डिप्टी सीएसओ चंद्रशेखर कुमार का औचक सेफ्टी ऑडिट, ऑपरेटिंग व सिग्नलिंग सिस्टम की गहन पड़ताल और कर्मचारियों को आपातकालीन सुरक्षा के गुर
मुजफ्फरपुर: भारतीय रेलवे (Indian Railways) केवल पटरियों और ट्रेनों का जाल मात्र नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत संवेदनशील, जटिल और विशालकाय प्रशासनिक तंत्र है जहाँ करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा सीधे तौर पर हर एक कर्मचारी की मुस्तैदी और तकनीकी उपकरणों की कार्यकुशलता पर निर्भर करती है। किसी भी बड़े और व्यस्त जंक्शन पर ट्रेनों का सुगम संचालन, सिग्नलिंग प्रणाली की त्रुटिहीन स्थिति और विषम या आपातकालीन परिस्थितियों (Emergency Situations) से निपटने के लिए मैदानी अमले की तैयारी इस बात का निर्धारण करती है कि व्यवस्था कितनी सुरक्षित है। नियमित कागजी कार्रवाई और औपचारिक निरीक्षणों से इतर जब रेलवे बोर्ड या जोन के वरिष्ठ अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे मैदान में उतरकर औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करते हैं, तो सुरक्षा मानकों में वास्तविक कसावट आती है। बिहार के परिवहन मानचित्र पर सामरिक और व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मुजफ्फरपुर जंक्शन (Muzaffarpur Junction) पर सुरक्षा और संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हाल ही में एक ऐसा ही उच्च स्तरीय और बेहद कड़ा कदम उठाया गया है। रेलवे सुरक्षा आयोग या संरक्षा संगठन के डिप्टी सीएसओ (Deputy CSO - Chief Safety Officer) चंद्रशेखर कुमार ने मुजफ्फरपुर जंक्शन का अचानक और औचक सेफ्टी ऑडिट (Sudden Safety Audit) किया, जिसने स्टेशन परिसर से लेकर केबिन और कंट्रोल रूम तक के महकमे में हलचल मचा दी।
इस औचक निरीक्षण के दौरान डिप्टी सीएसओ चंद्रशेखर कुमार ने किसी भी प्रकार की प्रशासनिक ढिलाई को दरकिनार करते हुए जंक्शन के ऑपरेटिंग विभाग (Operating Department), सिग्नल और दूरसंचार प्रणाली (Signal and Telecommunication) तथा ट्रेनों के सुरक्षित संचालन (Train Operations) की एक-एक बारीकी की सघन और तकनीकी जांच की। उन्होंने न केवल उपकरणों और रजिस्टरों को परखा, बल्कि ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मास्टर, प्वाइंट्समैन, केबिन मैन और अन्य परिचालन कर्मियों से संवाद करते हुए उन्हें गंभीर और अप्रत्याशित आपात स्थितियों से निपटने के लिए व्यावहारिक टिप्स और सुरक्षा निर्देश भी दिए। इस उच्च स्तरीय ऑडिट के बाद से उत्तर बिहार के इस प्रमुख रेल मंडल में सुरक्षा तंत्र को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने की कवायद तेज हो गई है।
औचक निरीक्षण का उद्देश्य और मुजफ्फरपुर जंक्शन की संवेदनशीलता
मुजफ्फरपुर जंक्शन उत्तर बिहार का एक ऐसा प्रमुख जंक्शन है जहाँ से असम, दिल्ली, हाजीपुर, बरौनी और जयनगर की तरफ जाने वाली दर्जनों एक्सप्रेस, पैसेंजर और मालगाड़ियां रोजाना गुजरती हैं। यहाँ का ट्रैफिक लोड अत्यधिक होने के कारण किसी भी प्रकार की छोटी सी तकनीकी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
औचक निरीक्षण की महत्ता: पूर्व सूचना के बिना किए जाने वाले ऑडिट की खूबी यह होती है कि इसमें जमीनी हकीकत का सही आकलन होता है। कर्मचारी अपनी सामान्य कार्यशैली में किस प्रकार सुरक्षा नियमों का पालन कर रहे हैं, इसका वास्तविक जायजा डिप्टी सीएसओ को मिला।
संरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देना: रेलवे का मुख्य लक्ष्य 'शून्य दुर्घटना' (Zero Accident) प्राप्त करना है। इसी उद्देश्य के तहत डिप्टी सीएसओ चंद्रशेखर कुमार ने जंक्शन के चप्पे-चप्पे का मुआयना किया और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि संरक्षा नियमों (Safety Rules) के पालन में कहीं कोई कोताही न बरती जाए।
ऑपरेटिंग विभाग और ट्रेन संचालन की गहन पड़ताल
डिप्टी सीएसओ ने सबसे पहले मुजफ्फरपुर जंक्शन के ऑपरेटिंग विभाग का रुख किया और वहां की कार्यप्रणाली को आंके।
