श्रावणी मेले में अटूट आस्था का सैलाब; सुल्तानगंज से शुक्रवार को 629 डाक बम और 84 हजार से अधिक सामान्य कांवरियों ने उठाया गंगाजल, बाबाधाम के लिए हुए रवाना
भागलपुर/सुल्तानगंज, कार्यालय संवाददाता: विश्व प्रसिद्ध पवित्र श्रावणी मेले के दौरान उत्तरवाहिनी गंगा तट सुल्तानगंज की पावन भूमि पर इन दिनों आस्था, साधना और समर्पण का अभूतपूर्व संगम देखने को मिल रहा है। देश के कोने-कोने से आ रहे शिव भक्तों की भीड़ से पूरा मेला क्षेत्र 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारों से गूंज रहा है। इसी कड़ी में मेला क्षेत्र से एक बेहद महत्वपूर्ण और उत्साहवर्धक आंकड़े सामने आए हैं। शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच कुल 629 डाक बम (जो अत्यंत कठिन और तीव्र गति से बिना रुके यात्रा पूरी करते हैं) ने पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर के लिए प्रस्थान किया। इसके साथ ही, इस दिन सामान्य कांवरियों की संख्या भी भारी-भरकम दर्ज की गई, जिससे स्पष्ट होता है कि सावन की इस ऋतू में शिव के प्रति दीवानगी चरम पर है।
डाक बमों की विशेष विदाई: 612 पुरुष और 17 महिलाएं रहीं शामिल
श्रावणी मेले में 'डाक बम' की यात्रा को सबसे कठिन और साहसिक धार्मिक यात्रा माना जाता है, जिसमें कांवरिया बिना कहीं रुके, लगातार दौड़ते या तेज गति से पैदल चलकर 24 से 30 घंटे के भीतर सुल्तानगंज से देवघर की लगभग 105 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं:
आंकड़ों की बानगी: शुक्रवार को रवाना हुए 629 डाक बमों के इस विशेष जत्थे में 612 पुरुष और 17 महिलाएं शामिल थीं। इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का डाक बम की कठिन और तीव्र पदयात्रा में शामिल होना यह साबित करता है कि आधुनिक समय में नारी शक्ति की आस्था और सहनशक्ति भी अद्वितीय है।
संकल्प और नियम: इन डाक बमों ने गंगा तट पर संकल्प लिया कि वे रास्ते में कहीं भी विश्राम नहीं करेंगे और सीधे बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने के बाद ही अपनी यात्रा संपन्न करेंगे। उनके इस दृढ़ संकल्प को देखकर घाट पर मौजूद अन्य श्रद्धालु भी मंत्रमुग्ध नजर आए।
84,014 सामान्य कांवरियों ने भी भरा जल, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
केवल डाक बम ही नहीं, बल्कि सामान्य कांवरियों की संख्या ने भी इस दिन सारे रिकॉर्ड के करीब का आंकड़ा छुआ:
विशाल जनसैलाब: प्रशासनिक और मंदिर न्यास समिति के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को सुल्तानगंज गंगा तट पर जल भरने वाले सामान्य कांवरियों की कुल संख्या लगभग 84,014 दर्ज की गई।
अजगैवीनाथ धाम से गंगाजल उठाव: अहले सुबह से ही कच्ची और पक्की कांवरिया सड़कों पर केवल भगवा वस्त्रधारी शिव भक्त ही नजर आ रहे थे। दूर-दराज के राज्यों जैसे झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कांवरियों ने उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर अपने कांवड़ में जल भरा और बोल बम के जयकारों के साथ अपनी यात्रा शुरू की।
प्रशासनिक चौकसी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
लाखों की संख्या में उमड़ रही भीड़ और विशेष रूप से डाक बमों की तेज गति वाली यात्रा को सुरक्षित संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया:
कांवरिया पथ पर विशेष निगरानी: भागलपुर और बांका जिला प्रशासन द्वारा कांवरिया पथ पर सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं। चूंकि डाक बम बहुत तेज गति से चलते हैं, इसलिए उनके रास्ते में यातायात को नियंत्रित करने और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए पुलिस बल और स्वयंसेवकों को जगह-जगह तैनात किया गया था।
स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाएं: रास्ते में पड़ने वाले सभी स्वास्थ्य शिविरों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि दौड़ते हुए यात्रा करने वाले डाक बमों या अन्य थके हुए कांवरियों को तुरंत प्राथमिक उपचार, ओआरएस और मेडिकल सहायता मिल सके।
सुल्तानगंज से शुक्रवार को 629 डाक बमों (612 पुरुष और 17 महिलाओं) का देवघर के लिए प्रस्थान करना और 84 हजार से अधिक सामान्य कांवरियों का गंगा जल उठाना इस बात का प्रमाण है कि श्रावणी मेला अपनी पूरी दिव्यता के साथ परवान चढ़ चुका है। शिवभक्तों की यह अटूट आस्था और कठिन साधना संपूर्ण मेला क्षेत्र को एक अलौकिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर रही है।