धान की रोपनी के दौरान करंट लगने से सहरसा के मजदूर की मौत, अन्य घायल
सहरसा/पामा: रोजी-रोटी की तलाश में घर से हजारों किलोमीटर दूर हरियाणा गए सहरसा जिले के पामा पंचायत के एक 37 वर्षीय मजदूर की करंट लगने से असमय मौत हो गई। मृतक की पहचान मनोज कामती के रूप में हुई है। इस हादसे में मनोज के भाई सहित कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनका इलाज नजदीकी अस्पताल में चल रहा है। इस हृदयविदारक खबर के बाद पामा पंचायत स्थित उनके पैतृक गांव में मातम पसर गया है।
घटना का विवरण
मिली जानकारी के अनुसार, मनोज कामती पिछले कुछ समय से हरियाणा के एक कृषि क्षेत्र में मजदूरी का काम कर रहे थे। गुरुवार को वह अपने भाई और अन्य साथियों के साथ धान की रोपनी (धान रोपाई) करने के लिए खेत में गए थे। काम के दौरान, बिजली के तारों में हुए शॉर्ट-सर्किट या किसी अज्ञात तकनीकी खराबी के कारण खेत में लगे मोटर या बिजली के प्रवाह की चपेट में सभी मजदूर आ गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करंट का झटका इतना तीव्र था कि मनोज कामती को संभलने का मौका तक नहीं मिला और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। वहीं, उन्हें बचाने के प्रयास में उनके भाई और साथ काम कर रहे अन्य मजदूर भी गंभीर रूप से झुलस गए। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।
परिवार के लिए दुखों का पहाड़
मनोज कामती अपने परिवार के एकमात्र सहारा थे। उनके परिवार में पत्नी, बूढ़े माता-पिता और छोटे-छोटे बच्चे हैं। घर की आर्थिक स्थिति पहले से ही काफी कमजोर थी, जिसके कारण पेट की भूख शांत करने के लिए मनोज को अपना घर-बार छोड़कर दूसरे राज्य पलायन करना पड़ा था। उनकी मौत की खबर सुनते ही घर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में एक सन्नाटा छाया हुआ है।
परिजनों का दर्द: मनोज के परिजनों ने बताया, "वह घर बनाने और बच्चों की अच्छी शिक्षा के सपने लेकर गया था, लेकिन वह तो खुद ही नहीं लौटा। अब हम पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सरकार से हमारी मांग है कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा मिले और घायलों के इलाज में पूरी सहायता की जाए।"
पलायन और सुरक्षा का गंभीर प्रश्न
यह घटना एक बार फिर बिहार से होने वाले 'मजदूर पलायन' के दर्दनाक सच को उजागर करती है।
सुरक्षा का अभाव: खेतों में काम के दौरान बिजली उपकरणों और असुरक्षित तारों का जाल किसी बड़े खतरे को आमंत्रण देता है। क्या वहां कोई सुरक्षा मानक अपनाए गए थे? यह जांच का विषय है।
आजीविका की मजबूरी: यदि बिहार में ही रोजगार के पर्याप्त अवसर होते, तो मनोज जैसे मेहनतकश लोगों को हजारों किलोमीटर दूर जाकर अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ती।
प्रशासनिक उदासीनता: दूसरे राज्यों में काम करने वाले बिहार के प्रवासी मजदूरों के साथ ऐसी घटनाओं पर अक्सर कोई सुध लेने वाला नहीं होता।
स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया और मदद की मांग
पामा पंचायत के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मृतक के शव को गांव लाने के लिए सरकारी मदद उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, हरियाणा में इलाजरत घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले, इसके लिए संबंधित राज्य के अधिकारियों से समन्वय स्थापित करने की अपील की गई है।
सुरक्षा के प्रति जागरूकता (मजदूरों के लिए)
खेतों में काम करने वाले मजदूरों के लिए बिजली संबंधी सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है:
तारों की जांच: काम शुरू करने से पहले खेत में लगे बिजली के तारों और मोटर की जांच अवश्य करें।
दस्ताने और जूते: बिजली से जुड़े कार्यों या गीली मिट्टी में काम करते समय रबर के दस्ताने और जूते पहनना अनिवार्य होना चाहिए।
सतर्कता: बिजली के पोल या नंगे तारों के पास काम करते समय अत्यधिक सावधानी बरतें।
मनोज कामती की मृत्यु केवल एक परिवार का नुकसान नहीं है, बल्कि यह उन हजारों प्रवासी मजदूरों की नियति का आईना है जो अपनी जान हथेली पर रखकर परिवार के लिए कमाते हैं। हम सभी की संवेदनाएं मनोज के परिवार के साथ हैं। उम्मीद है कि सरकार इस कठिन घड़ी में मृतक के परिजनों की सुध लेगी और घायलों के बेहतर स्वास्थ्य की कामना की जाएगी।