अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर और सेना के जवान अजय यादव को केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने किया सम्मानित; बोले— ‘तुम सिर्फ गया के नहीं, पूरे देश के गौरव हो!’
सांसद सह केंद्रीय मंत्री का अभिनंदन: गया के सांसद और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने अपने सरकारी आवास पर अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग/वेटलिफ्टिंग चैंपियन अजय यादव को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
मिट्टी का लाल, देश का मान: गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के अंतर्गत 'पुरानी बथान' गांव के रहने वाले अजय यादव ने रूस और वियतनाम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत को स्वर्ण पदक (Gold Medal) दिलाया है।
युवाओं के लिए प्रेरणा: एक साधारण किसान परिवार से निकलकर भारतीय सेना के जरिए विश्व पटल पर छा जाने वाले अजय की इस कामयाबी की केंद्रीय मंत्री ने मुक्तकंठ से सराहना की।
ग्राउंड रिपोर्ट: पुरानी बथान से मॉस्को तक का सफर, संघर्ष और सफलता की अनकही कहानी
गया जिले का फतेहपुर प्रखंड आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इस ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक रखने वाले अजय यादव ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधनों के बावजूद विश्व पटल पर तिरंगा लहराया जा सकता है।
अजय यादव एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2010 में भारतीय सेना (Indian Army) में भर्ती होकर की थी। देश सेवा के कड़े अनुशासन के बीच भी उन्होंने अपने भीतर के खिलाड़ी को कभी मरने नहीं दिया। ड्यूटी की व्यस्तताओं के बीच उन्होंने वेटलिफ्टिंग और पावरलिफ्टिंग का कड़ा अभ्यास जारी रखा, जिसका नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने स्वर्ण पदक के रूप में चमक रहा है।
विश्व चैंपियन बनने का सफर: जब रूस और वियतनाम में बजा भारत का डंका
अजय यादव की इस सफलता के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर की दो सबसे बड़ी जीत शामिल हैं, जिन्होंने उन्हें रातों-रात बिहार का सबसे चमकता हुआ खेल सितारा बना दिया:
1. वियतनाम में स्वर्णिम शुरुआत (जुलाई 2025):
अजय यादव ने वियतनाम में आयोजित वर्ल्ड लेवल वेटलिफ्टिंग/पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश को स्वर्ण पदक दिलाया था। जब वे गोल्ड मेडल जीतकर अपने पैतृक गांव फतेहपुर लौटे थे, तो पूरा इलाका 'भारत माता की जय' और 'अजय यादव जिंदाबाद' के नारों से गूंज उठा था।
2. रूस वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप (दिसंबर 2025):
वियतनाम की जीत के ठीक पांच महीने बाद अजय ने रूस में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में इतिहास रच दिया।
83 किलोग्राम भार वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अजय ने 265 किलोग्राम का भारी-भरकम वजन उठाकर दुनिया को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
फाइनल मुकाबले में उन्होंने दुनिया के सबसे कड़े प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले ईरान के खिलाड़ी को करारी शिकस्त देकर पोडियम पर पहला स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने थपथपाई पीठ; दिया हरसंभव मदद का भरोसा
अजय यादव की इन ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलताओं को देखते हुए केंद्रीय मंत्री और गया के लोकप्रिय सांसद जीतनराम मांझी ने उन्हें विशेष मुलाकात के लिए आमंत्रित किया था।
मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री ने अजय यादव को पारंपरिक अंगवस्त्र पहनाया और स्मृति चिह्न भेंट कर उनका हौसला बढ़ाया। इस दौरान जीतनराम मांझी काफी भावुक और गर्वित नजर आए।
जीतनराम मांझी का आधिकारिक बयान: > "अजय ने जो मुकाम हासिल किया है, वह असाधारण है। बिहार और गया के ग्रामीण इलाकों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, कमी है तो बस सही प्लेटफॉर्म और प्रोत्साहन की। अजय जैसे नौजवानों ने अपनी मेहनत की बदौलत साबित किया है कि गया की मिट्टी में कितनी ताकत है। एक केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद होने के नाते, मैं केंद्र सरकार और राज्य सरकार के स्तर से अजय को हरसंभव खेल सहायता, आधुनिक उपकरण और सुविधाएं दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हूं।"
ग्रामीण खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुई चर्चा: युवाओं को नशे से दूर रखने का संकल्प
इस औपचारिक सम्मान समारोह के बाद केंद्रीय मंत्री और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अजय यादव के बीच बिहार, विशेषकर मगध क्षेत्र में खेल सुविधाओं के विस्तार को लेकर गंभीर चर्चा हुई।
फतेहपुर में खेल अकादमी की मांग: स्थानीय खेल प्रेमियों और अजय ने मंत्री महोदय के सामने यह बात रखी कि फतेहपुर और आस-पास के प्रखंडों के युवाओं में फिजिकल और स्पोर्ट्स को लेकर भारी क्रेज है। अगर यहां एक आधुनिक जिम या मिनी स्टेडियम का निर्माण हो जाए, तो कई और 'अजय यादव' देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
युवाओं को संदेश: अजय यादव ने कहा कि खेल केवल मेडल जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारे ग्रामीण युवाओं को अपराध, गुटबाजी और नशे के दलदल से दूर रखने का सबसे सशक्त माध्यम है।
गया वासियों में जश्न का माहौल: 'ऑपरेशन खेल' को मिलेगी रफ्तार
अजय यादव को देश की कैबिनेट में जगह पाने वाले केंद्रीय मंत्री द्वारा सम्मानित किए जाने की खबर जैसे ही गया और फतेहपुर पहुंची, स्थानीय खेल संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। पुरानी बथान गांव में मिठाइयां बांटी गईं। खेल प्रेमियों का कहना है कि इस सम्मान से न केवल अजय का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचेगा, बल्कि बिहार के उन हजारों उभरते हुए एथलीटों को भी संबल मिलेगा जो विपरीत परिस्थितियों में मैदान पर पसीना बहा रहे हैं।
जब गया के सुदूर गांव का एक लड़का सेना की वर्दी पहनकर सीमा की रक्षा भी करता है और अंतरराष्ट्रीय रिंग में उतरकर दुनिया के दिग्गजों को धूल चटाता है, तो देश का मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाता है। केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी द्वारा अजय यादव का यह सम्मान केवल एक खिलाड़ी का आदर नहीं है, बल्कि बिहार की उस खेल चेतना का सम्मान है जो अब अंगड़ाई ले रही है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार अब सिर्फ कागजी सम्मानों से आगे बढ़कर अजय जैसे हीरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंग और बुनियादी ढांचा प्रदान करेगी ताकि 2028 और 2032 के ओलंपिक में बिहार का यह लाल भारत की झोली में पदक डाल सके!