मुजफ्फरपुर में ऐतिहासिक बाबा गरीबनाथ धाम श्रावणी मेले का भव्य शुभारंभ: मंत्रीगणों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संपन्न हुई विशेष पूजा-अर्चना

बिहार के उत्तर क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध और आस्था के बड़े केंद्र मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ धाम में वार्षिक श्रावणी मेले का विधिवत और भव्य उद्घाटन किया गया। इस उद्घाटन समारोह में राज्य सरकार के कई दिग्गज मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसमें मुख्य रूप से राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता, और पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री राम (रामा) निषाद जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।

डीएन हाई स्कूल परिसर में हुआ भव्य उद्घाटन समारोह

श्रावणी मेले का मुख्य उद्घाटन समारोह मुजफ्फरपुर के स्थानीय डीएन हाई स्कूल के प्रांगण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री सह मुजफ्फरपुर जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी (DM) कुमार गौरव ने सभी आगत अतिथियों का स्वागत किया और उन्हें पौधे का गमला एवं बाबा गरीबनाथ की तस्वीर भेंट की।

वहीं, गरीबनाथ मंदिर परिवार की ओर से प्रसिद्ध पुरोहित पंडित विनय पाठक ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी मंत्रियों और विशिष्ट अतिथियों को माला पहनाकर और शिव पट्टिका भेंट कर सम्मानित किया।

उद्घाटन सत्र के दौरान ही मंदिर की पारंपरिक स्मारिका 'शिवम सुंदरम' और जिला प्रशासन के आधिकारिक 'श्रावणी मोबाइल ऐप' का भी लोकार्पण किया गया, जिससे मेले में आने वाले कांवरियों और श्रद्धालुओं को सूचनाएं आसानी से मिल सकें।

प्रमुख अतिथियों के संबोधन और मुख्य बिंदु

समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश के बड़े नेताओं और मंत्रियों ने इस आयोजन को लेकर अपनी बात रखी और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने का पूरा भरोसा दिलाया:

डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल (राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री): प्रभारी मंत्री डॉ. जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि देवाधिदेव महादेव भोलेनाथ की आराधना केवल एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर आत्मशुद्धि और एक सकारात्मक जीवन जीने की गहरी प्रेरणा देती है। उन्होंने समाज में सर्वधर्म समभाव और आपसी भाईचारे का संदेश देते हुए सभी प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने अपील की कि समाज को हर तरह के भेदभाव और वैमनस्य से ऊपर उठकर आगे बढ़ना चाहिए।

केदार प्रसाद गुप्ता (पर्यटन मंत्री): पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि पदभार संभालने के बाद उनकी पहली प्राथमिकताओं में बाबा गरीबनाथ धाम का विकास शामिल था। उन्होंने जानकारी दी कि बाबा गरीबनाथ धाम में 6.5 करोड़ रुपये की लागत से भव्य 'कॉरिडेर' (Corridor) का निर्माण कराया जाएगा, जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। इससे भविष्य में यहां आने वाले श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकेंगी।

राम (रामा) निषाद (मंत्री): पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री राम निषाद ने कहा कि सावन के पवित्र महीने में पूरी मुजफ्फरपुर नगरी शिवमय हो जाती है। दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों की सेवा के लिए सरकार और प्रशासन पूरी तरह तत्पर है।

 पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान

उद्घाटन समारोह से पूर्व और इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। पंडित विनय पाठक एवं अन्य आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने बाबा गरीबनाथ, बाबा दूधनाथ और बाबा खगेश्वरनाथ की पूजा-अर्चना की।

मंदिर में जलाभिषेक कर देश और राज्य की खुशहाली की प्रार्थना की गई।

इस दौरान पूरा मंदिर परिसर 'हर हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से गूंज उठा। हजारों की संख्या में दूर-दराज से पहुंचे कांवरियों और श्रद्धालुओं ने भी कतारबद्ध होकर बाबा का दर्शन किया।

सुरक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक तैयारियां

श्रावण मास के दौरान देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में कांवड़िए मुजफ्फरपुर पहुंचते हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं:

कंट्रोल रूम और निगरानी: मेला क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए एक केंद्रीयकृत कंट्रोल रूम बनाया गया है। सुरक्षा के लिहाज से च चप्पे पर पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई है।

स्वच्छता और पेयजल: पिछले कुछ दिनों से सफाई व्यवस्था को लेकर आ रही चुनौतियों के बीच जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्थाओं के तहत कांवरिया पथ पर साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा शिविरों की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की है।

यातायात प्रबंधन: शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक और रूट डायवर्जन लागू किया गया है ताकि बोल बम के नारों के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह मुजफ्फरपुर की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता की भी एक अनूठी मिसाल पेश करता है।