पूर्णिया नगर निगम में सफाई कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से नरकीय स्थिति: लगातार 8 दिनों से ठप है साफ-सफाई का कार्य
पूर्णिया: बिहार के सीमांचल क्षेत्र के सबसे बड़े और प्रमुख औद्योगिक व व्यावसायिक शहर पूर्णिया से एक बेहद गंभीर, चिंताजनक और स्वास्थ्य के लिए आसन्न खतरे की घंटी बजाने वाली खबर सामने आ रही है। पूर्णिया नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण पिछले 8 दिनों से शहर की पूरी सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। आलम यह है कि शहर के किसी भी घर से कूड़े का उठान नहीं हो रहा है, जिसके चलते गलियों, चौराहों और मुख्य मार्गों पर कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ खड़े हो गए हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि सड़ रहे कचरे और उससे उठती दुर्गंध से आजिज़ आकर स्थानीय लोग अब कूड़े के ढेरों में खुद ही आग लगा रहे हैं, जिससे निकलने वाले जहरीले और काले धुएं ने पूरे शहर की हवा को अत्यधिक प्रदूषित और विषैला बना दिया है। नागरिकों के स्वास्थ्य पर मंडराते इस गंभीर खतरे को देखते हुए नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) ने खुद मैदान में उतरकर मोर्चा संभाल लिया है और स्थिति से निपटने के लिए आपातकालीन कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
संकट की पृष्ठभूमि: क्यों और कैसे बिगड़े पूर्णिया के हालात?
किसी भी सुचारू शहर के संचालन में स्वच्छता रीढ़ की हड्डी मानी जाती है, लेकिन पूर्णिया नगर निगम में प्रशासनिक अनदेखी और कर्मचारियों की मांगों के बीच उपजे गतिरोध ने शहर को एक कचरा डंपिंग यार्ड में बदल दिया है।
सफाई कर्मियों की हड़ताल: अपनी विभिन्न मांगों, मानदेय और अन्य प्रशासनिक मुद्दों को लेकर नगर निगम के सफाई कर्मी पिछले आठ दिनों से हड़ताल पर हैं। काम ठप होने के कारण सफाई वाहन (Door-to-door garbage collection vehicles) अपने निर्धारित मार्गों पर नहीं निकल रहे हैं।
घरों से कचरा गायब, सड़कों पर अंबार: जब पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से घरों का कचरा लेने कोई वाहन नहीं आया, तो शहरवासियों ने मजबूर होकर अपने घरों का कचरा गलियों और मुख्य सड़कों के किनारे फेंकना शुरू कर दिया। देखते ही देखते पूरा शहर गंदगी की चपेट में आ गया।
कचरे में आग का तांडव और जहरीली हवा का संकट
जब कई दिनों तक कचरे का निस्तारण नहीं होता है, तो उसमें मीथेन और अन्य खतरनाक गैसें पनपने लगती हैं। पूर्णिया में यही स्थिति अब एक पर्यावरणीय और स्वास्थ्य आपदा का रूप ले चुकी है।
कूड़े के ढेरों में आग: शहर के कई इलाकों में कचरे के इन विशाल पहाड़ों में असामाजिक तत्वों या स्वतः रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण भीषण आग सुलग उठी है। प्लास्टिक, पॉलीथिन, बायो-मेडिकल कचरा और सड़े-गले पदार्थों के जलने से उठने वाले घने काले धुएं ने पूरे आसमान को ढक लिया है।
सांस लेना हुआ मुहाल: हवा की गुणवत्ता (Air Quality Index) में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बच्चों, बुजुर्गों और दमा (Asthma) के मरीजों के लिए घरों की खिड़कियां खोलना भी दूभर हो गया है। आंखों में जलन, गले में संक्रमण और सांस लेने में तकलीफ की शिकायतों के साथ लोग अस्पतालों का रुख करने लगे हैं। आम जनता का गुस्सा नगर निगम प्रशासन के खिलाफ सातवें आसमान पर है।
नगर आयुक्त का कड़ा रुख और मोर्चा संभालना
पूर्णिया में उत्पन्न इस नरकीय स्थिति और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक मचे बवाल के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया।
आधी रात और सुबह का औचक निरीक्षण: स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पूर्णिया के नगर आयुक्त ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने विभिन्न वार्डों, मुख्य चौराहों और कचरे के ढेरों वाले स्थानों का औचक निरीक्षण किया। नगर आयुक्त ने जल रहे कूड़े के ढेरों को तत्काल प्रभाव से बुझाने के लिए दमकल (Fire Tenders) गाड़ियों को मौके पर तैनात किया।
वैकल्पिक व्यवस्था और चेतावनी: नगर आयुक्त ने हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मियों से काम पर लौटने की अपील की है, साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कार्य में बाधा डालने या शहर को इस तरह बंधक बनाने का प्रयास किया गया, तो निगम प्रशासन कड़े कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएगा। वैकल्पिक श्रम बल (Alternative workforce) का इंतजाम कर युद्ध स्तर पर कचरा उठान का निर्देश दिया गया है।
प्रशासनिक रणनीति और आगे की कार्ययोजना
इस विकट परिस्थिति से उबरने के लिए नगर निगम ने एक आपातकालीन कार्ययोजना तैयार की है, ताकि शहर को इस जहरीले संकट से मुक्ति दिलाई जा सके।
युद्ध स्तर पर सफाई अभियान: अगले 48 घंटों के भीतर शहर के सभी प्रमुख मार्गों और मोहल्लों से कचरे के ढेरों को पूरी तरह साफ कर सुरक्षित डंपिंग जोन में भेजने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वास्थ्य सुरक्षा के उपाय: जिला स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावित इलाकों में फॉगिंग और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि संक्रामक बीमारियों (Epidemics) फैलने के खतरे को रोका जा सके।
पूर्णिया नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पिछले 8 दिनों से ठप पड़े सफाई कार्य, कचरे में आग लगने से जहरीली हुई हवा और नगर आयुक्त द्वारा खुद मोर्चा संभालने की यह घटना शहरी प्रशासन और स्थानीय निकायों की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है। यह वक्त आपसी खींचतान का नहीं, बल्कि पूर्णिया के नागरिकों के स्वास्थ्य और शहर की गरिमा को बचाने के लिए त्वरित, ठोस और स्थायी समाधान खोजने का है।