दरभंगा राज की विरासतों को बचाने आगे आई 'इंटैक'; चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर ने की मांग— ‘महाराजधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय को घोषित करें देश का पहला आइवरी म्यूजियम!’
ग्लोबल धरोहर का दर्जा मिले: इंटैक के राष्ट्रीय चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर ने लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय की भव्यता और दुर्लभ हाथी दांत की कलाकृतियों को देखकर उसे स्वतंत्र 'आइवरी म्यूजियम' घोषित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विरासत यात्रा का आगाज: इंटैक की उच्चस्तरीय टीम ने नरगौना पैलेस, मोती महल, लक्ष्मीश्वर विलास पैलेस, राज किला और इंद्र भवन समेत दरभंगा राज की दर्जनों ऐतिहासिक इमारतों का किया गहन मुआयना।
बदहाली पर जताई गहरी चिंता: सदियों पुरानी बेशकीमती धरोहरों और सूख चुके ऐतिहासिक वृक्षों (शाखाइ तार व भद्राक्ष) के क्षरण को देख इंटैक प्रमुख ने पुनरुद्धार का दिया बड़ा प्रस्ताव।
ग्राउंड जीरो: जब दरभंगा की धरती पर उतरा कला और संस्कृति का सबसे बड़ा सिंडिकेट
मिथिलांचल की सांस्कृतिक राजधानी और ऐतिहासिक रूप से वैभवशाली माने जाने वाले 'राज दरभंगा' के गौरवशाली इतिहास को एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। भारत में प्राचीन ऐतिहासिक भवनों, मूर्तियों और कलाकृतियों को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करने वाली संस्था INTACH की टीम इन दिनों दरभंगा की अनमोल विरासतों का ऑन-स्पॉट असेसमेंट (On-Spot Assessment) कर रही है।
इसी क्रम में इंटैक के राष्ट्रीय चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर ने दरभंगा रेलवे स्टेशन के समीप स्थित ऐतिहासिक महाराजधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय (Established: 1977) का सघन दौरा किया। इस दौरान उनके साथ इंटैक बिहार स्टेट के कन्वेनर भैरव लाल दास और पूर्व संग्रहालय प्रभारी डॉ. शिव कुमार मिश्र भी मौजूद रहे, जिन्होंने टीम को दरभंगा राज के अविश्वसनीय इतिहास से रूबरू कराया।
चेयरमैन हुए मंत्रमुग्ध: बोले— "ऐसी नायाब कलाकृतियां दुनिया में कहीं और नहीं!"
संग्रहालय के भीतर सजे राजसी कमरों और दीर्घाओं (Galleries) को देखते हुए इंटैक चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर तब हैरत में पड़ गए, जब वे 'हाथी दांत कक्ष' में पहुंचे। हाथी दांत पर की गई सूक्ष्म और बारीक नक्काशी को देखकर उन्होंने मुक्तकंठ से बिहार और मिथिला के तत्कालीन कारीगरों की सराहना की।
चेयरमैन का आधिकारिक बयान: > "मैंने अपने पूरे कार्यकाल में देश-विदेश के सैकड़ों संग्रहालयों का दौरा किया है, लेकिन महाराजधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय में हाथी दांत से बनी वस्तुओं का जो विशाल और अद्भुत संग्रह मौजूद है, उसकी मिसाल पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलती। इतनी विशाल, सजीव और बारीक कलाकृतियां कहीं और देखना असंभव है। बिहार सरकार और केंद्र सरकार को मिलकर इस अद्वितीय विरासत को एक विशेष 'आइवरी म्यूजियम' (Ivory Museum) के रूप में अंतरराष्ट्रीय पटल पर विज्ञापित करना चाहिए।"
संग्रहालय की वो 5 अनमोल चीजें, जिन्होंने खींचा सबका ध्यान
विरासत यात्रा के दौरान इंटैक प्रमुख ने जिन विशिष्ट कलाकृतियों को देखकर आश्चर्य व्यक्त किया, उनका विवरण इस प्रकार है:
1. हाथी दांत से निर्मित 'महिषमर्दिनी'
