एनएच सड़कों पर हरियाली की कमी से बढ़ी चिंता, सोनवर्षाराज को छोड़ अन्य क्षेत्रों में पौधरोपण की रफ्तार धीमी

सहरसा । सहरसा जिले से गुजरने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) की सड़कों पर हरियाली की कमी अब स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। सड़क किनारे पर्याप्त संख्या में पेड़ नहीं होने के कारण गर्मी के मौसम में यात्रियों और राहगीरों को धूप से राहत नहीं मिल पाती। वहीं, बढ़ते वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में भी सड़क किनारे हरित पट्टी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में एनएच के किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराने की मांग स्थानीय लोगों की ओर से लगातार उठ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में सड़क निर्माण और चौड़ीकरण के साथ यातायात सुविधाओं में सुधार तो हुआ है, लेकिन सड़क किनारे हरियाली को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। कुछ स्थानों पर पौधे लगाए गए हैं, लेकिन अधिकांश एनएच क्षेत्रों में सड़क के दोनों ओर पेड़ों की संख्या काफी कम दिखाई देती है।

वर्तमान में सोनवर्षाराज क्षेत्र में पौधरोपण का काम दिखाई दे रहा है। इसके अलावा जिले के अन्य हिस्सों में एनएच के किनारे बड़े स्तर पर पौधरोपण नजर नहीं आने से लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सड़क विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सड़क किनारे पेड़ नहीं होने से बढ़ती परेशानी

एनएच पर लगातार वाहनों की संख्या बढ़ रही है। दिनभर भारी वाहन, बस, ट्रक, कार और अन्य छोटे-बड़े वाहन गुजरते रहते हैं। वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ धूल और धुएं का स्तर भी बढ़ता है।

सड़क किनारे पर्याप्त पेड़ होने पर पेड़ धूल के कणों को रोकने और वायु गुणवत्ता सुधारने में कुछ हद तक मदद कर सकते हैं। इसके अलावा सड़क किनारे हरित पट्टी गर्मी के प्रभाव को कम करने में भी सहायक होती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी के दिनों में एनएच के किनारे पैदल चलने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है। सड़क के आसपास पेड़ होने पर यात्रियों को छांव मिल सकती है, लेकिन कई हिस्सों में ऐसी प्राकृतिक छांव उपलब्ध नहीं है।

सोनवर्षाराज में पौधरोपण से जगी उम्मीद

सोनवर्षाराज क्षेत्र में पौधरोपण की गतिविधि शुरू होने से स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी है कि एनएच के अन्य हिस्सों में भी जल्द हरियाली बढ़ाने का अभियान शुरू होगा।

लोगों का कहना है कि एक क्षेत्र में पौधरोपण शुरू होने के बाद इसे पूरे जिले में विस्तार दिया जाना चाहिए। एनएच के किनारे खाली सरकारी भूमि, सड़क की सीमा के उपयुक्त हिस्सों और उपलब्ध स्थानों पर योजनाबद्ध तरीके से पौधे लगाए जा सकते हैं।

पौधरोपण के साथ उनकी सुरक्षा और देखभाल पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। केवल पौधे लगा देने से हरित पट्टी विकसित नहीं होगी। पौधों को नियमित पानी, सुरक्षा और उचित देखभाल की आवश्यकता होती है।

स्थानीय लोग कर रहे व्यापक पौधरोपण की मांग

एनएच के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि सड़क किनारे पौधरोपण होने से पर्यावरण के साथ-साथ आम लोगों को भी सीधा लाभ मिलेगा।

लोगों ने मांग की है कि सड़क के दोनों किनारों पर स्थानीय जलवायु के अनुकूल पौधों का चयन कर बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराया जाए। ऐसे पेड़ लगाए जाएं जो लंबे समय तक जीवित रहें और पर्याप्त छाया प्रदान करें।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क किनारे नीम, पीपल, बरगद, अर्जुन, करंज और अन्य उपयुक्त प्रजातियों के पेड़ लगाए जा सकते हैं। हालांकि, पौधों का चयन संबंधित विशेषज्ञों की सलाह और सड़क सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

गर्मी में राहगीरों को मिलेगी राहत

सहरसा जैसे गर्म और आर्द्र मौसम वाले क्षेत्र में गर्मी के दौरान सड़क पर यात्रा करना लोगों के लिए कठिन हो जाता है। दोपहर के समय धूप तेज होने पर सड़क किनारे छांव की कमी विशेष रूप से महसूस होती है।

