पीएमसीएच के पूर्व प्राचार्य डॉ. एनपी सिंह के आरोप खारिज, हाईलेवल कमिटी करेगी पूरे मामले की जांच

पटना। बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) के पूर्व प्राचार्य डॉ. एनपी सिंह को पद से हटाए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। बिहार स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. सिंह द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनके आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। विभाग ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक हाईलेवल कमिटी गठित करने का फैसला लिया है, जो पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम कर रही है। इसलिए किसी भी प्रकार के विवाद या आरोप-प्रत्यारोप को तथ्यों के आधार पर परखा जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

प्राचार्य पद से हटाए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद

हाल ही में पीएमसीएच के प्राचार्य पद से हटाए गए डॉ. एनपी सिंह ने मीडिया के माध्यम से कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें कुछ प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों से पद से हटाया गया। साथ ही उन्होंने कुछ अधिकारियों और विभागीय निर्णयों पर भी सवाल उठाए थे।

डॉ. सिंह के इन बयानों के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया। विपक्षी दलों ने भी सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग की, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि सभी प्रशासनिक फैसले नियमानुसार लिए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने आरोपों को बताया निराधार

स्वास्थ्य विभाग ने जारी बयान में कहा कि डॉ. एनपी सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों का विभाग के पास कोई तथ्यात्मक आधार नहीं मिला है। विभाग का कहना है कि प्राचार्य पद से संबंधित निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया और सेवा नियमों के अनुरूप लिया गया था।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति विशेष या बाहरी दबाव में कोई निर्णय नहीं लिया गया। सभी निर्णय संबंधित अधिकारियों की अनुशंसा और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किए गए।

निशांत कुमार के कार्यक्रम को लेकर भी दी सफाई

मामले में एक और महत्वपूर्ण बिंदु सामने आया, जिसमें डॉ. एनपी सिंह ने दावा किया था कि उन्हें एक कार्यक्रम में शामिल नहीं होने या दूरी बनाए रखने के कारण निशाना बनाया गया। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि निशांत कुमार के कार्यक्रम से दूरी बनाए रखने या उसमें शामिल न होने का प्राचार्य को हटाने के फैसले से कोई संबंध नहीं है।

विभाग ने कहा कि इस तरह के आरोप पूरी तरह भ्रामक हैं और वास्तविक तथ्यों से उनका कोई लेना-देना नहीं है। विभाग के अनुसार प्रशासनिक निर्णयों को राजनीतिक या व्यक्तिगत रंग देना उचित नहीं है।

हाईलेवल कमिटी करेगी निष्पक्ष जांच

स्वास्थ्य विभाग ने विवाद को समाप्त करने और सभी तथ्यों को सार्वजनिक करने के उद्देश्य से हाईलेवल कमिटी के गठन की घोषणा की है। इस समिति में वरिष्ठ प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल किए जाएंगे।

कमिटी निम्नलिखित बिंदुओं की जांच करेगी—

  • डॉ. एनपी सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता।
  • प्राचार्य पद से हटाए जाने की प्रशासनिक प्रक्रिया।
  • विभागीय नियमों का पालन हुआ या नहीं।
  • संबंधित अधिकारियों की भूमिका।
  • यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना।

जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पारदर्शिता बनाए रखने का दावा

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सरकार का उद्देश्य किसी भी विवाद को दबाना नहीं, बल्कि उसकी निष्पक्ष जांच कराना है। इसलिए हाईलेवल कमिटी को स्वतंत्र रूप से सभी दस्तावेजों, आदेशों और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज करने का अधिकार दिया जाएगा।

विभाग ने भरोसा दिलाया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पीएमसीएच जैसे संस्थान की छवि बनाए रखना जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि पीएमसीएच बिहार का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा संस्थान है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे संस्थान से जुड़े प्रशासनिक विवादों का असर अस्पताल की कार्यप्रणाली और जनता के विश्वास पर पड़ सकता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि संस्थान में प्रशासनिक स्थिरता और पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि किसी अधिकारी को शिकायत है तो उसका समाधान विभागीय प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।

विपक्ष ने भी उठाए सवाल

मामले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार से पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि इसी उद्देश्य से हाईलेवल कमिटी गठित की गई है ताकि किसी भी तरह का भ्रम समाप्त हो सके।

कर्मचारियों और चिकित्सकों की नजर जांच पर

पीएमसीएच के चिकित्सकों, कर्मचारियों और मेडिकल छात्रों की निगाहें भी इस जांच पर टिकी हुई हैं। उनका मानना है कि जांच रिपोर्ट से पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और भविष्य में इस तरह के विवादों से बचने के लिए आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे।

रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार के निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। हाईलेवल कमिटी सभी पक्षों को सुनने, दस्तावेजों की समीक्षा करने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

रिपोर्ट के आधार पर यदि डॉ. एनपी सिंह के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो विभाग इस संबंध में आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करेगा।

फिलहाल पूरे मामले पर बिहार स्वास्थ्य विभाग की नजर बनी हुई है। सरकार का कहना है कि पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्रशासनिक जवाबदेही के सिद्धांतों के तहत जांच कराई जाएगी, ताकि विवाद का तथ्यात्मक और स्थायी समाधान निकल सके।