हाथी दांत के एक ही टुकड़े को तराशकर बनाई गई मां दुर्गा की महिषमर्दिनी रूप की मूर्ति को देखकर हर कोई स्तब्ध रह जाता है। इसमें उकेरे गए एक-एक आभूषण और भाव पूरी तरह जीवंत नजर आते हैं।
2. छत्रपति शिवाजी की घुड़सवार मूर्ति
हाथी दांत से बनी मराठा साम्राज्य के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज की घोड़े पर सवार मूर्ति मूर्तिकला का एक बेहतरीन और दुर्लभतम उदाहरण है।
3. राजसी पालकी और हाथी का हौदा
शाही दौर में राजा-महाराजाओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पालकी और हाथियों की पीठ पर रखी जाने वाली बैठने की सीट (हौदा), जो पूरी तरह हाथी दांत और चांदी के काम से सुसज्जित है।
4. बारीक चटाई और जाली (Ivory Mat & Net)
हाथी दांत को सूत (धागे) की तरह महीन काटकर बनाई गई एक बेहद खूबसूरत चटाई और खिड़कीनुमा जाली, जिसे देखकर यह विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि यह किसी कठोर धातु या दांत से बनी है।
5. महाराजा रामेश्वर सिंह का स्वर्ण-रजत सिंहासन
संग्रहालय के हॉल नंबर 1 में रखा सोने, चांदी और बेशकीमती रत्नों से जड़ा हुआ दरभंगा राज का असली 'राज सिंहासन' जो इस रियासत के वैभव की गवाही देता है।
उपेक्षा और बदहाली देख छलका दर्द: 'यदि राजपरिवार तैयार हो, तो इंटैक लौटाएगा गौरव'
संग्रहालय के बाद इंटैक की टीम ने दरभंगा राज परिसर के ऐतिहासिक महलों— नरगौना पैलेस, मोती महल, लक्ष्मीश्वर विलास पैलेस (कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय), यूरोपियन गेस्ट हाउस और ऐतिहासिक राज किले का भी मुआयना किया।
इन आलीशान और अमूल्य इमारतों की दीवारों पर उगी झाड़ियों, टूटते हुए गुंबदों और प्रशासनिक उपेक्षा को देखकर इंटैक की टीम ने गहरी चिंता व्यक्त की।
फ्री टेक्निकल सपोर्ट का प्रस्ताव: चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि दरभंगा राज परिवार और स्थानीय न्यास (Foundation) आगे कदम बढ़ाए, तो इंटैक इन सभी ऐतिहासिक भवनों और दुर्लभ भोजपत्र/तालपत्र के अभिलेखों को वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जीवित (Restore) करने के लिए अपना पूरा तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञ इंजीनियर मुफ्त में उपलब्ध कराने को तैयार है।
चंद्रधारी संग्रहालय और कल्याणी फाउंडेशन की भी हुई सराहना
अपने इस भव्य दौरे के दौरान इंटैक चेयरमैन ने दरभंगा के ही चंद्रधारी संग्रहालय का भी अवलोकन किया और बाबू चंद्रधारी सिंह के धरोहर प्रेम की दिल खोलकर तारीफ की। इसके बाद टीम ने 'महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन' के पुस्तकालय का दौरा किया, जहां सदियों पुराने दुर्लभ दस्तावेज और प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजकर रखने के लिए फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों को देश की बौद्धिक विरासत का एक मजबूत स्तंभ बताया गया।
इंटैक के चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर द्वारा लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय को 'आइवरी म्यूजियम' घोषित करने की मांग केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार के पर्यटन और इतिहास के लिए एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। अगर इसे स्वतंत्र दर्जा और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग मिलती है, तो दरभंगा वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर ताजमहल और अजंता की गुफाओं की तरह चमक सकता है। बहरहाल, गेंद अब सरकार और राजपरिवार के पाले में है; देखना होगा कि फाइलों में दबी इस विरासत को नया जीवन कब मिलता है!