भवानीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी बदलने के बावजूद बदस्तूर जारी है अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर और फर्जी क्लीनिकों का काला कारोबार: स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे, स्थानीय लोगों में भयंकर आक्रोश

 

बिहार के पूर्णिया जिले के भवानीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) क्षेत्र से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती हुई एक बेहद गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। भवानीपुर अस्पताल में भले ही प्रशासनिक फेरबदल के तहत नए प्रभारी की नियुक्ति कर दी गई हो, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि प्रभारी बदलने के बावजूद क्षेत्र में अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर और झोलाछाप फर्जी क्लीनिकों का संचालन पूरी बेधड़क और धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय जागरूक नागरिकों और प्रबुद्ध जनों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत और प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण गरीब और भोली-भाली जनता की जान के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है, जिससे यहाँ की पूरी चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है।

क्या है पूरा मामला? प्रशासनिक बदलाव के बाद भी क्यों नहीं लग पा रही रोक?

प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, भवानीपुर क्षेत्र में लंबे समय से बिना निबंधन (Registration) और बिना किसी मानक (Standards) के दर्जनों अवैध नर्सिंग होम, फर्जी क्लीनिक और अल्ट्रासाउंड सेंटर कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हैं। कुछ समय पहले जब स्थानीय स्तर पर इस अवैध कारोबार को लेकर हंगामा हुआ था, तो प्रशासनिक अधिकारियों ने लीपापोती करते हुए स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी (Medical Officer In-charge) को बदल दिया था। जनता को उम्मीद थी कि नए प्रभारी के आने के बाद इन अवैध और गैर-कानूनी चिकित्सा संस्थानों पर हंटर चलेगा और फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी।

लेकिन विडंबना यह है कि प्रभारी का चेहरा बदलने से ज़मीन पर एक इंच भी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। नए प्रभारी के कार्यकाल में भी ये अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर और फर्जी क्लीनिक पहले की तरह ही सक्रिय हैं और गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य बाजार तक अपनी जड़े जमाए बैठे हैं।

आम जनता और मरीजों के लिए मौत का जाल बने ये फर्जी क्लीनिक

भवानीपुर में संचालित हो रहे इन अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों और फर्जी क्लीनिकों ने आम जनजीवन को नरक बना दिया है। इन संस्थानों की कार्यप्रणाली से होने वाले नुकसान को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

गरीबों की आर्थिक लूट: इन फर्जी क्लीनिकों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर बैठे अप्रशिक्षित लोग (झोलाछाप डॉक्टर) साधारण बीमारियों के नाम पर भोले-भाले ग्रामीणों से हजारों-लाखों रुपए ऐंठ लेते हैं। गलत इलाज के कारण मरीजों की स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है।

गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की जान पर खतरा: अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर लिंग परीक्षण (Sex Determination) से लेकर फर्जी रिपोर्ट तक का खेल चलता है। कई बार गलत जाँच रिपोर्ट आने के कारण प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा की जान पर बन आती है, लेकिन इन झोलाछाप डॉक्टरों को रोकने वाला कोई नहीं है।

समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की विफलता: जब सरकारी अस्पताल के अंदर ही डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की कथित साठगांठ से बाहर के अवैध क्लीनिकों और दलालों का सिंडिकेट सक्रिय रहता है, तो गरीब मरीज सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं और मजबूरन इन ठगों के चंगुल में फंस जाते हैं।

स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों का फूटा गुस्सा: दी गई बड़े आंदोलन की चेतावनी

भवानीपुर के स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस लचर प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ अब मुखर होना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जिला सिविल सर्जन (Civil Surgeon) और स्थानीय प्रशासन को लिखित शिकायत दी है, जिसमें अवैध क्लीनिकों की पूरी सूची भी सौंपी गई है, लेकिन आज तक सिर्फ कागजी औपचारिकताएं ही पूरी की गई हैं ज़मीन पर कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।

गुस्साए ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द भवानीपुर क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों और फर्जी क्लीनिकों को सील नहीं किया गया और इसके पीछे संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारियों व संचालकों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज नहीं किए गए, तो वे सड़क पर उतरकर एक उग्र जन-आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल

सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह पर भवानीपुर में कानून को ताक पर रखकर यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है? क्या जिला स्वास्थ्य प्रशासन किसी बड़े हादसे या जनहानि का इंतजार कर रहा है, तब जाकर इनकी नींद खुलेगी?

प्रभारी बदलने के बावजूद व्यवस्था का जस का तस बने रहना यह साबित करता है कि समस्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी की है। अब देखना यह होगा कि पूर्णिया जिला प्रशासन और नए सिविल सर्जन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए कब तक भवानीपुर के इन अवैध क्लीनिकों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर बुलडोजर चलाते हैं।