उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से आए हरिओम कश्यप की अचानक बिगड़ी तबीयत, सुल्तानगंज से मायागंज अस्पताल रेफर

सुल्तानगंज/भागलपुर (संवाद सूत्र): विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के दौरान बिहार के सुल्तानगंज से झारखंड के देवघर तक सजने वाले कांवरिया पथ पर इन दिनों आस्था और भक्ति का सैलाब उमड़ा हुआ है। देश के कोने-कोने से लाखों शिवभक्त अपनी मनोकामनाओं को लेकर इस कठिन पदयात्रा पर निकल रहे हैं। इसी बीच, उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने आए एक कांवरिया की अचानक तबीयत बिगड़ने से प्रशासनिक महकमे और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। कांवरिया हरिओम कश्यप को गंभीर हालत में परिजनों और स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से सुल्तानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद भी स्थिति में सुधार न होने पर चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज) रेफर कर दिया है।

फतेहपुर से अटूट आस्था लेकर पहुंचे थे हरिओम कश्यप

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के रहने वाले हरिओम कश्यप पिछले कई दिनों से बाबा भोलेनाथ की इस पावन यात्रा की तैयारी कर रहे थे:

लंबी यात्रा और संकल्प: हरिओम अपने परिवार और कुछ स्थानीय साथियों के साथ सुल्तानगंज पहुंचे थे। उनकी इच्छा उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरकर लगभग 105 किलोमीटर की लंबी और कठिन पदयात्रा पूरी करने की थी।

गंगा तट पर पूजन और अचानक आई आफत: गुरुवार को सुल्तानगंज पहुंचने के बाद उन्होंने गंगा स्नान किया और अपनी यात्रा की शुरुआत ही की थी कि अचानक अत्यधिक शारीरिक थकान, उमस भरे मौसम और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के कारण उनके सीने में तेज दर्द और चक्कर आने की शिकायत शुरू हो गई। देखते ही देखते उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।

स्वास्थ्य केंद्र सुल्तानगंज में अफरा-तफरी

जैसे ही हरिओम कश्यप के अस्वस्थ होने की खबर उनके साथियों और वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों तक पहुंची, मौके पर अफरा-तफरी मच गई:

त्वरित कार्रवाई: साथ चल रहे परिजनों ने बिना समय गंवाए स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की सहायता से उन्हें तुरंत सुल्तानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया।

प्राथमिक उपचार: अस्पताल के आपातकालीन कक्ष (Emergency Ward) में तैनात डॉक्टरों और मेडिकल टीम ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए हरिओम का इलाज शुरू किया। उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट और ड्रिप (Glucos/Saline) चढ़ाई गई, ताकि उनकी बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

गंभीर हालत देख मायागंज अस्पताल रेफर

सुल्तानगंज अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बावजूद जब हरिओम की सेहत में कोई खास सुधार नहीं दिखा और उनकी बेचैनी बढ़ने लगी, तब डॉक्टरों ने बड़ा निर्णय लिया:

बेहतर इलाज की आवश्यकता: ऑन-ड्यूटी चिकित्सकों ने बताया कि मरीज को अत्यधिक कमजोरी और कार्डियक या अन्य गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं महसूस हो रही हैं, जिसके लिए उच्च स्तरीय चिकित्सा उपकरणों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख की आवश्यकता है।

मायागंज अस्पताल के लिए रवाना: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें तुरंत भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) के लिए रेफर कर दिया। एम्बुलेंस के जरिए परिजनों और स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में उन्हें भागलपुर रवाना किया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

कांवरिया पथ पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और प्रशासनिक मुस्तैदी

इस घटना ने एक बार फिर कांवरिया पथ पर यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया है:

स्वास्थ्य शिविरों की भूमिका: श्रावणी मेला क्षेत्र में प्रशासन द्वारा जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर और मेडिकल कैंप स्थापित किए गए हैं, ताकि किसी भी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर उसे तत्काल राहत पहुंचाई जा सके।

प्रशासन की अपील: जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार कांवरियों से अपील कर रहे हैं कि वे अपनी शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें। तेज धूप, उमस और अत्यधिक पैदल चलने के कारण डिहाइड्रेशन की समस्या आम हो जाती है, इसलिए रास्ते में पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस और तरल पदार्थों का सेवन करते रहें।

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से बाबा बैद्यनाथ की आस लेकर आए हरिओम कश्यप की अचानक तबीयत बिगड़ने की यह घटना यह दर्शाती है कि कांवर यात्रा जितनी आध्यात्मिक रूप से पावन है, उतनी ही शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण भी है। सुल्तानगंज से मायागंज अस्पताल तक की इस आपाधापी के बीच स्वास्थ्य कर्मियों और प्रशासन की तत्परता सराहनीय रही। हर कोई बाबा भोलेनाथ से यही प्रार्थना कर रहा है कि हरिओम कश्यप जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ हों और अपनी अधूरी रही यात्रा को पुनः पूरे उत्साह के साथ पूरा कर सकें।