यदि एनएच के दोनों किनारों पर पर्याप्त पेड़ विकसित हो जाएं तो भविष्य में राहगीरों को प्राकृतिक छांव मिल सकती है। इससे पैदल चलने वालों, साइकिल सवारों और दोपहिया वाहन चालकों को राहत मिलेगी।

लोगों का कहना है कि पौधरोपण को केवल पर्यावरण अभियान के रूप में नहीं बल्कि दीर्घकालिक जनसुविधा के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

प्रदूषण कम करने में मददगार हो सकती है हरित पट्टी

एनएच पर वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वायु प्रदूषण की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वाहनों से निकलने वाला धुआं और सड़क से उड़ने वाली धूल आसपास के वातावरण को प्रभावित करती है।

सड़क किनारे विकसित हरित पट्टी धूल और कुछ प्रदूषक कणों को रोकने में मदद कर सकती है। पेड़ वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। हालांकि, केवल पौधरोपण से प्रदूषण की समस्या का पूरा समाधान संभव नहीं है, लेकिन यह पर्यावरण सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

पौधों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार पौधरोपण अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कुछ वर्षों बाद पौधों की संख्या कम हो जाती है। इसका मुख्य कारण पौधों की उचित देखभाल और सुरक्षा का अभाव हो सकता है।

एनएच किनारे पौधों को पशुओं से बचाने के लिए ट्री गार्ड लगाने, नियमित सिंचाई की व्यवस्था करने और पौधों की निगरानी की जरूरत होगी।

सड़क निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि पौधों की वजह से सड़क की दृश्यता या यातायात सुरक्षा प्रभावित न हो।

पौधरोपण के साथ जल संरक्षण जरूरी

गर्मी के मौसम में पौधों को पानी उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती हो सकती है। ऐसे में पौधरोपण योजना के साथ जल संरक्षण और सिंचाई की व्यवस्था भी तैयार करनी होगी।

वर्षा जल संचयन, टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने या स्थानीय जलस्रोतों का उपयोग करने जैसी व्यवस्थाएं जरूरत के अनुसार की जा सकती हैं।

यदि पौधों की शुरुआती दो-तीन वर्षों तक नियमित देखभाल की जाए तो उनके जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ सकती है।

स्थानीय लोगों की भागीदारी से अभियान हो सकता है सफल

पौधरोपण अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण हो सकती है। जिन क्षेत्रों में एनएच के किनारे पौधे लगाए जाएं, वहां स्थानीय संस्थाओं, स्कूलों, स्वयंसेवी संगठनों और ग्रामीणों को पौधों की देखभाल से जोड़ा जा सकता है।

स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से अभियान से जोड़ने पर उनमें भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।

स्थानीय लोग यदि पौधों की सुरक्षा में सहयोग करें तो सरकारी विभागों पर पूरी जिम्मेदारी का दबाव भी कम हो सकता है।

सड़क विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण जरूरी

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। बेहतर योजना के साथ दोनों उद्देश्यों को एक साथ पूरा किया जा सकता है।

एनएच निर्माण या चौड़ीकरण के दौरान यदि कहीं पेड़ हटाने की जरूरत पड़े तो उसके बदले नियमानुसार पर्याप्त पौधरोपण किया जाना चाहिए। सड़क के किनारे उपलब्ध स्थानों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर हरित पट्टी विकसित की जा सकती है।

इससे भविष्य में सड़कें अधिक सुरक्षित, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बन सकती हैं।

जिले के अन्य हिस्सों में भी बढ़े पौधरोपण की उम्मीद

सोनवर्षाराज में चल रहे पौधरोपण कार्य से लोगों को उम्मीद है कि जिले के अन्य एनएच क्षेत्रों में भी जल्द अभियान शुरू होगा। स्थानीय लोगों की मांग है कि पौधरोपण के लिए केवल एक क्षेत्र को प्राथमिकता देने के बजाय पूरे जिले के एनएच मार्गों को योजना में शामिल किया जाए।

लोग चाहते हैं कि सड़क किनारे पौधों की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी निगरानी के लिए भी जिम्मेदारी तय की जाए। हर वर्ष लगाए गए पौधों और जीवित पौधों की संख्या का आकलन किया जाए, ताकि अभियान के वास्तविक परिणाम सामने आ सकें।