पावन श्रावणी मेले में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की अनूठी पहल; नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से शिवभक्तों को दी जा रही है सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी, कलाकारों की प्रस्तुति बनी आकर्षण का केंद्र

भागलपुर, विशेष संवाददाता: देवघर और सुल्तानगंज से लेकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक जाने वाले पवित्र कांवरिया मार्ग पर इन दिनों आस्था का महाकुंभ यानी विश्व प्रसिद्ध 'श्रावणी मेला' अपने पूरे चरम पर है। लाखों की संख्या में देश-विदेश से पहुंच रहे शिवभक्तों की भीड़ के बीच बिहार सरकार का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) एक बेहद अनूठी और सराहनीय पहल कर रहा है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को केवल धार्मिक माहौल ही नहीं मिल रहा, बल्कि उन्हें सरकार की महत्वपूर्ण जनहितकारी योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है। विभाग द्वारा मेले के विभिन्न प्रमुख पड़ावों और विश्राम स्थलों पर नुक्कड़ नाटकों का भव्य और प्रभावशाली आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से राज्य सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं को बहुत ही सरल, सहज और रोचक अंदाज में प्रदर्शित किया जा रहा है।

नुक्कड़ नाटकों के जरिए आस्था और संवाद का अनूठा संगम

श्रावणी मेले की इस व्यस्तता और भगदड़ के बीच कलाकारों की टोलियां कांवरियों के बीच पहुंचकर कला के माध्यम से बड़ा संदेश दे रही हैं:

रोचक और जीवंत प्रस्तुतियां: कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे नुक्कड़ नाटकों की शैली इतनी सरल और मनोरंजक है कि रास्ते में थकान मिटाने के लिए रुकने वाले कांवरिया और स्थानीय लोग मंत्रमुग्ध होकर इसे देखने के लिए इकट्ठा हो जाते हैं। संगीत, संवाद और अभिनय के मेल से नाटकों को बेहद जीवंत बनाया गया है।

भक्तों की उमड़ती भीड़: बोल बम के जयकारों के बीच जब ढोल-मंजीरे की थाप पर नाटक का मंचन शुरू होता है, तो पूरा माहौल सांस्कृतिक ऊर्जा से भर जाता है। दर्शक तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हैं और साथ ही योजनाओं से जुड़ी अहम जानकारियां भी प्राप्त करते हैं।

सतत जीविकोपार्जन योजना से बदलती जिंदगियों का प्रदर्शन

नुक्कड़ नाटकों की मुख्य विषयवस्तु में बिहार सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक 'सतत जीविकोपार्जन योजना' को प्रमुखता से शामिल किया गया है:

अति गरीब परिवारों के उत्थान की गाथा: कलाकारों ने नाटक के मंचन के माध्यम से बहुत ही मार्मिक ढंग से यह दर्शाया कि कैसे यह योजना समाज के सबसे पिछड़े और अति गरीब परिवारों को ताड़ी बेचने के पारंपरिक रोजगार या अन्य कुटीर व्यवसायों से निकालकर गरिमापूर्ण और स्थायी आजीविका से जोड़ रही है।

स्वरोजगार के अवसर: नाटक के जरिए यह संदेश दिया गया कि सरकार इस योजना के तहत किस प्रकार हुनरमंद प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं और पुरुष आत्मनिर्भर बन रहे हैं और उनके जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है।

वृद्धजन पेंशन योजना की दी जा रही विस्तृत जानकारी

बुजुर्गों के सामाजिक सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए नाटक में 'मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना' का भी प्रभावी मंचन किया गया:

बुढ़ापे का मजबूत सहारा: कलाकारों ने संवादों के माध्यम से बहुत ही सरल भाषा में श्रद्धालुओं को समझाया कि राज्य का कोई भी वृद्ध नागरिक अब बेसहारा नहीं है। इस योजना के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी पात्र बुजुर्गों को बिना किसी भागदौड़ के नियमित पेंशन राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है।

योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया: नाटक के दृश्यों में यह भी बताया गया कि इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे किया जा सकता है और इसके लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, ताकि सुदूर गांवों तक रहने वाले जरूरतमंद लोग इसका पूरा लाभ उठा सकें।

श्रद्धालुओं और आम जनता में जबरदस्त उत्साह

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की इस पहल को मेला क्षेत्र में भारी सराहना मिल रही है:

मनोरंजन के साथ ज्ञानवर्धन: कांवरियों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन यात्रा के दौरान इस तरह के नुक्कड़ नाटक न केवल मानसिक थकान दूर करते हैं, बल्कि सरकार की उन योजनाओं से भी अवगत कराते हैं, जिनकी जानकारी कई बार ग्रामीण स्तर पर लोगों तक नहीं पहुंच पाती है।

जागरूकता का प्रभावी माध्यम: स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि कला और संस्कृति के माध्यम से जनहित की बातों को पहुंचाना सरकार का एक बेहतरीन कदम है। इससे मेले में आने वाले लोग जागरूक होकर अपने अधिकारों और सरकारी मदद के बारे में जान पा रहे हैं।

श्रावणी मेले के दौरान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित ये नुक्कड़ नाटक इस बात का बेहतरीन उदाहरण हैं कि कैसे सांस्कृतिक आयोजनों का उपयोग जन-जागरूकता के लिए किया जा सकता है। 'सतत जीविकोपार्जन' और 'वृद्धजन पेंशन योजना' जैसी कल्याणकारी योजनाओं को जब कलाकारों ने अपनी कला के जरिए मंच पर उतारा, तो उसने लाखों श्रद्धालुओं के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। यह अनूठा प्रयास मेला क्षेत्र में आस्था के साथ-साथ ज्ञान और विकास का एक अनूठा प्रकाश फैला रहा है।