दरभंगा नगर निगम में बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ और बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन की संयुक्त हड़ताल रही पूरी तरह प्रभावी: सफाई कर्मचारियों की हुंकार से ठप रहा कामकाज
दरभंगा: बिहार के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र कहे जाने वाले दरभंगा नगर निगम क्षेत्र में श्रमिकों, सफाई कर्मियों और स्थानीय निकाय के कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ और बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन के संयुक्त आह्वान पर बुलाई गई राज्यव्यापी हड़ताल का असर दरभंगा नगर निगम में पूरी तरह प्रभावी और व्यापक रूप से देखने को मिला। सरकार और स्थानीय प्रशासन के कथित अड़ियल और उदासीन रवैये के खिलाफ निगम के हजारों स्थायी, संविदा और दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित न्यायसंगत मांगों को सरकार द्वारा अविलंब स्वीकार करने और लागू करने की पुरजोर मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस संयुक्त आंदोलन के कारण पूरे शहर की सफाई व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप हो गया, जिससे नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया।
संयुक्त हड़ताल की पृष्ठभूमि: क्यों एकजुट हुए दोनों बड़े फेडरेशन?
बिहार के शहरी निकायों में कार्यरत सफाई कर्मियों और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की दयनीय आर्थिक स्थिति और शोषण के खिलाफ लंबे समय से सुगबुगाहट चल रही थी।
मांगों की लगातार अनदेखी: कर्मचारियों का आरोप था कि राज्य सरकार और स्थानीय निकाय प्रशासन केवल आश्वासन की घुट्टी पिला रहे हैं, लेकिन धरातल पर उनकी बुनियादी समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया जा रहा है। महंगाई के इस दौर में बेहद कम मानदेय या पारिश्रमिक पर काम करने को विवश इन कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे चुका था।
संयुक्त मोर्चे का गठन: इसी पृष्ठभूमि में बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ और बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन ने आपसी मतभेदों को दरकिनार करते हुए एक मजबूत संयुक्त मोर्चा बनाने का निर्णय लिया। दोनों बड़े संगठनों के एक मंच पर आने से आंदोलन को अभूतपूर्व ताकत मिली और दरभंगा नगर निगम क्षेत्र में इसका पूर्ण प्रभाव दिखाई दिया।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें और सरकार के प्रति रोष
नगर निगम परिसर में दिए गए धरने और प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों और महासंघ के नेताओं ने सरकार के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें पुरजोर तरीके से रखीं:
समान काम के लिए समान वेतन: संविदा कर्मियों और दैनिक वेतनभोगियों को नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर समान कार्य के लिए समान वेतन और सुविधाएं दी जाएं।
कर्मियों का स्थायीकरण: वर्षों से सेवा दे रहे संविदा और दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मियों की सेवाओं को तुरंत स्थायी (Regularize) किया जाए।
समय पर मानदेय का भुगतान: कई महीनों तक मानदेय रोक दिए जाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए और हर महीने की निश्चित तारीख को वेतन का भुगतान सुनिश्चित हो।
ಸಾಮಾಜಿಕ सुरक्षा लाभ (PF & ESI): सभी सफाई कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि (PF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), और स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।
सेवा शर्तों में सुधार और जोखिम भत्ता: खतरनाक नालियों और कचरे के बीच काम करने वाले सफाई कर्मियों को विशेष जोखिम भत्ता और सुरक्षा उपकरण (Safety Gears) मुहैया कराए जाएं।
दरभंगा नगर निगम क्षेत्र पर हड़ताल का व्यापक असर
संयुक्त महासंघ और फेडरेशन के आह्वान पर शुरू हुई इस हड़ताल का दरभंगा शहर पर अत्यधिक गंभीर और व्यापक प्रभाव पड़ा।
कचरे के ढेर से पटी सड़कें: हड़ताल के पहले दिन से ही सफाई कर्मियों ने कचरा उठाव का कार्य पूरी तरह ठप कर दिया। परिणामस्वरूप, शहर के प्रमुख बाजार, लहेरियासराय टावर, दरभंगा टावर, बेंता, और विभिन्न आवासीय मोहल्लों में कचरे के अंबार लग गए। चारों तरफ फैली बदबू और गंदगी के कारण आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया।
कर्मचारियों की आक्रामक एकजुटता: दरभंगा नगर निगम कार्यालय के मुख्य द्वार पर सुबह से ही हजारों की संख्या में महिला और पुरुष सफाई कर्मी हाथ में बैनर-पोस्टर लेकर इकट्ठा होने लगे। सरकार विरोधी नारेबाज़ी से पूरा निगम परिसर गूंज उठा। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही त्रिपक्षीय वार्ता बुलाकर उनकी मांगें पूरी नहीं कीं, तो आंदोलन को और अधिक आक्रामक रूप दिया जाएगा।
बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ और बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन की संयुक्त हड़ताल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब तक श्रमिक अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज नहीं उठाते, तब तक व्यवस्था उनकी सुध नहीं लेती। दरभंगा नगर निगम में यह हड़ताल पूरी तरह प्रभावी रही और इसने शासन-प्रशासन को सोचने पर विवश कर दिया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार इन मेहनतकश सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों को मानकर कब तक ठोस और सकारात्मक कदम उठाती है, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था और कर्मचारियों का भविष्य दोनों सुरक्षित हो सकें।