हरदा फीडर का हाल बेहाल: पूर्णिया के नगर प्रखंड अंतर्गत रहुआ पंचायत के वार्ड 12 में पिछले तीन दिनों से बिजली गुल; उमस भरी गर्मी में उपभोक्ता परेशान, बिजली विभाग के खिलाफ आक्रोश

पूर्णिया/हरदा/नगर (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले में एक तरफ जहां सरकार और बिजली विभाग चौबीस घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं धरातल की हकीकत इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। हरदा फीडर के अंतर्गत आने वाले नगर प्रखंड की रहुआ पंचायत स्थित वार्ड 12 के निवासी पिछले तीन दिनों से भीषण बिजली संकट से जूझ रहे हैं। लगातार तीन दिनों से बिजली पूरी तरह गुल रहने के कारण इस ग्रामीण इलाके के उपभोक्ताओं का जीवन नारकीय बन गया है।

उमस भरी गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच बिजली न होने से न केवल आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की सेहत और छोटे-मोटे कारोबारियों का कामकाज भी ठप पड़ गया है। स्थानीय ग्रामीणों और उपभोक्ताओं में बिजली विभाग की लचर व्यवस्था के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। आइए जानते हैं रहुआ पंचायत के वार्ड 12 में उपजे इस गंभीर बिजली संकट की पूरी दास्तान, उपभोक्ताओं की परेशानियों और विभाग की उदासीनता का विस्तृत विवरण।

 घटना की पृष्ठभूमि: अचानक तीन दिनों से ठप हुई बिजली आपूर्ति

रहुआ पंचायत का वार्ड 12 वैसे तो ग्रामीण परिवेश का एक सामान्य वार्ड है, जहाँ बिजली की आंख-मिचौली आम बात है, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग और गंभीर है।

तीन दिनों से अंधेरे में डूबा वार्ड: स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले 72 घंटों से अधिक समय से इस वार्ड की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित है। शुरुआती कुछ घंटों तक लोगों ने इसे सामान्य फॉल्ट या तकनीकी खराबी समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जब लगातार तीन दिन बीत जाने के बाद भी घरों के बल्ब नहीं जले, तो लोगों का सब्र जवाब दे गया।

हरदा फीडर की लचर व्यवस्था: यह पूरा क्षेत्र हरदा फीडर के अंतर्गत आता है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि हरदा फीडर और संबंधित पावर सब-स्टेशन की कार्यशैली बेहद लचर हो चुकी है। मामूली आंधी-पानी या ट्रांसफॉर्मर में खराबी आने पर भी उसे सुधारने में कई-कई दिन लगा दिए जाते हैं, जिससे जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

उमस भरी गर्मी और पानी का संकट: बेहाल हुए ग्रामीण

जुलाई-अगस्ट के इस उमस भरे मौसम में जब आसमान से आग बरसती है और चिलचिलाती धूप के साथ भारी ह्यूमिडिटी (उमस) होती है, ऐसे में बिना बिजली के रहना किसी सजा से कम नहीं है।

बिजली उपकरणों का शोपीस बनना: घरों में रखे पंखे, कूलर, इन्वर्टर और एसी पूरी तरह शोपीस बनकर रह गए हैं। इन्वर्टर भी पहले दिन ही डिस्चार्ज होकर जवाब दे चुके हैं। रात के वक्त मच्छरों के आतंक और उमस के कारण लोग सो नहीं पा रहे हैं।

पेयजल की गंभीर समस्या: बिजली न होने के कारण गांवों में लगे सबमर्सिबल पंप और मोटर बंद पड़े हैं, जिससे पीने के साफ पानी का भारी संकट पैदा हो गया है। महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से या चापाकालों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है, जिससे दैनिकचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है।

छात्रों की पढ़ाई और स्थानीय कारोबार पर ग्रहण

बिजली संकट का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों की पढ़ाई और स्थानीय छोटे कारोबारियों पर पड़ा है।

बच्चों की परीक्षा और पढ़ाई बाधित: इन दिनों स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं या आगामी सत्र की तैयारी चल रही है। शाम के वक्त रौशनी न होने के कारण बच्चे लालटेन या मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ने को मजबूर हैं, जिससे उनकी आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है।

व्यापारिक नुकसान: वार्ड के अंतर्गत जिन लोगों ने छोटी-मोटी दुकानें, वेल्डिंग या आटा चक्की जैसी दुकानें खोल रखी हैं, उनका काम पूरी तरह ठप है। बिजली के अभाव में कामकाज बंद रहने से गरीबों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।

विभाग की उदासीनता और ग्रामीणों का आक्रोश

लगातार तीन दिनों से बिजली गुल रहने के बावजूद बिजली विभाग के स्थानीय कनीय अभियंता (Junior Engineer) या लाइनमैन की ओर से कोई ठोस पहल न किए जाने से ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

शिकायत के बावजूद सुनवाई नहीं: ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार हरदा फीडर के कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों के फोन नंबर पर संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन या तो फोन रिसीव नहीं किए गए या फिर 'जल्द ही बिजली ठीक करने' का रटा-रया जवाब देकर टालमटोल किया गया।

आंदोलन की चेतावनी: आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द वार्ड 12 में बिजली आपूर्ति सुचारू नहीं की गई, तो वे सड़क पर उतरकर हरदा फीडर कार्यालय का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे।

पूर्णिया जिले के नगर प्रखंड अंतर्गत रहुआ पंचायत के वार्ड 12 में पिछले तीन दिनों से बिजली का न होना यह साबित करता है कि ग्रामीण इलाकों में बिजली वितरण व्यवस्था कितनी बदहाल स्थिति में है। हरदा फीडर के अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण सैकड़ों परिवार उमस भरी गर्मी में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले का संज्ञान लें, तुरंत तकनीकी खराबी को दूर करवाकर बिजली आपूर्ति बहाल करें और लापरवाह कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें, ताकि आम जनता को इस तरह की प्रताड़ना से मुक्ति मिल सके।