आठ साल पुराने मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त की पेंशन में 5% की स्थायी कटौती

मुजफ्फरपुर: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। मुजफ्फरपुर नगर निगम में ऑटो टिपर की खरीद में हुए बहुचर्चित घोटाले के मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त रंगनाथ चौधरी पर गाज गिरी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस आठ साल पुराने मामले में जांच के बाद बड़ा फैसला लेते हुए उनकी पेंशन में पांच प्रतिशत की स्थायी कटौती करने का आदेश जारी किया है।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2018 के आसपास का है, जब मुजफ्फरपुर नगर निगम द्वारा शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ऑटो टिपर की खरीद की गई थी। इस खरीद प्रक्रिया में भारी वित्तीय अनियमितता और धांधली के आरोप लगे थे। आरोप था कि निविदा (टेंडर) की शर्तों और सरकारी नियमों को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को लाभ पहुँचाया गया और बाजार दर से अधिक कीमत पर वाहनों की खरीद की गई।

मामला प्रकाश में आने के बाद विभाग ने इसे गंभीरता से लिया और विभागीय जांच के आदेश दिए। जांच के दौरान यह पाया गया कि तत्कालीन नगर आयुक्त के पद पर रहते हुए रंगनाथ चौधरी ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया और खरीद प्रक्रिया में बरती गई अनियमितताओं को अनदेखा किया, जिससे सरकारी खजाने को काफी नुकसान पहुँचा।

जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई

आठ वर्षों तक चली इस लंबी विभागीय जांच के बाद, सामान्य प्रशासन विभाग ने अब अपना अंतिम निर्णय सुनाया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें इस वित्तीय अनियमितता के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है। सरकारी नियमों के तहत, दोषी पाए जाने के बाद उनकी पेंशन से 5% की कटौती करने का निर्णय लिया गया है।

यह कटौती केवल अस्थायी नहीं, बल्कि 'स्थायी' (Permanent) होगी, जो संबंधित सेवानिवृत्त अधिकारी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके कार्यकाल में की गई अनैतिक गतिविधियों के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जा सकता है।

प्रशासन की सख्त छवि

मुजफ्फरपुर नगर निगम में हुए इस घोटाले ने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थीं। अब सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद हुई यह कार्रवाई साबित करती है कि प्रशासन पुराने लंबित मामलों को सुलझाने और दोषियों को दंडित करने के प्रति गंभीर है।

हालांकि इस कार्रवाई के बाद संबंधित अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन निगम क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बनी हुई है। शहर के प्रबुद्ध जनों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा है कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों पर इसी तरह का सख्त रुख अपनाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की धांधली को रोका जा सके।

इस फैसले ने एक बार फिर मुजफ्फरपुर नगर निगम में हुए अन्य खरीद-फरोख्त के मामलों पर भी बहस छेड़ दी है, और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में अन्य अनियमितताओं की भी इसी तरह से जांच की जाएगी।