कहलगांव स्टेशन परिसर में अधिकारियों को दिए गए तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश
कहलगांव/भागलपुर: स्वच्छ भारत अभियान के तहत रेल प्रशासन और स्थानीय नगर प्रशासन अब यात्रियों की सुविधा और स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। इसी कड़ी में, कहलगांव रेलवे स्टेशन परिसर में व्याप्त गंदगी और अव्यवस्था को लेकर अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है। हालिया औचक निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के बाद, उच्चाधिकारियों ने स्टेशन प्रबंधक और संबंधित स्वच्छता प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर स्टेशन की तस्वीर बदली जानी चाहिए।
निरीक्षण में सामने आई बदहाली
बुधवार को जब प्रशासनिक अधिकारियों की टीम कहलगांव स्टेशन परिसर का दौरा करने पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद चिंताजनक था। स्टेशन के मुख्य द्वार, प्रतीक्षालय (Waiting Room), प्लेटफार्म संख्या एक और दो के किनारों पर जगह-जगह कचरे के ढेर जमा थे। यात्रियों ने शिकायत की कि स्टेशन के सार्वजनिक शौचालय की स्थिति बेहद दयनीय है, जिससे दुर्गंध के कारण वहां रुकना भी दूभर हो गया है।
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि डस्टबिन भरे हुए थे और कचरा समय पर उठाया नहीं जा रहा था। यात्रियों को पीने के पानी के नल के पास भी गंदगी फैली मिली। अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए मौके पर ही स्टेशन प्रबंधक को तलब किया और कड़ी फटकार लगाई।
अधिकारियों का कड़ा फरमान: "यात्री सुविधा सर्वोपरि"
बैठक के दौरान अधिकारियों ने कहा कि रेलवे स्टेशन किसी भी शहर का चेहरा होता है। यदि प्रवेश द्वार पर ही गंदगी होगी, तो आने वाले आगंतुकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? अधिकारियों ने साफ शब्दों में निर्देश दिया:
नियमित सफाई: स्टेशन परिसर में दिन में कम से कम तीन बार सफाई सुनिश्चित की जाए।
शौचालय की स्वच्छता: शौचालयों की साफ-सफाई के लिए विशेष टीम तैनात हो और हर दो घंटे पर फिनाइल व अन्य कीटाणुनाशक रसायनों का छिड़काव किया जाए।
कचरा निष्पादन: कचरे के लिए लगाए गए डस्टबिन समय पर खाली किए जाएं और गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग करने की व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए।
पेयजल की सफाई: प्लेटफॉर्म पर लगे वाटर कूलर और नलों के आसपास के क्षेत्र में जल जमाव न होने दिया जाए।
यात्रियों की समस्याएं और उनका दर्द
स्टेशन पर मौजूद कई यात्रियों ने अपना दर्द साझा किया। कोलकाता जाने वाली ट्रेन का इंतजार कर रहे एक यात्री ने बताया, "हम अक्सर देखते हैं कि स्टेशन पर सफाईकर्मी तो दिखते हैं, लेकिन सफाई की गुणवत्ता के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। शौचालय की हालत इतनी खराब है कि महिलाएं वहां जाने से बचती हैं।"
एक अन्य यात्री ने कहा कि स्टेशन के प्लेटफार्म पर खाने-पीने की दुकानों द्वारा फेंका गया कचरा अक्सर पटरी तक पहुंच जाता है, जिससे न केवल गंदगी बढ़ती है, बल्कि स्टेशन की सुंदरता भी धूमिल होती है। यात्रियों की इन शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए अधिकारियों ने दुकानदारों को भी कड़ी चेतावनी दी है कि वे अपना कचरा खुद डस्टबिन में डालें।
सफाई को लेकर नई कार्ययोजना
प्रशासन ने स्टेशन की सफाई के लिए एक नई कार्ययोजना तैयार की है। इसमें स्थानीय निकायों और रेल प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया है।
मॉनिटरिंग टीम: एक विशेष निगरानी टीम का गठन किया जाएगा जो प्रतिदिन सुबह और शाम स्टेशन की सफाई रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपेगी।
दंडात्मक कार्रवाई: यदि भविष्य में निरीक्षण के दौरान फिर से गंदगी पाई गई, तो संबंधित ठेकेदार पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उनके अनुबंध को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
जागरूकता अभियान: स्टेशन परिसर में जगह-जगह 'स्वच्छता ही सेवा' के पोस्टर लगाए जाएंगे और लाउडस्पीकर के माध्यम से यात्रियों से भी स्टेशन को साफ रखने में सहयोग करने की अपील की जाएगी।
प्रशासन की चेतावनी: कोताही बर्दाश्त नहीं
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक बार का निर्देश नहीं है, बल्कि इसे एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य कहलगांव स्टेशन को जिले के सबसे स्वच्छ स्टेशनों की सूची में शामिल करना है। इसमें कोताही बरतने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।"
उन्होंने स्थानीय जन प्रतिनिधियों से भी आग्रह किया है कि वे भी समय-समय पर स्टेशन का दौरा करें और स्वच्छता कार्यों की निगरानी में अपना योगदान दें।
उम्मीद की किरण
प्रशासन के इस त्वरित और सख्त कदम के बाद स्टेशन परिसर में अब हलचल बढ़ गई है। सफाईकर्मियों को पूरी मुस्तैदी के साथ काम पर लगा दिया गया है। यात्रियों में अब यह उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में उन्हें एक साफ-सुथरा और स्वच्छ स्टेशन देखने को मिलेगा।
स्वच्छता केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह जन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। कहलगांव स्टेशन के प्रति दिखाई गई यह गंभीरता निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम लाएगी। अब बस यह देखना बाकी है कि प्रशासन के ये निर्देश धरातल पर कब तक और कितनी प्रभावी ढंग से लागू होते हैं।