तेजप्रताप यादव 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेजे गए: नीट पेपर लीक प्रदर्शन मामले में धारा 307 के तहत बड़ी कार्रवाई
पटना: बिहार की राजधानी पटना में राजनीति का पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है। जन शक्ति जनता दल (जेजेडी) के सुप्रीमो और राज्य के चर्चित राजनेता तेजप्रताप यादव को पटना पुलिस ने नीट (NEET) पेपर लीक मामले के खिलाफ किए गए एक उग्र प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में पटना की हाई-सिक्योरिटी बेऊर जेल भेज दिया गया है। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है और हर तरफ इसी की चर्चा हो रही है।
नीट पेपर लीक मामला और उग्र प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
देशभर में बहुचर्चित रहे नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक और धांधली के मामलों को लेकर छात्रों और विपक्षी दलों का आक्रोश लगातार देखने को मिलता रहा है। इसी कड़ी में जेजेडी सुप्रीमो तेजप्रताप यादव के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं और छात्रों ने पटना की सड़कों पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था।
यह प्रदर्शन धीरे-धीरे काफी उग्र हो गया, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई गईं, पुलिसकर्मियों पर हमले किए गए और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसी घटना को आधार बनाते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया और तेजप्रताप यादव समेत कई अन्य नेताओं पर गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए।
हत्या की कोशिश (धारा 307) जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज
इस मामले में सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि पुलिस ने जेजेडी सुप्रीमो पर बेहद गंभीर कानूनी धाराएं लगाई हैं। वकीलों और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तेजप्रताप यादव पर भारतीय दंड संहिता (IPC/BNS) की धारा 307 (हत्या की कोशिश) समेत कई अन्य संगीन धाराएं थोपी गई हैं।
धारा 307 एक गैर-जमानती और अत्यंत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर लंबी सजा का प्रावधान है। राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी के कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान इस तरह की धारा का लगाया जाना बेहद असामान्य और हैरान करने वाला है। पार्टी के वकीलों का कहना है कि यह पूरी तरह से सत्ता पक्ष का राजनीतिक षड्यंत्र है, जिसका मकसद विपक्षी नेताओं की आवाज को कुचलना और उन्हें लंबे समय तक सलाखों के पीछे रखना है।
बेऊर जेल में कड़े पहरे के बीच दाखिल
गिरफ्तारी और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तेजप्रताप यादव को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पटना के बेऊर जेल पहुंचाया गया। जेल प्रशासन ने उनकी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं।
जैसे ही यह खबर फैली कि तेजप्रताप यादव को बेऊर जेल भेज दिया गया है, उनके हजारों समर्थक और जेजेडी कार्यकर्ता जेल के बाहर और पार्टी कार्यालय के आसपास जुटने लगे। कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए बेऊर जेल के मुख्य द्वार और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल और दंगा नियंत्रण वाहनों की तैनाती कर दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
पार्टी नेताओं और समर्थकों की तीखी प्रतिक्रियाएं
जेजेडी के वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरी कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि सरकार छात्रों के हक की आवाज उठाने वाले नेता से डर गई है और तानाशाही रवैया अपनाते हुए झूठे मुकदमों में फंसा रही है। नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि तेजप्रताप यादव ने हमेशा युवाओं, छात्रों और आम जनता के हितों की लड़ाई लड़ी है और वे इस दमनकारी नीति के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
पार्टी के लीगल सेल ने यह भी घोषणा की है कि वे निचली अदालत के इस फैसले और दर्ज की गई धाराओं (विशेषकर धारा 307) को चुनौती देने के लिए तुरंत उच्च न्यायालय (पटना हाईकोर्ट) का दरवाजा खटखटाएंगे और जल्द से जल्द जमानत के लिए कानूनी प्रयास तेज करेंगे।
राजनीतिक गलियारों में गरमाया माहौल
तेजप्रताप यादव के 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल जाने से बिहार की राजनीति में उबाल आ गया है। सत्ता पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और उपद्रव तथा हिंसा फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो। वहीं, विपक्ष इसे लोकतंत्र की हत्या और आपातकाल जैसे हालात बता रहा है।
आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि जेजेडी और अन्य विपक्षी दल इस गिरफ्तारी के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने में जुट गए हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें उच्च न्यायालय में होने वाली अगली कानूनी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।