अलीगंज में छट्ठू ठाकुर की पुण्यतिथि पर आयोजित हुई ‘भावांजलि काव्य गोष्ठी’; एक से बढ़कर एक कविताओं से गूंजा सभागार
भागलपुर: साहित्य, संस्कृति और वैचारिक मंथन की पावन भूमि भागलपुर में साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने वाली संस्था ‘अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद’ की भागलपुर इकाई द्वारा शहर के अलीगंज स्थित आनंदमार्ग कॉलोनी में एक भव्य और स्मरणीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन स्व. छट्ठू ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर ‘भावांजलि काव्य गोष्ठी’ के रूप में संपन्न हुआ, जिसमें भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों से आए कई नामचीन साहित्यकार, कवि और कला प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्व. छट्ठू ठाकुर को उनके तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि देना और कविताओं के माध्यम से उन्हें याद करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ और अध्यक्षता
इस गरिमामयी साहित्यिक गोष्ठी की अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद भागलपुर के अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद निशाकर ने की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और मां शारदे की वंदना के साथ हुई। इस अवसर पर परिषद के सदस्यों ने स्व. छट्ठू ठाकुर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके समाज और साहित्य के प्रति योगदान को याद किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के जाने-माने हास्य-व्यंग्य कवि कुमार भागलपुरी उपस्थित रहे। उन्होंने अपनी खास शैली में हास्य और व्यंग्य से भरपूर पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं को लोटपोट कर दिया। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध प्रस्तुति— "पीकर भांग तरंग में सुनाया, 'दांत नय छय एक्को गो मुंह मऽ, सॉलिड छय परभू आंत जनरा के सत्तू द दहो मुठे-मुठल्ला हाफ"—सुनाकर महफिल में जान डाल दी। उनकी इस अनोखी प्रस्तुति पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
विशिष्ट अतिथियों और कवियों की प्रस्तुतियां
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पारस कुंज ने अपनी भावपूर्ण रचना के माध्यम से स्व. छट्ठू ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपनी कविता की पंक्तियां साझा करते हुए पढ़ा:
"कोई आता है ख्यालों में गुजर जाता है, सिर्फ अहसास है जो दिल में उतर जाता है,
ये भी क्या कम है जुदाई में ऐ 'पारस' उनकी, गौह-ए-अश्क से दामन मेरा भर जाता है।"
इसके बाद काव्य पाठ के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए ठाकुर निराला ने माँ के ऊपर एक अत्यंत भावुक रचना प्रस्तुत की, जिसे सुनकर श्रोता भावुक हो गए:
"अपने दुख को कभी न कहती, मां तो बस ऐसी ही होती है..."
परिषद के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार महेंद्र प्रसाद निशाकर ने अपनी रचना के माध्यम से ईश्वर और सृजन के महत्व को रेखांकित किया:
"इस धरा धाम पर लाने वाला, बड़ी जतन से जिसने पाला,
जिसकी इच्छा के कारण ही, आज साकार है अस्तित्व हमारा।"
संचालन और अन्य रचनाकारों की सहभागिता
कार्यक्रम का बहुत ही सुंदर और सधा हुआ संचालन अभय कुमार भारती ने किया। संचालन के दौरान उन्होंने बच्चों के प्रति माता-पिता के त्याग, संघर्ष और समर्पण की गहरी चर्चा की, जिसने सभी का दिल जीत लिया।
समारोह के प्रारंभ में कपिल देव कृपाला ने सरस्वती वंदना और स्वागत गान प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके पश्चात शहर और आसपास से पधारे अन्य प्रतिष्ठित रचनाकारों ने भी अपनी एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं:
सेवानिवृत्त रेलकर्मी सुनील कुमार पटेल ने अपनी प्रेरणादायी रचना से श्रोताओं को बांधे रखा।
भोजपुरी के चर्चित कवि गणेश ठाकुर अकेला ने अपनी माटी से जुड़ी रचना प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी।
इसके अलावा सच्चिदानंद किरण, जयंत जलद, अजीत कुमार और रामजी वृंदावनी ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से समां बांधा और स्व. छट्ठू ठाकुर को अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।
धन्यवाद ज्ञापन और समापन
कार्यक्रम के अंत में नीतीश कुमार मिश्रा ने उपस्थित सभी साहित्य प्रेमियों, कवियों, अतिथियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद इसी प्रकार भविष्य में भी शहर में साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर बढ़ावा देती रहेगी, ताकि नई पीढ़ी हमारी समृद्ध साहित्यिक परंपरा से जुड़ सके।
आनंदमार्ग कॉलोनी, अलीगंज में आयोजित यह ‘भावांजलि काव्य गोष्ठी’ न केवल स्व. छट्ठू ठाकुर की स्मृति को समर्पित एक प्रभावी आयोजन रही, बल्कि भागलपुर के साहित्यिक इतिहास में एक और सुंदर अध्याय जोड़ गई। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने एक-दूसरे से मिलकर साहित्य के प्रचार-प्रसार पर चर्चा की और इस सफल आयोजन के लिए परिषद की पूरी टीम को बधाई दी।