पूर्णिया विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की बैठक सह कार्यशाला का सफल आयोजन: युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा की भावना को मजबूत करने पर विशेष जोर
पूर्णिया (बिहार): बिहार के उच्च शिक्षा जगत में छात्रों के सर्वांगीण विकास और उनमें सामाजिक सरोकारों की भावना जगाने के उद्देश्य से पूर्णिया विश्वविद्यालय (Purnia University) लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। इसी कड़ी में पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme - NSS) की एक महत्वपूर्ण बैठक सह कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर संचालित होने वाली एनएसएस गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाना, युवाओं को सामाजिक सेवा से जोड़ना और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना था।
'हिन्दुस्तान' संवाददाता से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, इस उच्च-स्तरीय बैठक में विश्वविद्यालय के तमाम कॉलेजों के एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी (Program Officers), समन्वयक और स्वयंसेवक (Volunteers) ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। आइए जानते हैं पूर्णिया विश्वविद्यालय में आयोजित इस राष्ट्रीय सेवा योजना की बैठक सह कार्यशाला की विस्तृत कार्यसूची, वचनों के मुख्य बिंदु, सामाजिक सरोकारों पर चर्चा और भविष्य की कार्ययोजना का संपूर्ण विवरण।
बैठक की पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय सेवा योजना का महत्व और उद्देश्य
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को सबसे अहम माना जाता है, और एनएसएस (NSS) एक ऐसा सशक्त माध्यम है जो विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ समाज की वास्तविक जमीनी हकीकत से रूबरू कराता है।
'नॉट मी, बट यू' (Not Me, But You) का संदेश: कार्यशाला की शुरुआत में एनएसएस के मूल मंत्र 'स्वयं से पहले आप' पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कॉलेज के छात्र-छात्राएं केवल अपनी डिग्री तक सीमित न रहें, बल्कि अपने आस-पास के समाज, गांवों और मलिन बस्तियों की समस्याओं को समझें और उनके समाधान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
शैक्षणिक परिसरों में सहभागिता बढ़ाना: पूर्णिया विश्वविद्यालय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी अंगभूत और संबद्ध महाविद्यालयों में एनएसएस इकाइयों को अधिक सक्रिय करने की जरूरत पर बल दिया गया, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को इस रचनात्मक मंच से जोड़ा जा सके।
कार्यशाला के मुख्य बिंदु: आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा
बैठक सह कार्यशाला के दौरान पूर्णिया विश्वविद्यालय के एनएसएस समन्वयक और अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई और आगामी सत्र के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की।
विशेष शिविरों (Special Camps) का आयोजन: ग्रामीण क्षेत्रों और गोद लिए गए गांवों में सात दिवसीय विशेष शिविर आयोजित करने को लेकर रूपरेखा तैयार की गई। इन शिविरों के माध्यम से स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य जागरूकता, साक्षरता अभियान और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे राष्ट्रीय अभियानों के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण अभियान: पूर्णिया और सीमांचल क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण करने और उनकी देखरेख करने का संकल्प लिया गया। एनएसएस स्वयंसेवकों को इस दिशा में लीडर की भूमिका निभाने को कहा गया।
रक्तदान शिविर और स्वास्थ्य मेले: समाज में रक्त की कमी को दूर करने के लिए महाविद्यालय स्तर पर नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर (Blood Donation Camps) आयोजित करने तथा स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाने का निर्णय लिया गया।
अधिकारियों और वक्ताओं के उद्बोधन: युवाओं को प्रेरणा
कार्यशाला में उपस्थित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, प्रोफेसरों और जिला स्तरीय समन्वयकों ने अपने संबोधन में स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया।
नेतृत्व क्षमता का विकास: वक्ताओं ने कहा कि एनएसएस केवल एक सामाजिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह युवाओं में नेतृत्व क्षमता (Leadership Skills), टीम वर्क, अनुशासन और संकट के समय निर्णय लेने की क्षमता का विकास करती है। जो छात्र एनएसएस से जुड़ते हैं, वे भविष्य में एक बेहतर नागरिक और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी या समाज सुधारक बनते हैं।
प्रशासनिक सहयोग का आश्वासन: विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह विश्वास दिलाया गया कि एनएसएस इकाइयों को सुचारू रूप से चलाने के लिए फंड, दिशा-निर्देश और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग समय पर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि किसी भी गतिविधि में कोई बाधा न आए।
स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी और भविष्य का संकल्प
इस कार्यशाला में विभिन्न कॉलेजों से आए एनएसएस स्वयंसेवकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और समाज सेवा के क्षेत्र में आ रही चुनौतियों व उनके समाधान पर अपने विचार रखे।
युवाओं का उत्साह: छात्र-स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने कॉलेजों और पंचायतों में जाकर युवाओं की टोली तैयार करेंगे और समाज में फैली कुप्रथाओं, नशे की लत और स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने का काम करेंगे।
डिजिटल और सोशल मीडिया का उपयोग: कार्यशाला में यह भी तय किया गया कि एनएसएस की गतिविधियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से प्रसारित किया जाए ताकि अधिक से अधिक युवा इससे प्रेरित होकर इस महाअभियान का हिस्सा बन सकें।
पूर्णिया विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की यह बैठक सह कार्यशाला इस बात का प्रमाण है कि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह छात्रों को सामाजिक रूप से संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाने के प्रति भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस कार्यशाला में बनी रणनीतियों और लिए गए संकल्पों से आने वाले दिनों में पूर्णिया विश्वविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवक समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने में मील का पत्थर साबित होंगे। युवा शक्ति का यह सकारात्मक उपयोग देश और समाज दोनों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।