इसी पैदल रास्ते से बासुकीनाथ जाते हैं कांवरिया, लेकिन नाले के गंदे पानी की निकासी न होने से जलजमाव व कीचड़ से बढ़ी मुसीबतें

संवाद सूत्र: देवघर-दुमका क्षेत्र और सुप्रसिद्ध शिवधाम बासुकीनाथ की यात्रा पर निकलने वाले लाखों शिवभक्तों के लिए एक बेहद चिंताजनक और गंभीर समस्या सामने आ रही है। जिस प्रमुख और पारंपरिक पैदल मार्ग से होकर हजारों कांवरिया नंगे पांव भगवान भोलेनाथ के दरबार बासुकीनाथ धाम की ओर बढ़ते हैं, वही मार्ग आज प्रशासनिक उदासीनता और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण उपेक्षा का शिकार हो चुका है। इस रास्ते पर नालियों के गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था न होने के कारण सड़क पर हमेशा जलजमाव और कीचड़ की स्थिति बनी रहती है। कांवरियों की आस्था के इस पवित्र मार्ग पर पसरी इस नरकीय व्यवस्था से श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश व्याप्त है।

आस्था का प्रमुख मार्ग और बदइंतजामी का आलम

हर साल श्रावण मास (सावन) और भादो के महीनों में देश के कोने-कोने से कांवरिया कांवर लेकर देवघर से बासुकीनाथ की कठिन और लंबी पैदल यात्रा तय करते हैं। इस मार्ग की महत्ता धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से अत्यंत विशेष है:

नंगे पांव चलते हैं शिवभक्त: बाबा बासुकीनाथ के दर्शन के लिए जाने वाले अधिकांश कांवरिया कठिन नियमों का पालन करते हुए नंगे पांव ही इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में सड़क पर फैला गंदा पानी, कीचड़ और जलजमाव उनके लिए शारीरिक पीड़ा और संक्रमण का बड़ा कारण बन जाता है।

नाला निर्माण व निकासी का अभाव: स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों का कहना है कि इस मुख्य मार्ग के किनारे जल निकास के लिए स्थायी नालियों का निर्माण नहीं कराया गया है। इसके चलते घरों और दुकानों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे कांवरिया पथ पर बहता रहता है, जिससे यह पूरा रास्ता दलदल में तब्दील हो चुका है।

कांवरियों को हो रही भारी कठिनाइयां, बीमारी का मंडराता खतरा

सड़क पर हर वक्त जलजमाव रहने के कारण न केवल चलना दूभर हो गया है, बल्कि कई अन्य गंभीर समस्याएं भी पैदा हो रही हैं:

पैर की बीमारियां और संक्रमण: गंदे और सड़े हुए पानी में लगातार नंगे पांव चलने से कांवरियों और स्थानीय निवासियों को पैर की चमड़ी गलने (फंगल इन्फेक्शन), फोड़े-फुंसी और अन्य गंभीर चर्म रोगों का सामना करना पड़ रहा है।

दुर्घटनाओं की आशंका: पानी भरने के कारण सड़क पर बने गड्ढे और नुकीले पत्थर दिखाई नहीं देते हैं, जिससे कई बार कांवरिया और आम राहगीर फिसलकर चोटिल हो जाते हैं। खासकर रात के समय जब कांवरियों का जत्था डीजे और भजनों की धुन के साथ आगे बढ़ता है, तो अंधेरे और पानी के कारण दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

व्यापारियों और स्थानीय ग्रामीणों का जीवन भी बेहाल

इस समस्या से केवल बाहरी कांवरिया ही प्रभावित नहीं हैं, बल्कि इस रास्ते के किनारे बसने वाले स्थानीय ग्रामीण और दुकानदार भी नरकीय जीवन जीने को विवश हैं:

बदबू से जीना मुहाल: घरों के सामने हर वक्त गंदा पानी जमा रहने से उठने वाली सड़न और दुर्गंध के कारण लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। मच्छरों का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका लगातार बनी रहती है।

व्यापार पर असर: दुकानदारों का कहना है कि दुकान के आगे कीचड़ और गंदा पानी फैला रहने के कारण ग्राहक उनकी दुकानों तक आने से कतराते हैं, जिससे उनका दैनिक रोजगार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

प्रशासनिक उदासीनता पर उठ रहे सवाल

लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग की ऐसी दयनीय स्थिति स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करती है:

सिर्फ कागजी वादे: स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन से इस मार्ग पर पक्की नाली निर्माण और जल निकासी की समस्या के स्थायी समाधान की गुहार लगाई है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला।

मेला क्षेत्र की उपेक्षा: जब भी कांवरिया मेला या विशेष धार्मिक उत्सव नजदीक आते हैं, तब अस्थायी साफ-सफाई की औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई स्थायी इंजीनियरिंग या ड्रेनेज सिस्टम विकसित नहीं किया जाता है।

स्थानीय लोगों और कांवरियों की प्रमुख मांगें

इस गंभीर समस्या से त्रस्त होकर अब जनता ने प्रशासन के खिलाफ मुखर होना शुरू कर दिया है:

त्वरित जल निकासी की व्यवस्था: तत्काल प्रभाव से पंप या अन्य वैकल्पिक माध्यमों से जमा पानी को हटाया जाए।

पक्का नाला निर्माण: कांवरिया पथ के दोनों किनारों पर युद्ध स्तर पर पक्के नालियों का निर्माण कराया जाए ताकि भविष्य में कभी भी गंदा पानी सड़क पर न फैले।

सड़क की मरम्मत: जलजमाव के कारण टूटी और जर्जर हो चुकी इस सड़क की विशेष मरम्मत कराई जाए।

"इसी रास्ते से पैदल बासुकीनाथ जाते हैं कांवरिया..."—यह पंक्ति केवल एक मार्ग का परिचय नहीं है, बल्कि यह उन लाखों शिवभक्तों की आस्था की कहानी है जो तमाम कठिनाइयों को पार कर अपने आराध्य के दर्शन के लिए निकलते हैं। ऐसे पवित्र और व्यस्त मार्ग पर नाले के गंदे पानी की निकासी न होना और कीचड़ भरा माहौल प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी बड़े स्वास्थ्य संकट या दुर्घटना को जन्म दे सकती है। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग तुरंत हरकत में आए और कांवरिया पथ को पूरी तरह स्वच्छ और सुगम बनाए।