तीन सूत्री मांगों को लेकर नगर निगम कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से शहर में ठप हुई जलापूर्ति; डीप बोरिंग बंद होने से हाहाकार, पार्षदों ने खुद संभाला मोर्चा

भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर में नगर निगम प्रशासन और कर्मचारियों के बीच जारी घमासान अब आम जनता के लिए गंभीर संकट बन गया है। अपनी विभिन्न तीन सूत्री मांगों को लेकर नगर निगम के सफाई कर्मचारियों, चालकों और दैनिक वेतनभोगियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। इस हड़ताल का सबसे बुरा असर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है, जिसके तहत शहर भर के अधिकांश डीप बोरिंग और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बंद कर दिए गए हैं। भीषण गर्मी और उमस के बीच पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे शहरवासियों के गुस्से को देखते हुए अब नगर निगम के कई पार्षदों ने खुद मोर्चा संभाल लिया है और वार्डों में जनरेटर व वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए जलापूर्ति शुरू कराने का प्रयास कर रहे हैं।

क्या हैं कर्मचारियों की तीन सूत्री मांगें?

नगर निगम कर्मियों का आरोप है कि वे लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है:

वेतन और एरियर का भुगतान: हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की मुख्य मांग समय पर नियमित वेतन भुगतान और पिछले बकाये एरियर का जल्द से जल्द भुगतान करना है। दैनिक और संविदा कर्मियों का आरोप है कि महीनों तक उन्हें मानदेय नहीं मिलता, जिससे उनके परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाती है।

सेवा नियमितीकरण और सुरक्षा संसाधन: निगम में कार्यरत दैनिक और अनुबंध आधारित सफाई कर्मियों को स्थायी (नियमित) करने तथा कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरण (जैसे ग्लव्स, मास्क, जैकेट आदि) उपलब्ध कराने की मांग लंबे समय से की जा रही है।

चिकित्सा और अन्य सुविधाएं: कर्मचारियों का कहना है कि जोखिम भरे माहौल में काम करने के बावजूद उन्हें स्वास्थ्य बीमा या चिकित्सीय सहायता का लाभ नहीं मिलता, जिसे अविलंब लागू किया जाना चाहिए।

डीप बोरिंग बंद होने से शहर में मचा हाहाकार

कर्मचारियों की इस अचानक हड़ताल के कारण नगर निगम की सभी कार्यप्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है:

जलापूर्ति ठप: डीप बोरिंग और जलापूर्ति केंद्रों के चालकों के हड़ताल पर चले जाने के कारण शहर के दर्जनों वार्डों में नलों से पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी। सुबह-सुबह पानी के लिए महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज के चापाकलों या निजी बोरिंगों की ओर भटकना पड़ा।

कचरा उठाव भी प्रभावित: जलापूर्ति के अलावा शहर से कचरे का उठाव भी पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे प्रमुख चौराहों और गलियों में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं और बदबू से जीना मुहाल हो गया है।

जनता की परेशानी देख पार्षदों ने खुद संभाला मोर्चा

वार्ड की जनता के भारी आक्रोश और विकट स्थिति को भांपते हुए नगर निगम के कई वार्ड पार्षदों ने खुद आगे आकर कमान संभाल ली है:

वैकल्पिक व्यवस्था की पहल: कई इलाकों में पार्षदों ने अपने निजी खर्च और सहयोगियों की मदद से जनरेटर की व्यवस्था कर डीप बोरिंग चालू करवाने का प्रयास किया। कुछ पार्षदों ने टैंकरों के जरिए प्रभावित मोहल्लों में पीने के पानी की आपूर्ति करवाई।

प्रशासन के खिलाफ रोष: पार्षदों का कहना है कि निगम अधिकारियों की हठधर्मिता और लचर रवैये के कारण आज आम जनता को इस भीषण गर्मी में सजा भुगतनी पड़ रही है। पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही कर्मचारियों से वार्ता कर हड़ताल समाप्त नहीं कराई, तो वे निगम कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन करेंगे।

प्रशासनिक हलचल और वार्ता के प्रयास

हालात की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों ने आपात बैठक बुलाई है:

कर्मचारियों से अपील: नगर आयुक्त और मेयर ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत का दौर शुरू किया है। अधिकारियों का आश्वासन है कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा रहा है, इसलिए वे जनहित को ध्यान में रखते हुए तुरंत हड़ताल वापस लें।

वैकल्पिक कर्मियों की तैनाती: प्रशासन ने हड़ताल के बीच शहर में जलापूर्ति सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक और तकनीकी कर्मियों को मैदान में उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि जल्द से जल्द स्थिति सामान्य हो सके।

भागलपुर नगर निगम कर्मचारियों की तीन सूत्री मांगों को लेकर शुरू हुई यह हड़ताल और डीप बोरिंग का बंद होना प्रशासनिक कुप्रबंधन का एक और उदाहरण पेश करता है। भले ही पार्षदों ने अपनी सूझबूझ से फिलहाल स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक जनता की यह परेशानी यूं ही बनी रहेगी। इस संकट से पार पाने के लिए निगम प्रशासन को जल्द से जल्द ठोस और सकारात्मक कदम उठाने होंगे।