पांच साल से उपेक्षा का शिकार पंचायत सरकार भवन, भूसा घर और जुआरियों का अड्डा बना करोड़ों की सरकारी संपत्ति
संवाददाता। ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर ही सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए पंचायत सरकार भवन का हाल बदहाल है। स्थानीय प्रखंड की बैरिया पंचायत में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पंचायत सरकार भवन पिछले करीब पांच वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। नियमित संचालन नहीं होने और संबंधित विभाग की अनदेखी के कारण यह भवन अब सरकारी कार्यालय के बजाय ग्रामीणों के लिए भूसा रखने की जगह और असामाजिक तत्वों के लिए जुआ खेलने का अड्डा बन गया है।
भवन की वर्तमान स्थिति सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और सार्वजनिक संपत्तियों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस भवन का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके गांव के पास ही विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना था, वह आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
पंचायत सरकार भवन का उद्देश्य हुआ विफल
राज्य सरकार ने पंचायत स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और ग्रामीणों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाने के लिए पंचायत सरकार भवनों का निर्माण कराया था। इन भवनों में आवासीय प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन, कृषि योजनाएं, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं तथा अन्य सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी।
इसके अलावा पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत सचिव, राजस्व कर्मचारी और अन्य विभागों के कर्मियों के बैठने की व्यवस्था भी इन्हीं भवनों में प्रस्तावित थी। लेकिन बैरिया पंचायत का यह भवन अपने मूल उद्देश्य को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
पांच वर्षों से नहीं हो रहा उपयोग
ग्रामीणों का कहना है कि भवन का निर्माण पूरा होने के बाद कुछ समय तक यहां सीमित गतिविधियां हुईं, लेकिन पिछले करीब पांच वर्षों से भवन पूरी तरह बंद पड़ा है। किसी भी सरकारी विभाग का नियमित संचालन यहां नहीं हो रहा है।
लंबे समय से खाली पड़े रहने के कारण भवन की हालत लगातार खराब होती चली गई। अब यह परिसर असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है।
भूसा घर बन गया सरकारी भवन
ग्रामीणों के अनुसार, भवन के कमरों में कई लोगों ने भूसा और कृषि उपयोग की अन्य सामग्री रखनी शुरू कर दी है। सरकारी भवन का इस प्रकार निजी उपयोग किए जाने से इसकी उपयोगिता लगभग समाप्त हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने भवन का संचालन शुरू कर दिया होता तो आज यह स्थिति नहीं होती।
जुआरियों का अड्डा बनने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शाम ढलते ही भवन परिसर में कुछ असामाजिक तत्व जुट जाते हैं और वहां जुआ खेलते हैं। इससे आसपास के लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन में नियमित सरकारी कार्यालय संचालित होता, तो इस प्रकार की गतिविधियों पर स्वतः रोक लग जाती।
भवन की हालत हुई जर्जर
लगातार उपेक्षा के कारण भवन की कई खिड़कियां और दरवाजे टूट चुके हैं। कई स्थानों पर दीवारों का प्लास्टर उखड़ने लगा है। परिसर में झाड़ियां उग आई हैं और साफ-सफाई के अभाव में भवन की सुंदरता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
बारिश के मौसम में भवन के आसपास जलजमाव की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है, जिससे स्थिति और खराब हो जाती है।
करोड़ों रुपये की लागत पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस भवन का उपयोग नहीं होना सरकारी धन की बर्बादी है। उनका मानना है कि यदि भवन का सही तरीके से संचालन होता तो हजारों ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ अपने पंचायत स्तर पर ही मिल सकता था।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो ऐसी संपत्तियों की देखरेख और उपयोग सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों को हो रही परेशानी
भवन बंद रहने के कारण पंचायत के लोगों को छोटे-छोटे सरकारी कार्यों के लिए प्रखंड और अन्य कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी होती है।
विशेष रूप से बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पंचायत प्रतिनिधियों ने की कार्रवाई की मांग
स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत सरकार भवन को शीघ्र चालू कराया जाए। उन्होंने भवन की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था, नियमित साफ-सफाई और आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि भवन का नियमित संचालन शुरू हो जाए तो पंचायत स्तर पर अधिकांश सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा जरूरी
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी भवन केवल ईंट और सीमेंट की संरचना नहीं होते, बल्कि जनता के पैसे से तैयार की गई सार्वजनिक संपत्ति होते हैं। ऐसे भवनों का रखरखाव और उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन और स्थानीय समुदाय दोनों की जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे भवनों का संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में उनकी मरम्मत पर और अधिक सरकारी धन खर्च करना पड़ेगा।
प्रशासन से ग्रामीणों की बड़ी उम्मीद
बैरिया पंचायत के ग्रामीण अब उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर पंचायत सरकार भवन को फिर से उपयोगी बनाएगा। यदि भवन की मरम्मत कर यहां नियमित सरकारी कार्यालय शुरू किए जाते हैं, तो हजारों लोगों को प्रमाण पत्र, पेंशन, कृषि योजनाओं और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ पंचायत स्तर पर ही मिल सकेगा।
करीब पांच वर्षों से उपेक्षा झेल रहा यह पंचायत सरकार भवन आज सरकारी व्यवस्था की लापरवाही का प्रतीक बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को यूं ही बर्बाद होने देना उचित नहीं है। समय रहते यदि प्रशासन प्रभावी कदम उठाता है, तो यह भवन एक बार फिर ग्रामीण विकास और जनसेवा का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।