मुरारका महाविद्यालय, सुल्तानगंज में यूजी सेमेस्टर-1 के विद्यार्थियों के लिए भव्य दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन

 उच्च शिक्षा की दहलीज पर कदम रखने वाले विद्यार्थियों को महाविद्यालय के वातावरण, शैक्षणिक प्रणाली और अनुशासनात्मक नियमों से परिचित कराने के उद्देश्य से, बुधवार को मुरारका महाविद्यालय, सुल्तानगंज में यूजी (सीबीसीएस) सेमेस्टर-1 के लिए एक भव्य 'दीक्षा कार्यक्रम' का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए एक नई शैक्षणिक यात्रा का शुभारंभ साबित हुआ।

प्राचार्य का संबोधन: इतिहास और गौरव गाथा

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नागेन्द्र तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में मुरारका महाविद्यालय के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार यह महाविद्यालय दशकों से क्षेत्र के मेधावी विद्यार्थियों को तराशने और उन्हें राष्ट्र निर्माण के योग्य बनाने में अपनी भूमिका निभा रहा है।

प्राचार्य ने कहा, "मुरारका महाविद्यालय केवल ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि संस्कारों और ज्ञान का केंद्र है। आप सभी इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने जा रहे हैं, इसलिए यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने आचरण और शिक्षा के माध्यम से इस संस्था का मान बढ़ाएं।" उन्होंने महाविद्यालय में उपलब्ध अत्याधुनिक संसाधनों, समृद्ध पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और खेलकूद सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी, ताकि विद्यार्थी अपनी क्षमताओं का अधिकतम उपयोग कर सकें।

सीबीसीएस (CBCS) प्रणाली: एक परिचय

कार्यक्रम के दौरान शैक्षणिक विशेषज्ञों ने स्नातक स्तर पर लागू 'च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम' (CBCS) की बारीकियों को समझाया। विद्यार्थियों को बताया गया कि कैसे यह नई प्रणाली उन्हें विषय चयन में लचीलापन और कौशल-आधारित ज्ञान प्रदान करती है।

सीबीसीएस के अंतर्गत निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया:

विषय चयन की स्वतंत्रता: छात्र अपनी रुचि और भविष्य के लक्ष्यों के आधार पर मुख्य विषयों के साथ-साथ इलेक्टिव विषयों का चुनाव कैसे करें।

क्रेडिट प्रणाली: प्रत्येक कोर्स के लिए निर्धारित क्रेडिट और उसके संचयी प्रभाव को समझना।

आंतरिक मूल्यांकन: परीक्षा के साथ-साथ समय-समय पर होने वाले टेस्ट, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट्स की भूमिका।

अनुशासन और सर्वांगीण विकास

प्राचार्य डॉ. नागेन्द्र तिवारी ने विशेष रूप से अनुशासन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कॉलेज जीवन में स्वतंत्रता के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। विद्यार्थियों को समय की पाबंदी, परिसर में शालीनता और शिक्षकों के प्रति सम्मान बनाए रखने की सलाह दी गई।

महाविद्यालय में सक्रिय विभिन्न समितियों, जैसे कि राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), एनसीसी (NCC) और सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के बारे में भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। प्राचार्य ने आह्वान किया कि विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि वे इन गतिविधियों से जुड़कर अपनी नेतृत्व क्षमता और टीम भावना का विकास करें।

संसाधनों का इष्टतम उपयोग

डॉ. तिवारी ने पुस्तकालय की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को नियमित रूप से वहां जाने और विभिन्न संदर्भ पुस्तकों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि एक सफल विद्यार्थी वही है जो सूचनाओं के अंबार में से ज्ञान के मोती चुनना जानता है। महाविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों को हर संभव शैक्षणिक सहायता देने के लिए तत्पर है, बशर्ते विद्यार्थी सीखने के प्रति जिज्ञासु रहें।

प्रश्न-उत्तर सत्र और संवाद

कार्यक्रम के अंत में एक संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें नवागंतुक विद्यार्थियों ने अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं। पाठ्यक्रम से लेकर करियर काउंसिलिंग तक के कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों द्वारा दिए गए। इससे विद्यार्थियों में व्याप्त संशय दूर हुआ और उनमें महाविद्यालय की कार्यप्रणाली के प्रति विश्वास बढ़ा।

दीक्षा कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए किया गया। मुरारका महाविद्यालय के प्राध्यापकों, शिक्षकेतर कर्मियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को अत्यंत सफल बनाया।

यह दीक्षा कार्यक्रम मात्र एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों के लिए एक दिशा-निर्देश साबित हुआ जो अपनी स्नातक शिक्षा के माध्यम से अपने सपनों को उड़ान देना चाहते हैं। सुल्तानगंज के इस प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है कि वह न केवल डिग्री प्रदान करेगा, बल्कि एक सशक्त नागरिक का निर्माण भी करेगा। सत्र 2026 की शुरुआत के साथ ही महाविद्यालय परिसर में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है।