पूर्व सेक्शन ऑफिसर अमरेंद्र झा और वर्तमान कर्मचारी के बीच का विवाद पहुँचा उच्च शिक्षा निदेशक के दरबार
भागलपुर/पटना (संवाद सूत्र): बिहार के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक शिक्षण संस्थानों में शुमार तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के अंतर्गत आने वाले टीएनबी कॉलेज (T.N.B. College) में इन दिनों शैक्षणिक माहौल से ज्यादा प्रशासनिक गलियारों में मचा भूचाल चर्चा का विषय बना हुआ है। कॉलेज के पूर्व सेक्शन ऑफिसर (प्रखंड अनुभाग अधिकारी) अमरेंद्र झा और एक वर्तमान कार्यरत कर्मचारी के बीच उपजा आपसी विवाद अब तूल पकड़ते-पकड़ते राज्य के उच्च शिक्षा निदेशालय (Directorate of Higher Education) तक जा पहुंचा है। पूर्व सेक्शन ऑफिसर अमरेंद्र झा द्वारा वर्तमान कर्मचारी पर पिछले 29 वर्षों के दौरान वेतन बकाए, पदोन्नति और कथित तौर पर अनुचित एवं अतिरिक्त वित्तीय लाभ प्राप्त करने को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस शिकायती पत्र और विवाद के तूल पकड़ने से विश्वविद्यालय प्रशासन और कॉलेज परिसर में हड़कंप मच गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि: क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, टीएनबी कॉलेज के सेवानिवृत्त या पूर्व सेक्शन ऑफिसर अमरेंद्र झा और वर्तमान में कार्यरत एक कर्मी के बीच लंबे समय से अंदरखाने तनातनी चल रही थी। यह मामला तब पूरी तरह सतह पर आया जब श्री झा ने दस्तावेजों के साथ उच्च शिक्षा निदेशक को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा:
29 वर्षों के वित्तीय लाभ का पेच: अमरेंद्र झा का मुख्य आरोप है कि उक्त वर्तमान कर्मचारी ने अपने सेवाकाल के पिछले 29 वर्षों के दौरान नियमों को ताक पर रखकर कथित तौर पर अनुचित रूप से अतिरिक्त वित्तीय लाभ, वेतन बकाए और अन्य भत्तों का लाभ उठाया है।
प्रशासनिक दस्तावेजों पर सवाल: शिकायत में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय के आंतरिक नियमों और सेवा शर्तों को दरकिनार कर किस प्रकार से एक ही कर्मचारी को वर्षों तक अनुचित लाभ पहुंचाया गया, इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इस पूरे प्रकरण में कॉलेज स्तर पर बरती गई कथित उदासीनता को भी कटघरे में खड़ा किया गया है।
उच्च शिक्षा निदेशक तक पहुँचा मामला, प्रशासनिक हलकों में खलबली
जब विश्वविद्यालय स्तर पर इस मामले का कोई संतोषजनक समाधान या आंतरिक जांच आगे नहीं बढ़ी, तो पूर्व सेक्शन ऑफिसर ने सीधे राज्य स्तर पर शिक्षा विभाग का दरवाजा खटखटाया:
निदेशालय का हस्तक्षेप: उच्च शिक्षा निदेशक के समक्ष प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों और प्रार्थना पत्र के बाद शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, निदेशालय स्तर से विश्वविद्यालय प्रशासन को इस पूरे प्रकरण पर रिपोर्ट तलब किए जाने की संभावना है।
टीएमबीयू प्रशासन की बढ़ी मुश्किलें: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए यह विवाद सिरदर्द बनता जा रहा है। कॉलेज के स्तर पर आंतरिक मामलों के इस तरह निदेशालय तक पहुंचने से विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
कर्मचारियों और शिक्षा जगत में तीखी प्रतिक्रिया
टीएनबी कॉलेज के इस ताज़ा विवाद ने विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी संघों के बीच भी बहस छेड़ दी है:
पारदर्शिता की मांग: बुद्धिजीवियों और शिक्षा प्रेमियों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालयों में वित्तीय मामलों और कर्मचारियों के सेवा इतिहास में इस प्रकार की गड़बड़ियों के आरोप सामने आ रहे हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
दोषियों पर कार्रवाई की आस: कॉलेज के अन्य कर्मियों का मानना है कि इस तरह के विवादों से संस्थान की छवि धूमिल होती है, इसलिए उच्च शिक्षा निदेशालय को जल्द से जल्द इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी कर देना चाहिए।
टीएनबी कॉलेज, भागलपुर में पूर्व सेक्शन ऑफिसर अमरेंद्र झा और वर्तमान कर्मचारी के बीच उपजा यह विवाद महज दो व्यक्तियों की तनातनी नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था की पारस्परिकता पर एक बड़ा सवालिया निशान है। 29 वर्षों के कथित वेतन बकाए और अनुचित अतिरिक्त लाभ का यह पूरा मामला अब उच्च शिक्षा निदेशक के पाले में है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कड़ा कदम उठाता है और क्या विश्वविद्यालय प्रशासन इस आंतरिक भ्रष्टाचार या अनियमिताओं की निष्पक्ष जांच करा पाता है या नहीं।