अमनौर में पोखर में स्नान करने गई दो किशोरियों की डूबकर मौत, गांव में पसरा मातम
सारण जिले के अमनौर प्रखंड अंतर्गत नरसिभानपुर गांव में गुरुवार का दिन एक गहरे दुख और सन्नाटे के साथ शुरू हुआ। गांव के शिव मंदिर के समीप स्थित एक पोखर में स्नान करने गई दो किशोरियों की डूबने से मौत हो गई। इस घटना ने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। मासूम बेटियों को खोने के बाद परिजनों के चित्कार से हर किसी का दिल पसीज गया है।
घटना का विवरण
मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार की दोपहर नरसिभानपुर की रहने वाली दो किशोरियां अन्य साथियों के साथ गांव के प्रसिद्ध शिव मंदिर के पास स्थित पोखर पर स्नान करने गई थीं। भीषण गर्मी के कारण वे सभी पानी में उतर गईं। स्नान के दौरान दोनों किशोरियां गलती से गहरे पानी की तरफ चली गईं।
वहां मौजूद अन्य बच्चों ने उन्हें बचाने की कोशिश की और शोर मचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जब तक स्थानीय लोग वहां पहुंचते और उन्हें पानी से बाहर निकाला जाता, दोनों किशोरियों की सांसे थम चुकी थीं। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने आनन-फानन में उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का क्रंदन और गांव में कोहराम
घटना की सूचना मिलते ही गांव में कोहराम मच गया। जिस घर से थोड़ी देर पहले बेटियों के हंसने-खेलने की आवाज आ रही थी, वहां अब मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मां-बाप अपनी बच्चियों के शवों को देखकर बार-बार बेहोश हो रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यह एक अपूरणीय क्षति है। नरसिभानपुर की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर आंख नम है।
पोखर की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद पोखरों और जलाशयों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
असुरक्षित घाट: ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के अधिकांश पोखरों के घाट बेहद असुरक्षित हैं और पानी की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
प्रशासनिक उदासीनता: पूर्व में भी ऐसे कई हादसे हुए हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा जलाशयों के आसपास सुरक्षा घेरा बनाने या चेतावनी बोर्ड लगाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
जागरूकता का अभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकायों के पास बच्चों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त निगरानी और जागरूकता का भी अभाव रहता है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही अमनौर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए छपरा सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि यह एक दुखद हादसा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जिला प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों को सरकारी नियमों के तहत मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया गया है।
समाज के लिए सबक और सुरक्षा के उपाय
ऐसी दुर्घटनाएं हमें एक संवेदनशील समाज के रूप में सोचने पर मजबूर करती हैं। इन हादसों को रोकने के लिए कुछ बुनियादी कदम उठाए जाने चाहिए:
चेतावनी बोर्ड: प्रत्येक पोखर या तालाब के पास उसकी गहराई को दर्शाते हुए चेतावनी बोर्ड लगाए जाने चाहिए।
सुरक्षा घेरा: सार्वजनिक जलाशयों के घाटों को पक्का करना और वहां बैरिकेडिंग लगानी चाहिए ताकि कोई गहरे पानी में न जा सके।
अभिभावकों की जिम्मेदारी: माता-पिता को चाहिए कि वे छोटे बच्चों को अकेले जलाशयों के पास न जाने दें।
सामुदायिक निगरानी: गांव की पंचायतों को चाहिए कि वे ऐसे स्थानों पर नजर रखें और समय-समय पर बच्चों को सतर्क करें।
नरसिभानपुर की यह घटना किसी के भी दिल को झकझोर देने वाली है। दो खिलखिलाती जिंदगियां यूं पानी की भेंट चढ़ गईं, यह विचार ही मन को विचलित कर देता है। प्रशासनिक मदद तो अपनी जगह है, लेकिन समाज के रूप में हमें एक-दूसरे के बच्चों की सुरक्षा के प्रति अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है ताकि फिर कभी किसी घर का चिराग ऐसे न बुझे।