प्रमंडलीय स्तर के पैरा-लीगल स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित रविवार को आयोजित प्रशिक्षण में कानूनी जागरूकता और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने पर जोर

भागलपुर: भागलपुर में रविवार को प्रमंडलीय स्तर के पैरा-लीगल स्वयंसेवकों (PLVs) के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वयंसेवकों को कानूनी सहायता, लोगों के अधिकारों और जरूरतमंद व्यक्तियों तक विधिक सेवाओं की जानकारी प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित करना था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उनके दायित्वों और कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में भागलपुर प्रमंडल के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पैरा-लीगल स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बताया गया कि समाज के कमजोर, वंचित और आर्थिक रूप से असमर्थ लोगों तक कानूनी सहायता और सरकारी विधिक सेवाओं की जानकारी पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।

कानूनी जागरूकता फैलाने पर जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रम में कानूनी जागरूकता को प्रमुख विषय बनाया गया। स्वयंसेवकों को बताया गया कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले कई लोगों को अपने कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सेवाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं होती है। ऐसे लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने में पैरा-लीगल स्वयंसेवक महत्वपूर्ण कड़ी का काम कर सकते हैं।

उन्हें लोगों को उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता, परामर्श और अन्य विधिक सेवाओं के बारे में जानकारी देने के तरीकों से अवगत कराया गया। साथ ही जरूरतमंद व्यक्ति को उचित कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विधिक सेवा संस्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी समझाई गई।

स्वयंसेवकों के दायित्व बताए गए

प्रशिक्षण के दौरान PLVs के दायित्वों और जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की गई। उन्हें बताया गया कि उन्हें अपने क्षेत्र में लोगों की समस्याओं को समझना और जरूरत पड़ने पर उन्हें विधिक सेवा संस्थानों से जोड़ना है।

स्वयंसेवकों को यह भी समझाया गया कि किसी भी मामले में पक्षकारों को गलत या अधूरी जानकारी देने से बचना चाहिए। उन्हें उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के बारे में तथ्यात्मक जानकारी देकर संबंधित सक्षम संस्था या अधिवक्ता से संपर्क कराने में सहयोग करना चाहिए।

कमजोर वर्गों तक पहुंच बनाने की जरूरत

कार्यक्रम में समाज के कमजोर वर्गों तक कानूनी सहायता पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और अन्य जरूरतमंद वर्गों को उपलब्ध विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी देने की आवश्यकता बताई गई।

प्रशिक्षकों ने कहा कि कई बार लोग कानूनी प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में अपनी समस्या को लेकर उचित मंच तक नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे मामलों में पैरा-लीगल स्वयंसेवक प्रारंभिक स्तर पर मार्गदर्शन देकर लोगों की मदद कर सकते हैं।

व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया

कार्यक्रम में केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक परिस्थितियों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। स्वयंसेवकों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं में लोगों से संवाद करने, उनकी बात ध्यान से सुनने और उन्हें उचित विधिक सेवा तक पहुंचाने के तरीकों की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान स्वयंसेवकों की जिज्ञासाओं और सवालों पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्र में आने वाली समस्याओं को साझा किया और उनके समाधान के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया।

विधिक सेवा व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास

आयोजकों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य विधिक सेवा व्यवस्था को जमीनी स्तर तक मजबूत करना है। प्रशिक्षित PLVs अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों को कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सहायता के बारे में जागरूक कर सकते हैं।

इससे जरूरतमंद लोगों को समय पर उचित मार्गदर्शन मिलने के साथ-साथ उन्हें विधिक सेवाओं से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।