माँ-बहन के सामने पैर फिसलने से गहरे पानी में डूबा 15 वर्षीय रमण, स्थानीय गोताखोरों की मदद से शव बरामद

 उत्तरवाहिनी गंगा के पावन तट सुल्तानगंज स्थित नमामि गंगे घाट पर ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के पवित्र स्नान के लिए अपनी माँ और बहन के साथ आए एक 15 वर्षीय किशोर रमण कुमार की गंगा नदी के गहरे पानी में डूबने से दर्दनाक मृत्यु हो गई।

बताया जाता है कि स्नान करने के दौरान अचानक पैर फिसल जाने के कारण किशोर गहरे पानी की तेज धार में समा गया। घाट पर मौजूद उसकी माँ और बहन चीखती-चिल्लाती रहीं, लेकिन जब तक लोग कुछ समझ पाते, किशोर आंखों से ओझल हो चुका था। बाद में स्थानीय प्रशासन और घाट पर मौजूद स्थानीय गोताखोरों व नाविकों की कड़ी मशक्कत के बाद किशोर के शव को पानी से बाहर निकाला जा सका। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूर्णिमा की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं।

 ज्येष्ठ पूर्णिमा स्नान का उत्सव पल भर में बदला मातम में

सनातन धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा के स्नान और दान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी आस्था के तहत सोमवार को सुल्तानगंज के विभिन्न गंगा घाटों, विशेषकर नमामि गंगे घाट और अजगैबीनाथ घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही थी।

मुंगेर जिले के असरगंज (स्थानीय पता) क्षेत्र का रहने वाला 15 वर्षीय रमण कुमार भी अपनी माँ और सगी बहन के साथ पूर्णिमा के पावन मौके पर गंगा स्नान करने और बाबा अजगैबीनाथ की पूजा-अर्चना करने सुल्तानगंज आया था। नमामि गंगे घाट पर चारों तरफ उत्सव का माहौल था, श्रद्धालु भजनों के बीच गंगा में डुबकी लगा रहे थे। रमण भी अपनी माँ और बहन के साथ घाट के किनारे पानी में उतरा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; स्नान करने के क्रम में घाट की सीढ़ियों के आगे अचानक उसका पैर फिसल गया और वह सीधे गहरे पानी के गड्ढे में चला गया।

 माँ और बहन के सामने घटित हुई दिल दहला देने वाली वारदात

चश्मदीदों के अनुसार, यह पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। जैसे ही रमण का पैर फिसला, वह खुद को संतुलित नहीं कर पाया। गंगा की तेज धारा उसे अंदर की ओर खींचने लगी।

लाचार माँ-बहन की चीख-पुकार: रमण को पानी में डूबते और हाथ-पैर मारते देख उसकी माँ और बहन ने शोर मचाना शुरू किया। वे चिल्ला-चिल्लाकर लोगों से अपने बच्चे को बचाने की गुहार लगा रही थीं।

तेज बहाव में समाया किशोर: घाट पर मौजूद कुछ अन्य श्रद्धालु जब तक तैरकर रमण तक पहुँचने का प्रयास करते, तब तक पानी के तेज बहाव और भंवर के कारण वह गहरे पानी में पूरी तरह डूब गया। कुछ ही सेकंडों में वह अपनी माँ की आंखों के सामने से ओझल हो गया। माँ और बहन घाट पर ही सिर पटक-पटक कर रोने लगीं, जिससे वहां मौजूद हर श्रद्धालु की आंखें नम हो गईं।

 स्थानीय गोताखोरों और नाविकों ने दिखाई मुस्तैदी, निकाला शव

घटना के तुरंत बाद घाट पर तैनात स्थानीय नाविक और गोताखोर (मल्लाह) हरकत में आए। उन्होंने बिना वक्त गंवाए गंगा नदी के उस गहरे इलाके में छलांग लगा दी जहाँ किशोर डूबा था।

घंटों चली खोजबीन: नमामि गंगे घाट के पास गंगा की गहराई और नीचे की मिट्टी के कटाव के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी परेशानी आ रही थी। स्थानीय नाविकों ने अपने जालों और नावों के सहारे उस पूरे दायरे को खंगालना शुरू किया।

