नाथनगर में मां संतोषी और मां काली की खंडित प्रतिमाओं का गंगा में विसर्जन, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शुरू हुआ नए मंदिर निर्माण का कार्य

नाथनगर, भागलपुर। नाथनगर स्थित प्राचीन बाबा मनसकामनानाथ मंदिर परिसर में धार्मिक आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में स्थापित मां संतोषी और मां काली की खंडित प्रतिमाओं का विधि-विधानपूर्वक गंगा नदी में विसर्जन किया गया। इसके साथ ही नई प्रतिमाओं की स्थापना और मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य तीन दिनों तक चलने वाले वैदिक अनुष्ठानों, हवन-पूजन और मंत्रोच्चार के बीच प्रारंभ हो गया है। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और मंदिर समिति के सदस्यों ने भाग लिया।

मंदिर परिसर में वर्षों से स्थापित मां संतोषी और मां काली की प्रतिमाएं समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गई थीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खंडित प्रतिमाओं की पूजा नहीं की जाती है, इसलिए मंदिर समिति और स्थानीय श्रद्धालुओं की सहमति से नई प्रतिमाओं की स्थापना का निर्णय लिया गया। इसके लिए पहले खंडित प्रतिमाओं का शास्त्रोक्त विधि से विसर्जन कराया गया।

श्रद्धा और भक्ति के साथ निकली शोभायात्रा

प्रतिमाओं के विसर्जन से पूर्व मंदिर परिसर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए शामिल हुए। महिलाओं ने मंगलगीत गाए जबकि युवाओं ने जय माता दी और हर-हर महादेव के उद्घोष से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। शोभायात्रा मंदिर परिसर से निकलकर विभिन्न मार्गों से होते हुए गंगा घाट पहुंची, जहां वैदिक पंडितों की उपस्थिति में धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

गंगा घाट पर आयोजित विशेष पूजा में पुरोहितों ने मंत्रोच्चार के साथ देवी प्रतिमाओं की अंतिम आरती कराई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां संतोषी और मां काली की खंडित प्रतिमाओं को गंगा की पवित्र धारा को समर्पित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने मां के जयकारे लगाए और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ

प्रतिमा विसर्जन के साथ ही मंदिर परिसर में नई प्रतिमाओं की स्थापना और निर्माण कार्य को लेकर तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गया है। पहले दिन वैदिक आचार्यों द्वारा गणेश पूजन, कलश स्थापना और भूमि पूजन कराया गया। इसके बाद विशेष हवन और यज्ञ का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर परिवार और समाज की खुशहाली की प्रार्थना की।

मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि अगले तीन दिनों तक लगातार वैदिक मंत्रोच्चार, दुर्गा सप्तशती पाठ, रुद्राभिषेक, हवन-पूजन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन अनुष्ठानों के पूर्ण होने के बाद नई प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।

मंदिर समिति ने जताया उत्साह

मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि बाबा मनसकामनानाथ मंदिर नाथनगर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मां संतोषी और मां काली की नई प्रतिमाओं की स्थापना से मंदिर परिसर की भव्यता और धार्मिक महत्व में और वृद्धि होगी।

समिति के अनुसार स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर के सौंदर्यीकरण का कार्य भी किया जा रहा है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं ताकि आने वाले समय में यहां धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके।

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

इस आयोजन को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ जुटने लगी थी। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। कई श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया कि उन्हें इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनने का अवसर मिला।

श्रद्धालुओं का कहना था कि मां संतोषी और मां काली की नई प्रतिमाओं की स्थापना से मंदिर में एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा। लोगों ने विश्वास जताया कि मां का आशीर्वाद क्षेत्रवासियों पर बना रहेगा और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

धार्मिक मान्यताओं का किया गया पालन

धार्मिक विद्वानों के अनुसार जब किसी देवी-देवता की प्रतिमा खंडित हो जाती है तो शास्त्रों में उसका विधिवत विसर्जन करने का विधान बताया गया है। उसी परंपरा का पालन करते हुए मंदिर समिति ने पूरे धार्मिक नियमों के अनुसार प्रतिमाओं का विसर्जन कराया। इसके बाद नई प्रतिमाओं की स्थापना के लिए शुद्धिकरण और वैदिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।

क्षेत्र में बना उत्सव जैसा माहौल

तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन के कारण पूरे नाथनगर क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों की सजावट और धार्मिक ध्वजों से पूरा परिसर भक्तिमय दिखाई दे रहा है। शाम के समय भजन-कीर्तन और आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।

प्राण प्रतिष्ठा के साथ होगा समापन

मंदिर समिति ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों का समापन नई प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के साथ होगा। इस अवसर पर विशेष पूजा, महाआरती और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। दूर-दराज के श्रद्धालुओं को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है।

धार्मिक आस्था, परंपरा और सामाजिक सहभागिता का यह आयोजन न केवल मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को आगे बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि नई प्रतिमाओं की स्थापना के बाद बाबा मनसकामनानाथ मंदिर परिसर और अधिक भव्य तथा आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण होकर क्षेत्रवासियों की आस्था का केंद्र बना रहेगा।