भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिलौटी पहुंचे सीपीएम-एमएल महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, परिजनों से मिलकर न्याय की मांग

आरा। भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। बुधवार को सीपीएम-एमएल (लिबरेशन) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और डुमरांव विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा बिलौटी गांव पहुंचे। दोनों नेताओं ने कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात की, उन्हें सांत्वना दी और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।

गांव पहुंचने पर दोनों नेताओं ने सबसे पहले भरत भूषण तिवारी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ लंबी बातचीत की और घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। नेताओं ने परिजनों का पक्ष सुनने के बाद निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

परिजनों से मिलकर जाना घटनाक्रम

दीपांकर भट्टाचार्य और अजीत कुशवाहा ने मृतक के माता-पिता, अन्य परिजनों और ग्रामीणों से मुलाकात की। परिवार के सदस्यों ने नेताओं को पूरी घटना की जानकारी दी और अपनी पीड़ा साझा की।

परिजनों ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने न्याय दिलाने और मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग दोहराई।

तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

गांव पहुंचते ही दोनों नेताओं ने भरत भूषण तिवारी के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और पार्टी कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान कुछ देर का मौन रखकर दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल

मीडिया से बातचीत के दौरान सीपीएम-एमएल के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि राज्य में कानून का शासन कमजोर होता दिखाई दे रहा है और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भरत भूषण तिवारी का कथित एनकाउंटर गलत था और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि किसी भी मामले में सच्चाई सामने लाने के लिए पारदर्शी और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। उनका कहना था कि यदि किसी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो संबंधित एजेंसियों को निष्पक्ष जांच कर सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

अजीत कुशवाहा ने भी की कार्रवाई की मांग

पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा ने भी मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक की मृत्यु से जुड़े विवादित मामले में तथ्यों की स्पष्ट जांच होना जरूरी है ताकि लोगों के मन में किसी प्रकार का संदेह न रहे।

उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज को लोकतांत्रिक तरीके से संबंधित मंचों तक पहुंचाया जाएगा।

गांव में जुटे बड़ी संख्या में लोग

दोनों नेताओं के गांव पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्र हो गए। लोगों ने नेताओं के सामने अपनी बातें रखीं और घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

ग्रामीणों ने भी मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की। गांव में पूरे दिन इस घटना को लेकर चर्चाओं का माहौल बना रहा।

राजनीतिक सरगर्मी हुई तेज

इस हाई-प्रोफाइल दौरे के बाद भरत भूषण तिवारी का मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन इस मामले पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

पुलिस जांच पर टिकी निगाहें

इस मामले में अब सभी की नजर पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर है। जांच से जुड़े तथ्यों और आधिकारिक निष्कर्षों के सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही जनविश्वास मजबूत होता है तथा किसी भी प्रकार के विवाद का समाधान संभव हो पाता है।

न्याय की उम्मीद में परिवार

भरत भूषण तिवारी के परिजन अब भी निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा है और वे चाहते हैं कि पूरे मामले के सभी तथ्यों की गहन जांच की जाए।

बुधवार को सीपीएम-एमएल नेताओं का बिलौटी गांव पहुंचना इस मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ले आया। हालांकि, घटना से जुड़े आरोप और प्रत्यारोपों के बीच अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। तब तक यह मामला भोजपुर ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में चर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा।