मुंगेर में वनों का दायरा और पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियाँ: जिले में 781 वर्ग किलोमीटर फैला है वन क्षेत्र; विभाग का दावा, 2024-26 के बीच लगाए जाएंगे 4 लाख से अधिक पौधे

मुंगेर (बिहार): बिहार के मुंगेर जिले से पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक विस्तृत और महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आ रही है। मुंगेर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियों और जंगलों के लिए पूरे राज्य में जाना जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुंगेर जिले में कुल वन क्षेत्र (Forest Area) 781 वर्ग किलोमीटर के विशाल दायरे में फैला हुआ है, जो जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का एक बड़ा हिस्सा है।

हालाँकि, इस समृद्ध प्राकृतिक धरोहर के बावजूद जमीनी स्तर पर पौधारोपण (Tree Plantation) की गति और रखरखाव को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों और स्थानीय पर्यावरणविदों का मानना है कि जितनी तेजी से वनों का दोहन या प्राकृतिक नुकसान हो रहा है, उस अनुपात में नए पौधे लगाने की रफ्तार और उनकी देखभाल की स्थिति अभी भी अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुँच पाई है।

'हिन्दुस्तान' संवाददाता से प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर, वन विभाग ने आगामी वर्षों के लिए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत वर्ष 2024 से 2026 के बीच जिले में 4 लाख से अधिक नए पौधे लगाने का दावा किया गया है। इसके साथ ही, पिछले वर्षों के दौरान सड़क किनारे चलाए गए अभियानों (जैसे वर्ष 2023-24 में विभिन्न सड़कों पर 2000 पौधे लगाने की पहल) के आँकड़े भी सामने आए हैं। आइए जानते हैं मुंगेर के वन क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, विभाग की आगामी कार्ययोजना, पौधारोपण के आंकड़ों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियों का विस्तृत विश्लेषण।

मुंगेर का भौगोलिक और वन स्वरूप: 781 वर्ग किलोमीटर में फैला हरा-भरा आवरण

मुंगेर जिला भौगोलिक दृष्टि से बेहद विविधतापूर्ण है। यहाँ मैदानी इलाकों के साथ-साथ विंध्य पर्वतमाला के अंतिम छोर की पहाड़ियाँ और घने जंगल मौजूद हैं, जो जिले की आबोहवा को संतुलित रखते हैं।

विशाल वन क्षेत्र: जिले में कुल 781 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले वनों में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ, औषधीय पौधे और वन्य जीव पाए जाते हैं। यह वन क्षेत्र मुंगेर के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) की रीढ़ माना जाता है।

पर्यावरण संतुलन में योगदान: यह 781 वर्ग किमी का दायरा न केवल कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने में मदद करता है, बल्कि जिले के भूजल स्तर (Groundwater Level) को बनाए रखने और मानसून को नियमित करने में भी अहम भूमिका निभाता है।

पौधारोपण की धीमी गति: कागजी दावे बनाम जमीनी हकीकत

वन क्षेत्र के इतने बड़े दायरे के बावजूद, जिले में हर साल जिस पैमाने पर नए पौधे लगाए जाने चाहिए, उसकी गति को लेकर अक्सर आलोचना होती रही है।

अपेक्षित गति का अभाव: पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि वनों के संरक्षण और नए हरित क्षेत्रों के विकास के लिए जितनी तीव्र गति से कार्य होना चाहिए, वह धरातल पर नजर नहीं आता। अवैध कटाई और जंगलों की सुरक्षा में प्रशासनिक सुस्ती के कारण कई पुराने पेड़ नष्ट हो रहे हैं, जिनकी भरपाई धीमी गति से हो रहे पौधारोपण के कारण पूरी नहीं हो पा रही है।

सड़क किनारे पौधारोपण के आंकड़े: विभाग के पिछले सत्र के आंकड़ों पर नजर डालें तो, वर्ष 2023-24 के दौरान जिले की विभिन्न प्रमुख सड़कों के किनारे सौंदर्यीकरण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से लगभग 2000 पौधे लगाए गए थे। हालाँकि, जानकारों का मानना है कि केवल पौधे लगा देना ही काफी नहीं है, बल्कि उनकी ट्री-गार्ड (Tree Guard) से सुरक्षा और नियमित सिंचाई न होने के कारण कई पौधे दम तोड़ देते हैं।

वन विभाग की आगामी योजना: 2024-26 के दौरान 4 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य

बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खतरों से निपटने के लिए वन विभाग ने आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

विशाल लक्ष्य (2024-26): वन विभाग द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 से 2026 के इस दो-तीन साल के अंतराल में मुंगेर जिले के विभिन्न प्रमंडलों और ग्रामीण क्षेत्रों में कुल मिलाकर 4 लाख से अधिक पौधे रोपने की योजना है।

किस प्रकार के पौधे लगाए जाएंगे?: इस अभियान के तहत छायादार पेड़ों के साथ-साथ फलदार पौधे, औषधीय पौधे (जैसे नीम, आम, शीशम, महोगनी, अर्जुन और सागवान) शामिल किए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को सीधा लाभ मिल सके।

सामजिक वानिकी (Social Forestry) पर जोर: इस बार केवल जंगलों के अंदर ही नहीं, बल्कि बंजर भूमि, सरकारी कार्यालयों के परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों और किसानों की निजी जमीनों पर कृषि वानिकी (Agroforestry) के तहत पौधों के वितरण और रोपण पर विशेष बल दिया जा रहा है।

पौधों के संरक्षण और उत्तरदायित्व की बड़ी चुनौती

पौधे लगा देना एक बात है, लेकिन उन्हें एक बड़ा और स्वस्थ वृक्ष बनाना असली चुनौती है। मुंगेर में অতীতে चलाए गए कई अभियानों में यह देखा गया है कि बजट खर्च होने और पौधारोपण का लक्ष्य कागजों पर पूरा होने के बाद पौधों की सुधि नहीं ली जाती।

देखभाल और निगरानी का अभाव: विभागीय आंकड़ों के अनुसार पौधे तो लाखों की संख्या में रोप दिए जाते हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में उनमें से एक बड़ा हिस्सा सूख जाता है या मवेशियों द्वारा खा लिया जाता है।

जनभागीदारी की आवश्यकता: जब तक स्थानीय पंचायतों, जीविका समूहों और आम नागरिकों को इस पौधारोपण अभियान से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक हरियाली बढ़ाने का यह लक्ष्य शत-प्रतिशत सफल नहीं हो सकता। पौधों की जियो-टैगिंग (Geo-tagging) और उनकी नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था को कड़ा करना बेहद जरूरी है।

मुंगेर जिले में 781 वर्ग किलोमीटर में फैला वन क्षेत्र प्रकृति का एक अनमोल वरदान है, जिसे बचाए रखना और उसका विस्तार करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। वन विभाग द्वारा 2024-26 के दौरान 4 लाख से अधिक पौधे लगाने का दावा और 2023-24 में सड़कों के किनारे 2000 पौधे लगाने जैसी पहल सराहनीय हैं, लेकिन आवश्यकता इस बात की है कि इन योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारा जाए। रोपे गए प्रत्येक पौधे की सुरक्षा, सिंचाई और उसकी उचित देखभाल सुनिश्चित की जानी चाहिए, तभी मुंगेर का पर्यावरण और हरित आवरण सुरक्षित रह सकेगा और आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा मिल सकेगी।