विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन' के तहत प्रशिक्षण संपन्न; 'जी रामजी योजना' में रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़कर होगी अधिक
सुल्तानगंज ब्लॉक परिसर स्थित मनरेगा भवन में सोमवार को 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन' के तत्वावधान में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ग्रामीण विकास और आजीविका सुरक्षा को लेकर कई ऐतिहासिक घोषणाएं और तकनीकी जानकारियां साझा की गईं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी 'जी रामजी योजना' रही, जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी को वर्तमान 100 दिनों से बढ़ाकर अधिक करने और आजीविका के नए अवसर सृजित करने पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। इस कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी (PO), सभी पंचायतों के मुखिया, पंचायत रोजगार सेवक (PRS) और ग्रामीण आजीविका दीदियों ने मुख्य रूप से भाग लिया।
विकसित भारत और ग्रामीण रोजगार का नया खाका
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की राह ग्रामीण आजीविका को मजबूत किए बिना अधूरी है। इसी संकल्प के तहत 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन' को जमीनी स्तर पर उतारा जा रहा है।
रोजगार की नई गारंटी: अब तक मनरेगा के तहत वित्तीय वर्ष में केवल 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती थी। लेकिन नई 'जी रामजी योजना' के समन्वय से इस अवधि को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, ताकि ग्रामीण युवाओं और मजदूरों का पलायन रोका जा सके।
असेट क्रिएशन (संपत्ति निर्माण): मिशन का मुख्य ध्यान केवल गड्ढे खोदने या मिट्टी काटने पर नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी संपत्तियों (जैसे- सामुदायिक तालाब, अमृत सरोवर, चेक डैम, और पंचायत स्तर पर कोल्ड स्टोरेज) के निर्माण पर केंद्रित रहेगा।
क्या है 'जी रामजी योजना' और इसका नया स्वरूप?
प्रशिक्षण के दौरान कार्यक्रम अधिकारियों ने 'जी रामजी योजना' के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। इस योजना को ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा एक नए रूप में अपग्रेड किया गया है:
100 दिनों से अधिक का कार्य विस्तार
ग्रामीण मजदूरों की सबसे बड़ी शिकायत यह रहती थी कि 100 दिन का काम पूरा होने के बाद वे साल के बाकी दिन बेरोजगार हो जाते हैं। 'जी रामजी योजना' के नए प्रावधानों के तहत लक्षित परिवारों, विशेषकर अत्यंत पिछड़े और महिला-प्रधान परिवारों को अब 100 दिनों से अधिक (संभावित 150 दिन) के सुनिश्चित रोजगार की गारंटी दी जाएगी।
कौशल विकास (Skill Development) से जुड़ाव
इस योजना के तहत केवल अकुशल (Unskilled) श्रम ही नहीं, बल्कि मजदूरों को अर्ध-कुशल (Semi-skilled) बनाने के लिए विशेष ऑन-साइट ट्रेनिंग दी जाएगी। जैसे- राजमिस्त्री का काम, जल जीवन मिशन के तहत प्लंबिंग और सोलर लाइट रिपेयरिंग। इससे मजदूरों की दैनिक मजदूरी दर में भी स्वतः वृद्धि होगी।
आजीविका मिशन: 'जीविका दीदियों' की मुख्य भूमिका
सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम में सुल्तानगंज प्रखंड की दर्जनों 'जीविका' समूह की दीदियों ने हिस्सा लिया। 'विकसित भारत मिशन' के तहत महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सबसे ऊपरी पायदान पर रखा गया है।
लखपति दीदी पहल: प्रशिक्षण में बताया गया कि आजीविका मिशन का लक्ष्य प्रत्येक सक्रिय जीविका दीदी की वार्षिक आय को न्यूनतम 1 लाख रुपये तक पहुंचाना है। इसके लिए उन्हें छोटे उद्योगों जैसे- मशरूम उत्पादन, बकरी पालन, मुर्गी पालन और सिलाई-कढ़ाई के लिए ब्याज-मुक्त या कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
बाजार से जुड़ाव (Market Linkage): ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बेचने के लिए डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण भी इस सत्र में शुरू किया गया।
पारदर्शिता के लिए डिजिटल तकनीक और जियो-टैगिंग पर जोर
प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में पंचायत रोजगार सेवकों और मुखिया संघ के प्रतिनिधियों को पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश दिए गए।
100% जियो-टैगिंग (Geo-Tagging): 'जी रामजी योजना' और मनरेगा के तहत होने वाले हर एक कार्य की तीन चरणों में जियो-टैगिंग अनिवार्य होगी—काम शुरू होने से पहले, काम के दौरान और काम पूरा होने के बाद। इससे कागजी घपलों और फर्जी मस्टर्ड रोल (Mustor Roll) पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
आधार लिंक्ड भुगतान: शत-प्रतिशत मजदूरी का भुगतान 'आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम' (ABPS) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी।
सुल्तानगंज के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के अंत में सुल्तानगंज के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) ने कहा:
"यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सुल्तानगंज के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने वाला साबित होगा। 'जी रामजी योजना' के तहत रोजगार के दिनों का दायरा बढ़ने से हमारे ब्लॉक के हजारों निपुण और अनिपुण मजदूरों को सीधा लाभ होगा। हम सभी मुखिया और रोजगार सेवकों से अपील करते हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर तुरंत योग्य परिवारों का सर्वे करें ताकि कोई भी जरूरतमंद इस गारंटीड रोजगार से वंचित न रहे।"
स्थानीय मुखिया संघ के अध्यक्ष ने भी इस कदम की सराहना की और कहा कि रोजगार के दिन बढ़ने से गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार दोगुनी हो जाएगी।
योजना और प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएं (At a Glance)
| बिंदु / पैरामीटर | विवरण और नए प्रावधान |
|---|---|
| आयोजन स्थल | मनरेगा भवन, सुल्तानगंज प्रखंड |
| मुख्य मिशन | विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन |
| फ्लैगशिप योजना | 'जी रामजी योजना' |
| बड़ा बदलाव | रोजगार की न्यूनतम गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर अधिक किया गया |
| मुख्य फोकस क्षेत्र | महिला सशक्तिकरण (जीविका), कौशल विकास, पारदर्शी डिजिटल भुगतान |
| तकनीकी उपकरण | NMMS ऐप से हाजिरी, जियो-टैगिंग और आधार बेस्ड पेमेंट |
सुल्तानगंज के मनरेगा भवन में सोमवार को संपन्न हुआ यह एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक सरकारी बैठक नहीं थी, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने का एक मजबूत रोडमैप है। 'जी रामजी योजना' के माध्यम से रोजगार के दिनों को 100 दिन से आगे बढ़ाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार ग्रामीण श्रम की वास्तविक कीमत और उसकी जरूरतों को समझ रही है। यदि इस प्रशिक्षण में दी गई तकनीकी जानकारियों को सुल्तानगंज की सभी पंचायतों में ईमानदारी से लागू किया गया, तो आने वाले दिनों में यह ब्लॉक रोजगार सृजन और महिला आजीविका के मामले में जिले का एक रोल मॉडल बनकर उभरेगा।