कांवरियों की संख्या में लगातार हो रही है भारी वृद्धि, कांवरिया पथ के दुकानदारों ने कर रखी है रौशनी और ठहरने की खास व्यवस्था
सुल्तानगंज/देवघर (संवाद सूत्र): पावन श्रावण मास (सावन) के इस पवित्र अवसर पर बिहार के सुल्तानगंज से लेकर झारखंड के देवघर तक जाने वाला कांवरिया पथ इन दिनों पूरी तरह केसरिया रंग में रंग चुका है। बाबा बैद्यनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से आने वाले शिवभक्तों की संख्या में प्रतिदिन अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की जा रही है। उत्तरवाहिनी गंगा तट से जल उठाकर देवघर की ओर बढ़ने वाले कांवरियों के कदमों की रफ्तार और उत्साह देखते ही बनता है। इस बार मेले में उमड़ रही अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए कांवरिया पथ पर व्यवसाय करने वाले स्थानीय दुकानदारों और व्यवसायियों ने भी अपनी कमर कस ली है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दुकानदारों ने अपनी दुकानों और विश्राम स्थलों पर उत्कृष्ट प्रकाश (लाइटिंग) और ठहरने के खास इंतजाम किए हैं, जिससे कांवरियों की इस कठिन यात्रा में काफी सहूलियत मिल रही है।
कांवरिया पथ पर उमड़ रहा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
श्रावणी मेला के अपने शुरुआती हफ्तों से ही कांवरियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। स्थिति यह है कि सुल्तानगंज के कच्ची और पक्की कांवरिया सड़कों पर हर तरफ केवल 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' की गूंज सुनाई दे रही है:
हर दिन बढ़ रही संख्या: बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और अन्य देशों से भी भारी संख्या में शिवभक्त कहलगांव, सुल्तानगंज और देवघर पहुंच रहे हैं। सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम में गंगा स्नान के बाद जल भरकर आगे बढ़ने वाले कांवरियों का तांता सुबह से लेकर देर रात तक लगा रहता है।
भक्तिमय हुआ पूरा मार्ग: कांवरियों की इस भारी भीड़ के कारण पूरा 105 किलोमीटर लंबा कांवरिया पथ जीवंत हो उठा है। बच्चे, बुजुर्ग, युवा और महिलाएं—सभी में बाबा के प्रति अटूट आस्था और उत्साह साफ देखा जा सकता है।
दुकानदारों ने की सराहनीय पहल: रौशनी और व्यवस्था से जगमगा उठा पथ
भीषण भीड़ और रात के समय कांवरियों को चलने में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए कांवरिया पथ के दोनों किनारों पर स्थित दुकानदारों, होटल संचालकों और स्थानीय व्यवसायियों ने मिलकर एक अनुकरणीय पहल की है:
दुकानों पर दूधिया रोशनी (Bright Lighting): रास्ते में पड़ने वाली छोटी-बड़ी दुकानों, भोजनालयों और चाय की टिपिरियों के संचालकों ने अपनी-अपनी दुकानों पर हाई-वोल्टेज एलईडी लाइट्स, झालर और हैलोजन लैंप लगा रखे हैं। इससे रात के समय भी कांवरिया पथ दूधिया रोशनी से जगमगाता रहता है।
अंधेरे रास्तों से राहत: कांवरिया पथ के कई ऐसे हिस्से हैं जहां वन विभाग या ग्रामीण इलाकों के कारण रात में अंधेरा रहता था, लेकिन स्थानीय दुकानदारों द्वारा अपनी निजी लागत से की गई इस प्रकाश व्यवस्था के कारण कांवरियों को रात की पदयात्रा में बहुत बड़ी राहत मिल रही है। वे बिना किसी ठोकर या परेशानी के सुरक्षित आगे बढ़ पा रहे हैं।
ठहरने और विश्राम के लिए विशेष इंतजाम
रात के वक्त या थकान होने पर कांवरियों को विश्राम करने में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए भी दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं:
दुकानों के आगे शेड और पंडाल: दुकानदारों ने अपनी दुकानों के सामने खाली जगहों पर तिरपाल और टेंट लगाकर अस्थायी विश्राम स्थल (शेड) बनाए हैं। इन पंडालों में गद्दे, चटाई और बैठने की उचित व्यवस्था की गई है, जहां थक-हारकर चलने वाले कांवरिया थोड़ी देर बैठकर आराम कर सकते हैं।
निःशुल्क पेयजल और प्राथमिक उपचार: कई दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों के आगे कांवरियों के लिए ठंडे पेयजल, ग्लूकोज और ओआरएस के घोल की व्यवस्था कर रखी है। इसके अलावा पैरों के छालों और दर्द के लिए सामान्य मलहम-पट्टी की भी मदद वे अपने स्तर पर कर रहे हैं, जो उनकी आत्मीयता को दर्शाता है।
व्यापारियों का अनुभव: सेवा ही सबसे बड़ा धर्म
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि उनके लिए यह केवल व्यापार का समय नहीं है, बल्कि देवतुल्य कांवरियों की सेवा करने का सबसे बड़ा अवसर है:
दुकानदारों की जुबानी: मार्ग के एक प्रमुख होटल संचालक ने बताया, "बाबा के भक्त हमारे मेहमान हैं। उनकी सेवा करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। हमने अपनी दुकान पर विशेष रूप से लाइटिंग और बैठने की व्यवस्था इसलिए की है ताकि रात के समय माताएं और बहनें आराम से गुजर सकें और उन्हें कोई परेशानी न हो।"
बिक्री के साथ-साथ आत्मीय सहयोग: व्यवसायियों का यह भी मानना है कि इस बार कांवरियों की संख्या पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ रही है, जिससे उनके व्यापार में भी अच्छी बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन उससे कहीं अधिक संतोष उन्हें कांवरियों की मदद करके मिल रहा है।
प्रशासनिक सहयोग और सुरक्षा व्यवस्था
भीड़ में लगातार हो रही वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय जिला प्रशासन (बांका, भागलपुर और देवघर) भी पूरी तरह सतर्क है:
पुलिस बल की तैनाती: कांवरिया पथ के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल, मजिस्ट्रेट और स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की भगदड़ या अप्रिय घटना से बचा जा सके।
सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी: सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए आधुनिक तकनीक जैसे सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जगह-जगह मेडिकल कैंप भी संचालित किए जा रहे हैं।
सुल्तानगंज से देवघर तक के कांवरिया पथ पर कांवरियों की संख्या में हो रही लगातार वृद्धि और दूसरी ओर स्थानीय दुकानदारों द्वारा की गई प्रकाश व विश्राम की शानदार व्यवस्था यह साबित करती है कि भारतीय संस्कृति में अतिथि सत्कार और सेवा का भाव कितना गहरा है। एक तरफ जहां शिवभक्त अपनी कठिन तपस्या और अटूट श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दुकानदारों का यह सहयोग इस यात्रा को और अधिक सुगम और सुरक्षित बना रहा है। यह महाकुंभ जैसी भव्यता संपूर्ण भारत की एकता, प्रेम और भक्ति का एक जीवंत प्रतीक बन चुका है, जहां हर कोई अपनी भूमिका पूरी निष्ठा के साथ निभा रहा है।