शव बरामद: लगभग एक से डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत और तलाश के बाद, स्थानीय गोताखोरों ने नदी के तल से 15 वर्षीय रमण कुमार के अचेत शरीर को ढूंढ निकाला और उसे नाव के जरिए घाट पर लेकर आए।

अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया: घाट पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और परिजनों द्वारा किशोर को तुरंत स्थानीय रेफरल अस्पताल, सुल्तानगंज ले जाया गया। वहां आपातकालीन वार्ड में तैनात चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद रमण को 'ब्रॉट डेड' (मृत अवस्था में लाया गया) घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, फेफड़ों में अत्यधिक पानी भर जाने और दम घुटने (Asphyxiation) के कारण अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी।

 घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और डेंजर जोन पर उठे सवाल

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सुल्तानगंज के गंगा घाटों पर जिला प्रशासन और नगर परिषद द्वारा की जाने वाली सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। ज्येष्ठ पूर्णिमा जैसे बड़े त्योहारों पर जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे।

बैरिकेडिंग का अभाव: स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों ने आरोप लगाया कि नमामि गंगे घाट के आगे जहाँ पानी गहरा है और 'डेंजर जोन' (खतरनाक इलाका) शुरू होता है, वहां कोई मजबूत बांस-बल्ले की बैरिकेडिंग या लाल झंडा नहीं लगाया गया था।

एसडीआरएफ (SDRF) की अनुपस्थिति: श्रद्धालुओं का कहना था कि इतने बड़े स्नान पर्व पर राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की मोटर बोट और प्रशिक्षित जवानों की तैनाती घाट पर मुस्तैद रहनी चाहिए थी। यदि समय रहते सरकारी रेस्क्यू टीम सक्रिय होती, तो शायद किशोर की जान बचाई जा सकती थी। स्थानीय नाविकों ने ही हमेशा की तरह इस बार भी तत्परता दिखाई।

परिजनों का विलाप और पुलिस की वैधानिक कार्रवाई

अस्पताल में रमण की मौत की पुष्टि होते ही उसकी माँ और बहन का रो-रोकर बुरा हाल था। माँ बार-बार बेहोश हो जा रही थी और रोते हुए कह रही थी, "हम तो पूजा करने आए थे, गंगा मैया ने मेरा इकलौता चिराग ही बुझा दिया।" अस्पताल परिसर में परिजनों की चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की रूह कांप उठी।

इधर, घटना की सूचना मिलते ही सुल्तानगंज थाना पुलिस अस्पताल पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया। थाना प्रभारी ने बताया कि मृतक किशोर के परिजनों के बयान के आधार पर अस्वाभाविक मृत्यु (UD Case) का मामला दर्ज किया जा रहा है। पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल भेज दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और सरकारी नियमों के तहत मिलने वाले आपदा मुआवजा (चार लाख रुपये) की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया।

घटना का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

पैरामीटर / विषयमुख्य विवरण
मृतक का नामरमण कुमार (उम्र 15 वर्ष)
निवासीअसरगंज (मुंगेर जिला)
घटनास्थलनमामि गंगे घाट, सुल्तानगंज, भागलपुर
अवसर / तिथिज्येष्ठ पूर्णिमा स्नान
दुर्घटना का कारणस्नान के दौरान सीढ़ी से अचानक पैर फिसलना और गहरा पानी
बचाव कार्यस्थानीय गोताखोरों और नाविकों द्वारा शव बरामद
प्रशासनिक कार्रवाईशव पोस्टमार्टम के लिए प्रेषित, यूडी केस दर्ज

सुल्तानगंज के नमामि गंगे घाट पर ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन घटित यह हादसा बेहद दुखद और आंखें खोलने वाला है। धार्मिक आस्था के कारण लोग नदियों में उतरते हैं, लेकिन गंगा नदी की भौगोलिक स्थिति और पानी के नीचे का अप्रत्याशित कटाव बेहद खतरनाक साबित होता है। इस घटना से सबक लेते हुए जिला प्रशासन को सुल्तानगंज के सभी चालू घाटों पर स्थायी रूप से डेंजर मार्क (खतरे का निशान) और बैरिकेडिंग लगानी चाहिए, विशेषकर पर्व-त्योहारों के दिनों में। इसके साथ ही, आम जनता और श्रद्धालुओं को भी यह समझना होगा कि वे गहरे पानी में जाने का जोखिम न उठाएं। 15 साल के रमण की असामयिक मौत ने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है।