मुजफ्फरपुर के सकरा प्रखंड में कृषि फीडर और सिंचाई योजना की पोल खुली: तीन साल पहले आवेदन के बावजूद खेतों तक नहीं पहुंची बिजली, बांस के सहारे तार खींचने को मजबूर हैं अन्नदाता
मुजफ्फरपुर: देश और राज्य की सरकारों द्वारा भले ही किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हों, लेकिन मैदानी हकीकत इन दावों की कलई खोल देती है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जो सरकारी व्यवस्था और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रखंड क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने कृषि विद्युत सिंचाई योजना के तहत खेतों तक बिजली कनेक्शन पाने के लिए आज से करीब तीन साल पहले आवेदन किया था, लेकिन लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी उनके खेतों तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। विवश होकर किसानों को अपनी जेब से पैसे खर्च कर खुद तार खरीदने पड़ रहे हैं और बांस के सहारे खेतों तक बिजली ले जानी पड़ रही है।
क्या है पूरी समस्या और कृषि विद्युत सिंचाई योजना की हकीकत?
सरकार की 'हर खेत तक सिंचाई का पानी' पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना के तहत किसानों को खेतों में लगे नलकूप (Tubewell) और बोरिंग चलाने के लिए रियायती दरों पर बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके लिए सकरा प्रखंड के विभिन्न गांवों के किसानों ने विधिवत रूप से आवेदन किया था और सभी निर्धारित औपचारिकताएं भी पूरी की थीं।
तीन साल का लंबा इंतजार: किसानों का कहना है कि उन्होंने तीन साल पहले फाइल जमा की थी। इस उम्मीद में कि अब उनके खेतों में डीजल पंप सेट के महंगे खर्च से छुटकारा मिलेगा और वे बिजली से कम लागत में सिंचाई कर सकेंगे, उन्होंने विभाग के कई चक्कर काटे।
विभाग की उदासीनता: स्थानीय बिजली विभाग और संबंधित अधिकारियों की उदासीनता के कारण फाइलों पर धूल जम गई, लेकिन धरातल पर एक भी खंभा या तार नहीं बिछाया गया। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी किसानों को सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले।
बांस के सहारे जान जोखिम में डालकर बिजली खींचने की विवशता
खेती समय की मांग होती है। यदि धान के बिचड़े या अन्य फसल के समय पर पानी न मिले, तो पूरी फसल सूख जाती है। ऐसी स्थिति में सकरा के किसानों के पास कोई और विकल्प नहीं बचा है।
खुद खरीदना पड़ रहा है तार: मजबूरी में किसानों ने अपने ही पैसों से बाजार से बिजली के तार खरीदे हैं।
बांस के डंडों का सहारा: दूर स्थित घरेलू या अन्य बिजली के स्रोतों से खेतों तक बिजली पहुंचाने के लिए किसानों ने खेतों में बांस गाड़े हैं और उन्हीं बांस के सहारे नंगे या हल्के तारों को खींचकर अपने नलकूप तक बिजली ले जा रहे हैं।
जानलेवा खतरा: खेतों में बांस के सहारे इस प्रकार खींचे गए तार बेहद खतरनाक होते हैं। तेज आंधी-तूफान, बारिश या हवा चलने पर इन तारों के टूटने का खतरा हमेशा बना रहता है। इससे कभी भी कोई बड़ा हादसा (Current Shock) हो सकता है, जिससे इंसानों और मवेशियों की जान जाने का अंदेशा हर वक्त डराता रहता है।
किसानों का छलका दर्द: महंगे डीजल पर निर्भरता जारी
सकरा के किसानों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि बिजली कनेक्शन न मिलने के कारण उन्हें आज भी महंगे डीजल पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
आर्थिक बोझ: आज के समय में डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। डीजल पंप सेट से एक बीघा खेत की सिंचाई करने में किसानों की जेब पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है, जिससे उनकी लागत लगातार बढ़ रही है और मुनाफा शून्य हो जाता है।
सरकारी योजना का लाभ कागजों तक सीमित: किसानों का कहना है कि यदि समय पर कृषि कनेक्शन मिल गया होता, तो उनकी फसल की लागत कम आती और वे आर्थिक रूप से मजबूत होते, लेकिन विभागीय लालफीताशाही (Red Tapism) के कारण योजना कागजों तक ही सिमट कर रह गई है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जब धरातल पर काम करने की बारी आती है, तो कोई भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनकी सुधि लेने नहीं आता।
जिम्मेदार अधिकारियों की प्रतिक्रिया: जब इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनकी तरफ से टालमटोल वाले जवाब सामने आए। कभी टेंडर प्रक्रिया में देरी तो कभी सामग्री (Materials) की कमी का रोना रोकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।
तत्काल सुधार की है सख्त जरूरत
सकरा प्रखंड के किसानों की यह लाचारी इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में कितनी बड़ी खामियां हैं।
प्रशासन से उम्मीद: किसानों ने जिला प्रशासन और ऊर्जा विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस मामले की तुरंत उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
तत्काल कनेक्शन की मांग: किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनके खेतों तक विधिवत बिजली पोल और तार के जरिए कनेक्शन नहीं पहुंचाया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
मुजफ्फरपुर के सकरा में कृषि सिंचाई योजना का यह हाल बताता है कि अन्नदाता आज भी किस कदर बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सरकार के विकास के दावों के बीच बांस के सहारे खेतों तक बिजली खींचते किसानों की यह तस्वीरें प्रशासनिक तंत्र के माथे पर एक बड़ा कलंक हैं, जिसे जल्द से जल्द दूर किए जाने की सख्त आवश्यकता है।