विश्व स्तनपान सप्ताह पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन: स्वास्थ्यकर्मियों ने नवजात माताओं को स्तनपान के अनमोल फायदों और पोषण के प्रति किया जागरूक, फोटो जेएमपी:3 के साथ गूंजा जन-जागरूकता का संदेश

जमालपुर (मुंगेर): मां और बच्चे के अटूट रिश्ते और नवजात शिशु के स्वस्थ भविष्य की नींव को मजबूत करने के उद्देश्य से हर साल अगस्त महीने के पहले सप्ताह में 'विश्व स्तनपान सप्ताह' (World Breastfeeding Week) मनाया जाता है। इसी कड़ी में मुंगेर जिले के जमालपुर (जेएमपी) स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में विश्व स्तनपान दिवस के अवसर पर एक विशेष और व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान अस्पताल में उपस्थित नवजात शिशुओं की माताओं, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा स्तनपान के महत्व, इसके वैज्ञानिक फायदों और बच्चों के शुरुआती जीवन में मां के दूध की अनिवार्यता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

इस जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में फैली उन भ्रांतियों को दूर करना था, जो कई बार नवजात शिशुओं को उनके पहले और सबसे महत्वपूर्ण आहार यानी 'मां के पहले गाढ़े पीले दूध' (कोलोस्ट्रम) से वंचित कर देती हैं। आइए जानते हैं जमालपुर पीएचसी में आयोजित इस कार्यक्रम, स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा दिए गए संदेश और स्तनपान के महत्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं का पूरा एवं विस्तृत विवरण।

 कार्यक्रम की शुरुआत और मुख्य उद्देश्य: क्यों मनाया जाता है विश्व स्तनपान सप्ताह?

कार्यक्रम की शुरुआत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सभागार में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, डॉक्टरों और एएनएम (ANM) की उपस्थिति में दीप प्रज्जवलित कर या विधिवत संबोधन के साथ की गई।

शिशु मृत्यु दर में कमी लाना: इस अवसर पर उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि दुनिया भर में हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं की जीवन रक्षा दर को बढ़ाना और कुपोषण जैसी गंभीर समस्याओं से मुकाबला करना है।

मां का दूध - बच्चे का पहला टीका: डॉक्टरों ने माताओं को समझाया कि मां का दूध बच्चे के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह नवजात शिशु के लिए 'पहले टीके' (First Vaccine) की तरह काम करता है, जो उसे विभिन्न प्रकार के संक्रमणों और बीमारियों से लड़ने की प्राकृतिक शक्ति प्रदान करता है।

 स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा दी गई महत्वपूर्ण जानकारियां और परामर्श

कार्यक्रम के दौरान पीएचसी में मौजूद एएनएम, चिकित्सकों और काउंसलर ने माताओं को स्तनपान से जुड़ी कई वैज्ञानिक और व्यावहारिक बातें समझाईं, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।

जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान की अनिवार्यता: स्वास्थ्यकर्मियों ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि बच्चे के जन्म लेने के बाद से लेकर पहले एक घंटे के भीतर ही उसे मां का दूध पिलाना शुरू कर देना चाहिए। यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है।

कोलोस्ट्रम (पहला गाढ़ा दूध) का महत्व: ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई जगहों पर यह गलत धारणा है कि प्रसव के बाद आने वाले पहले गाढ़े पीले दूध को बेकार समझकर फेंक दिया जाता है। स्वास्थ्यकर्मियों ने इस भ्रांति को पुरजोर तरीके से खारिज करते हुए बताया कि यही 'कोलोस्ट्रम' बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत करने का सबसे बड़ा स्रोत है। इसे कभी भी बाहर नहीं फेंकना चाहिए।

शिशु को केवल मां का दूध (Exclusive Breastfeeding): डॉक्टरों ने सलाह दी कि बच्चे के जीवन के पहले छह महीनों तक उसे केवल और केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए। इस दौरान पानी, शहद, घुट्टी या ऊपरी दूध देने की कोई आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां के दूध में बच्चे की जरूरत का सारा पानी और पोषण मौजूद होता है।

 माताओं और परिजनों की सक्रिय भागीदारी

इस जागरूकता शिविर में जमालपुर पीएचसी क्षेत्र की दर्जनों महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और उनके पतियों ने भी हिस्सा लिया।

सवालों के जवाब और शंकाओं का समाधान: कार्यक्रम के अंत में एक खुला सत्र रखा गया, जिसमें महिलाओं ने स्तनपान से जुड़ी अपनी कई व्यक्तिगत शंकाएं और सवाल स्वास्थ्यकर्मियों के सामने रखे। डॉक्टरों और एएनएम ने बेहद सरल भाषा में उनके सभी सवालों के तसल्लीबक्स जवाब दिए और उन्हें सही तकनीक से स्तनपान कराने के तरीके सिखाए।

पोषण और आहार पर विशेष ध्यान: स्वास्थ्यकर्मियों ने स्तनपान कराने वाली माताओं को अपने खुद के खान-पान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्हें हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, फल और पौष्टिक आहार खाने की सलाह दी गई ताकि उनके शरीर में दूध का पर्याप्त निर्माण हो सके और वे तथा उनका बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

समाज में जागरूकता का संदेश और फोटो जेएमपी:3 की गूंज

इस प्रकार के कार्यक्रमों से न केवल अस्पताल आने वाले लोगों में बल्कि पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य के प्रति एक सकारात्मक संदेश जाता है।

'फोटो जेएमपी:3' के माध्यम से मिला व्यापक प्रसार: स्थानीय मीडिया और प्रेस रिपोर्टिंग में इस कार्यक्रम को 'फोटो जेएमपी:3' के विशेष संदर्भ के साथ प्रकाशित किया गया, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा माताओं को जानकारी देते हुए दृश्यों को प्रमुखता से दिखाया गया। इस तस्वीर ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और संदेश दिया कि स्वास्थ्य प्रशासन स्तनपान के प्रति कितना गंभीर है।

सामूहिक संकल्प: कार्यक्रम के अंत में सभी स्वास्थ्य कर्मियों और उपस्थित माताओं ने यह संकल्प लिया कि वे अपने परिवार और समाज में स्तनपान के प्रति फैली सभी गलतफहमियों को दूर करेंगे और हर नवजात को उसका अधिकार दिलाएंगे

जमालपुर पीएचसी में आयोजित विश्व स्तनपान दिवस का यह जागरूकता कार्यक्रम समाज को एक स्वस्थ और मजबूत दिशा देने वाला एक सराहनीय कदम रहा। स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा माताओं को दी गई सटीक जानकारी और पोषण संबंधी परामर्श निश्चित रूप से शिशु मृत्यु दर को घटाने और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य में मददगार साबित होंगे। 'फोटो जेएमपी:3' के साथ सामने आई यह पहल यह साबित करती है कि जब जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य विभाग सक्रिय होता है, तो समाज में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। स्तनपान केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण की पहली सीढ़ी है।