सिग्नल और प्वाइंट्स की जांच: ट्रेन के आवागमन के दौरान प्वाइंट्स और क्रॉसिंग के संचालन की स्थिति का भौतिक सत्यापन किया गया। उन्होंने यह जांचा कि सिग्नल और केबिन के बीच तालमेल कितना सटीक है और क्या नियमों के अनुसार ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई जा रही है।
लॉग बुक्स और दस्तावेजों का मिलान: ऑपरेटिंग रूम में रखे गए मूवमेंट रजिस्टरों, ट्रेन पासिंग रिकॉर्ड और ड्यूटी रोस्टर की गहन पड़ताल की गई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि ट्रेनों के समय-पालन और क्रॉसिंग के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का शत-प्रतिशत पालन हो रहा है या नहीं।
यातायात नियंत्रण पर जोर: व्यस्त समय के दौरान प्लेटफॉर्मों पर ट्रेनों के रिसीव और डिस्पैच (Receive and Dispatch) की प्रक्रिया को बारीकी से देखा गया ताकि प्लेटफॉर्म ऑक्यूपेंसी के दौरान किसी प्रकार की अफरातफरी न मचे।
"रेलवे में सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य शर्त है। मुजफ्फरपुर जंक्शन जैसे व्यस्त केंद्र पर ऑपरेटिंग और सिग्नलिंग विभाग की भूमिका रीढ़ की हड्डी जैसी है। हर एक कर्मचारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सतर्कता से ही हजारों यात्रियों का जीवन सुरक्षित है। आपात स्थिति में घबराने के बजाय त्वरित और सही निर्णय लेना ही एक कुशल रेलकर्मी की पहचान है।" — डिप्टी सीएसओ चंद्रशेखर कुमार, निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों को संबोधित करते हुए
कर्मचारियों के लिए आपातकालीन प्रशिक्षण और 'सेफ्टी टिप्स'
निरीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण चरण वह था जब डिप्टी सीएसओ ने परिचालन से जुड़े मैदानी कर्मचारियों के साथ सीधे संवाद सत्र का आयोजन किया।
आपात स्थितियों के लिए मॉक-ड्रिल जैसा मार्गदर्शन: उन्होंने कर्मचारियों को समझाया कि यदि अचानक से ट्रैक पर कोई बाधा आ जाए, ट्रेन कपलिंग अलग हो जाए, या सिग्नल फेल्योर (Signal Failure) की स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो उन्हें मैनुअल तरीके से कैसे नियंत्रण पाना है।
कम्युनिकेशन गैप न होने की हिदायत: केबिन मैन, ड्राइवर और स्टेशन मास्टर के बीच आपसी संवाद (Communication) को सबसे बड़ा हथियार बताते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी संकट के समय सूचनाओं के आदान-प्रदान में एक सेकंड की भी देरी नहीं होनी चाहिए।
फाॉग सेफ्टी और मानसून प्रिकॉशन: मौसम में बदलाव और आने वाले दिनों की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पटरियों की पेट्रोलिंग और फॉग डिवाइस के इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई।
प्रशासनिक महकमे में कसाव और सुधार के निर्देश
डिप्टी सीएसओ चंद्रशेखर कुमार के इस औचक सेफ्टी ऑडिट से स्थानीय स्तर पर रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों में जवाबदेही की भावना और अधिक मजबूत हुई है।
कमियों को दूर करने का आदेश: निरीक्षण के दौरान जिन छोटे-मोटे तकनीकी बिंदुओं पर सुधार की गुंजाइश पाई गई, उन्हें तत्काल ठीक करने के लिए संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों को निर्देशित किया गया।
कर्मचारियों का बढ़ा मनोबल: इस प्रकार के मार्गदर्शन से कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों का और अधिक गहराई से अहसास हुआ है तथा उन्होंने सुरक्षा मानकों का पूरी ईमानदारी से पालन करने का संकल्प लिया।
मुजफ्फरपुर जंक्शन पर डिप्टी सीएसओ चंद्रशेखर कुमार द्वारा किया गया अचानक सेफ्टी ऑडिट इस बात का जीवंत उदाहरण है कि रेलवे प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कितना सतर्क और गंभीर है। ऑपरेटिंग विभाग, सिग्नल और ट्रेन संचालन की इस कठोर जांच तथा कर्मचारियों को दिए गए आपातकालीन सुरक्षा के गुर ने मुजफ्फरपुर जंक्शन के संरक्षा तंत्र को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है। यह पहल न केवल भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को टालने में मददगार साबित होगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि मुजफ्फरपुर से गुजरने वाला प्रत्येक रेल यात्री पूरी तरह सुरक्षित और आश्वस्त महसूस करे।