सावन की पहली सोमवारी (3 अगस्त) पर नमामि गंगे घाट पर उमड़ा आस्था का महासैलाब; शिवमय हुई सिल्क सिटी, लाखों श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान और जलार्पण
भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: देवभूमि और अंग क्षेत्र के प्रमुख केंद्र भागलपुर में सावन मास की पहली सोमवारी (3 अगस्त) के अवसर पर आस्था, श्रद्धा और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। पवित्र सावन महीने के पहले सोमवार को लेकर सुबह से ही शहर के प्रमुख गंगा घाटों और शिवालयों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। विशेष रूप से नमामि गंगे घाट पर शाम ढलते-ढलते जो भव्य और अलौकिक दृश्य उभरा, उसने पूरे वातावरण को पूरी तरह से शिवमय बना दिया। सुदूर इलाकों से पहुंचे लाखों शिवभक्तों, कांवरियों और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ से नमामि गंगे घाट पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के गगनभेदी जयकारों से पूरी फिजा गूंज उठी।
सुकर्मा योग में पड़ी पहली सोमवारी, अहले सुबह से शुरू हुआ अनुष्ठान
पंचांग के अनुसार इस वर्ष सावन की पहली सोमवारी बेहद खास और शुभ संयोग यानी सुकर्मा योग में मनाई गई।
ब्रह्म मुहूर्त से गूंजे जयकारे: सोमवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही भागलपुर के विभिन्न गंगा घाटों पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। नमामि गंगे घाट पर विशेष रूप से अहले सुबह से ही कतारबद्ध होकर शिवभक्तों ने पावन उत्तरवाहिनी गंगा में डुबकी लगाई।
संकल्प और जलार्पण: स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने विधिवत संकल्प लेकर कांवर में पवित्र गंगाजल भरा और बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) तथा स्थानीय शिवालयों की ओर अपनी यात्रा शुरू की। सावन की पहली सोमवारी होने के कारण कांवरियों के उत्साह में एक अलग ही ऊर्जा और चमक देखी गई।
नमामि गंगे घाट पर संध्या बेला का भव्य और मनोरम दृश्य
शाम के 3 अगस्त की संध्या को नमामि गंगे घाट का नज़ारा देखने लायक था। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस घाट पर प्रशासन और स्थानीय समितियों द्वारा विशेष प्रबंध किए गए थे:
दीपों की रोशनी और सांस्कृतिक छटा: शाम ढलते ही नमामि गंगे घाट को हजारों दीपों, रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया। घाट की सीढ़ियों पर बैठी महिलाओं और श्रद्धालुओं द्वारा दीपदान किया गया, जिससे गंगा का तट जगमगा उठा।
भव्य महाआरती का आयोजन: सावन की पहली सोमवारी की शाम नमामि गंगे घाट पर विशेष गंगा महाआरती का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद, डमरू की गूंज और घंटी-घड़ियालों के बीच जब आचार्यों ने मां गंगा की आरती उतारी, तो वहां मौजूद लाखों श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर होकर झूम उठे। हर तरफ केवल और केवल भोलेनाथ की आराधना का माहौल था।
सुरक्षा और प्रशासनिक मुस्तैदी: चप्पे-चप्पे पर रही पैनी नजर
लाखों की संख्या में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया:
पुलिस बल और गोताखोरों की तैनाती: भागलपुर के जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देशन में नमामि गंगे घाट से लेकर शहर के तमाम प्रमुख मंदिरों तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। गहरे पानी में बैरिकेडिंग करने के साथ-साथ एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों के साथ कुशल गोताखोरों को तैनात किया गया था।
सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी: नियंत्रण कक्ष के जरिए घाट पर आने-जाने वाले हर एक व्यक्ति और भीड़ की गतिविधियों पर सीसीटीवी कैमरों व ड्रोन के माध्यम से पैनी नजर रखी जा रही थी, ताकि शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में उत्सव संपन्न हो सके।
शहर के अन्य शिवालयों में भी गूंजे हर-हर महादेव के नारे
नमामि गंगे घाट के साथ-साथ भागलपुर के प्राचीन बुढ़ानाथ मंदिर, आदमपुर स्थित शिवशक्ति मंदिर, कुपेश्वरनाथ मंदिर (कोतवाली चौक) और भूतनाथ मंदिर में भी पहली सोमवारी पर भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी रही। कई जगहों पर निःशुल्क गंगाजल वितरण और चिकित्सा शिविरों की भी व्यवस्था की गई थी, जिससे दूर-दराज से आए कांवरियों और व्रतधारियों को काफी सहूलियत मिली।0 `
सावन की पहली सोमवारी (3 अगस्त) को भागलपुर के नमामि गंगे घाट पर जो भव्य और दिव्य नजारा देखने को मिला, उसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति में आस्था और समर्पण की जड़ें कितनी गहरी हैं। संध्या बेला की आरती, लेजर और रोशनी की चमक के बीच गूंजते 'बोल बम' के नारों ने न केवल भागलपुर की धरा को पवित्र किया, बल्कि हर एक श्रद्धालु के मन में अध्यात्म की एक अनबुझ ज्योति प्रज्वलित कर दी। यह दिन भागलपुर के इतिहास में एक यादगार और अत्यंत पावन अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।