टिमकाऊ व्यवस्था पर विश्वविद्यालय प्रशासन सख्त; समर्थ पोर्टल पर ऑनलाइन लीव मॉड्यूल लागू होने के बावजूद कुछ विभागों में अब भी दिए जा रहे ऑफलाइन आवेदन, कुलसचिव ने जारी की कड़ी चेतावनी

भागलपुर, विशेष संवाददाता: उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी, डिजिटल और पेपरलेस बनाने के सरकार व कुलाधिपति कार्यालय के निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक सुस्ती और मनमानी किस हद तक हावी है, इसकी एक बानगी भागलपुर में देखने को मिली है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में शिक्षकों और कर्मचारियों के अवकाश (Leave) के लिए 'समर्थ पोर्टल' (Samarth Portal) पर लीव मॉड्यूल (Leave Module) को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। बावजूद इसके, कई विभागों और इकाईयों में नियमों की अनदेखी का सिलसिला थम नहीं रहा है। ऑनलाइन डिजिटल व्यवस्था शुरू हो जाने के बाद भी कुछ लोग धड़ल्ले से पुराने ढर्रे पर चलते हुए ऑफलाइन आवेदन दे रहे हैं। इस गंभीर लापरवाही को विश्वविद्यालय प्रशासन ने बेहद सख्ती से लिया है और कुलसचिव ने सभी इकाई प्रधानों को कड़ी चेतावनी पत्र जारी किया है।

क्या है पूरा मामला? समर्थ पोर्टल और लीव मॉड्यूल की अनिवार्यता

विश्वविद्यालयों में कामकाज में पारदर्शिता लाने और फाइलों के लंबे चक्कर से मुक्ति दिलाने के लिए डिजिटल इंडिया अभियान के तहत 'समर्थ पोर्टल' की शुरुआत की गई थी। इसके तहत शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के लिए छुट्टी लेने की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन यानी डिजिटल कर दिया गया है:

ऑनलाइन व्यवस्था की बाध्यता: टीएमबीयू प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अब किसी भी प्रकार के अवकाश (चाहे वह आकस्मिक अवकाश हो या अन्य छुट्टियां) के लिए आवेदन केवल समर्थ पोर्टल के लीव मॉड्यूल के जरिए ही स्वीकार किए जाएंगे।

नियमों की धज्जियां: विडंबना यह है कि उच्चाधिकारियों के स्पष्ट आदेश और तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद कई विभागों के प्रमुख और कर्मी इस आधुनिक व्यवस्था से मुंह मोड़ रहे हैं। वे पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने के बजाय पारंपरिक कागजी (ऑफलाइन) आवेदन स्वीकार कर रहे हैं और आगे बढ़ा रहे हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन सख्त: कुलसचिव ने जारी किया चेतावनी पत्र

जब यह मामला विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, तो इसे प्रशासनिक अनुशासनहीनता मानते हुए तुरंत कदम उठाया गया:

कुलसचिव डॉ. रामाशीष पूर्वे की कार्रवाई: मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलसचिव डॉ. रामाशीष पूर्वे ने विश्वविद्यालय के सभी संबंधित इकाई प्रधानों, विभागाध्यक्षों और कॉलेज प्राचार्यों को स्पष्ट चेतावनी पत्र जारी किया है।

कार्रवाई की चेतावनी: पत्र में दो टूक शब्दों में कहा गया है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बावजूद यदि भविष्य में ऑफलाइन आवेदन लिए गए या नियमों की अवहेलना जारी रही, तो संबंधित इकाई प्रधानों और जिम्मेवार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

डिजिटलीकरण की राह में पुरानी मानसिकता का रोड़ा

शैक्षणिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर क्यों तकनीक से भागने की प्रवृत्ति बनी हुई है:

पारदर्शिता से बचने की कोशिश: जानकारों का मानना है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से छुट्टियों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित हो जाता है, जिससे पारदर्शिता आती है और किसकी कितनी छुट्टी बची है या कौन बिना सूचना के गायब रहता है, इसका सटीक डेटा मिल जाता है। ऑफलाइन व्यवस्था में धांधली की गुंजाइश बनी रहती है, शायद यही वजह है कि कुछ लोग पुरानी व्यवस्था से मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं।

कर्मचारियों और अधिकारियों की उदासीनता: कई जगहों पर तकनीकी ज्ञान का अभाव या नया पोर्टल सीखने से बचने की प्रवृत्ति भी इसके पीछे एक बड़ा कारण बनकर सामने आ रही है। हालांकि, प्रशासन के इस कड़े रुख के बाद अब विभागों में हड़कंप मच गया है।

भागलपुर के तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में अवकाश आवेदन को लेकर सामने आया यह मामला यह साबित करने के लिए काफी है कि कागजी संस्कृति से डिजिटल व्यवस्था की ओर बढ़ना इतना आसान नहीं है। हालांकि, कुलसचिव द्वारा दी गई कड़ी चेतावनी के बाद अब यह उम्मीद बंधती है कि सुस्त पड़े विभाग भी हरकत में आएंगे और समर्थ पोर्टल के लीव मॉड्यूल का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करेंगे, जिससे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज में अनुशासन और पारदर्शिता दोनों स्थापित हो सकें।