बिहार में सड़क हादसों के घायलों को मिलेगा ‘गोल्डन आवर’ में बेहतर इलाज, राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं होंगी मजबूत
पटना: बिहार सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने और घायलों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर होने वाले गंभीर सड़क हादसों में घायल लोगों को ‘गोल्डन आवर’ के भीतर प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने की व्यापक योजना तैयार की है। इस पहल का उद्देश्य दुर्घटना के बाद पहले एक घंटे के भीतर त्वरित चिकित्सा सहायता देकर अधिक से अधिक लोगों की जान बचाना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा यानी ‘गोल्डन आवर’ सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि इस दौरान घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।
क्या है ‘गोल्डन आवर’?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद का पहला 60 मिनट ‘गोल्डन आवर’ कहलाता है। इस दौरान घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाना, प्राथमिक उपचार देना और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
यदि इस अवधि में इलाज शुरू हो जाए तो अत्यधिक रक्तस्राव, सिर की चोट और अन्य गंभीर स्थितियों में मृत्यु की आशंका काफी कम हो सकती है। इसलिए दुनिया भर में सड़क सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा प्रणाली में ‘गोल्डन आवर’ की अवधारणा को विशेष महत्व दिया जाता है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ेंगी चिकित्सा सुविधाएं
राज्य सरकार की योजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।
इसके अंतर्गत—
- दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान की जाएगी।
- नजदीकी अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटरों को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ा जाएगा।
- एंबुलेंस सेवाओं की उपलब्धता और प्रतिक्रिया समय में सुधार किया जाएगा।
- गंभीर घायलों को शीघ्र रेफर करने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
- आधुनिक जीवनरक्षक उपकरणों से युक्त आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
सड़क हादसों में मौतों को कम करने पर जोर
बिहार में हर वर्ष बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें कई लोगों की मृत्यु समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण हो जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दुर्घटना के तुरंत बाद घायलों को बेहतर चिकित्सा सहायता मिले, तो अनेक मौतों को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से सरकार स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दे रही है।
ट्रॉमा केयर नेटवर्क होगा मजबूत
योजना के तहत प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास स्थित सरकारी अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटरों की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
आवश्यकतानुसार—
- चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
- प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती बढ़ाई जाएगी।
- आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
- आपातकालीन वार्डों को और अधिक सक्षम बनाया जाएगा।
इससे दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल विशेषज्ञ उपचार मिलने में सुविधा होगी।
एंबुलेंस सेवा में होगा सुधार
दुर्घटना के बाद समय पर एंबुलेंस पहुंचना जीवन बचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सरकार की योजना के तहत—
- एंबुलेंस की संख्या बढ़ाने,
- उनकी रणनीतिक तैनाती,
- जीपीएस आधारित निगरानी,
- त्वरित रिस्पांस सिस्टम,
- और आपातकालीन कॉल प्रबंधन को और प्रभावी बनाने पर कार्य किया जाएगा।
इससे दुर्घटना स्थल से अस्पताल तक पहुंचने का समय कम किया जा सकेगा।
आम लोगों की भूमिका भी अहम
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क दुर्घटना के बाद सबसे पहले मौके पर मौजूद लोग ही घायलों की सहायता कर सकते हैं।
सरकार द्वारा समय-समय पर गुड सेमेरिटन (Good Samaritan) संबंधी जागरूकता अभियान भी चलाए जा सकते हैं, ताकि लोग बिना किसी कानूनी डर के घायलों की मदद करने के लिए आगे आएं।
इस प्रकार की जनभागीदारी ‘गोल्डन आवर’ के दौरान जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सड़क सुरक्षा पर भी रहेगा फोकस
सरकार केवल दुर्घटना के बाद इलाज पर ही नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
इसके लिए—
- ब्लैक स्पॉट की पहचान,
- सड़क सुरक्षा संकेतकों में सुधार,
- बेहतर प्रकाश व्यवस्था,
- यातायात नियमों के पालन,
- और जागरूकता अभियानों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
इन उपायों से दुर्घटनाओं की संख्या कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का मजबूत नेटवर्क किसी भी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
यदि अस्पताल, एंबुलेंस, पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियां आपस में बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें, तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
लोगों को मिलेगा बड़ा लाभ
इस पहल से राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरने वाले लाखों यात्रियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से—
- गंभीर घायलों की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।
- स्थायी विकलांगता के मामलों में कमी आ सकती है।
- परिवारों पर आर्थिक और मानसिक बोझ कम होगा।
- स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का विश्वास मजबूत होगा।
सरकार की प्राथमिकता
राज्य सरकार का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को कम करना और प्रत्येक घायल तक समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सहायता पहुंचाना है।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं के दौरान ‘गोल्डन आवर’ में बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की बिहार सरकार की पहल सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यदि इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने, घायलों को समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराने और राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है। इससे न केवल हजारों लोगों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि बिहार की स्वास्थ्य एवं सड़क सुरक्षा व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।