण कार्य में हो रही भारी देरी को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा इसकी समय-सीमा (Time Limit) को कई बार आगे बढ़ाया गया। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर प्रगति उस रफ्तार से नहीं हो पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
मौजूदा स्थिति: कहां फंसा है पेंच और अधिकारियों का क्या है कहना?
परियोजना की वर्तमान स्थिति को लेकर जब संबंधित विभागों और निर्माण से जुड़े अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने कई तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों का हवाला दिया है।
अधिकारियों का पक्ष: विभागीय अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के कुछ हिस्सों में अभी भी भूमि अधिग्रहण से जुड़ी कुछ कानूनी और स्थानीय अड़चनें बनी हुई हैं। इसके अलावा, भारी मानसूनी बारिश के दौरान मिट्टी का कार्य और डामरीकरण बाधित होने से भी निर्माण की गति धीमी पड़ी है। अधिकारियों ने दावा किया है कि मौजूदा स्थिति में निर्माण कार्य को गति देने के लिए संवेदक (Contractor) पर दबाव बनाया जा रहा है और बचे हुए हिस्सों को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए नई कार्ययोजना तैयार की गई है।
अधूरे हिस्सों में उड़ती धूल और कीचड़ का कहर: सड़क के कई हिस्सों में काम अधूरा होने के कारण वहां या तो गहरे गड्ढे बन गए हैं या फिर निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है। धूप के दिनों में धूल के गुबार से लोगों का सांस लेना मुहाल हो जाता है, वहीं बारिश के दिनों में यह सड़क कीचड़ और तालाब में तब्दील हो जाती है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
आम जनता और व्यापारियों की मुश्किलें और आक्रोश
एनएच-107 के निर्माण में हो रही इस अंतहीन देरी से कोसी क्षेत्र की जनता का धैर्य अब जवाब देने लगा है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
व्यापार और परिवहन पर असर: सड़क खराब होने के कारण मालवाहक वाहनों और बसों को तय दूरी तय करने में सामान्य से दोगुना समय लग रहा है। इससे परिवहन लागत बढ़ गई है और स्थानीय बाजार प्रभावित हो रहे हैं।
स्वास्थ्य और आपातकालीन समस्याएं: मरीजों को अस्पताल ले जाने के दौरान इस टूटी-फूटी सड़क के झटकों से उनकी स्थिति और गंभीर हो जाती है। एम्बुलेंस समय पर गंतव्य तक नहीं पहुँच पाती हैं, जो एक बहुत बड़ी मानवीय समस्या बन चुकी है।
साढ़े छह वर्ष बीत जाने के बाद भी एनएच-107 का निर्माण कार्य पूरा न होना न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि जनता के विकास के अधिकारों के साथ भी खिलवाड़ है। हालांकि अधिकारी लगातार जल्द काम पूरा होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत तब तक नहीं बदलेगी जब तक निर्माण कार्य पूरी पारदर्शिता और युद्ध स्तर पर नहीं चलाया जाता। कोसी क्षेत्र की जनता अब केवल आश्वासनों से ऊब चुकी है और उन्हें एक मुकम्मल, सुरक्षित और बेहतरीन सड़क मार्ग का इंतजार है।