महमदपुर समेत 8 हाईस्कूलों में छात्रों को मिल रही व्यावसायिक शिक्षा, पढ़ाई के साथ सीख रहे सिलाई-कढ़ाई और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत

बिहारशरीफ। नालंदा जिले के सरकारी हाईस्कूलों में अब छात्रों को पारंपरिक पाठ्यक्रम के साथ-साथ रोजगारपरक शिक्षा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसी पहल के तहत महमदपुर समेत जिले के आठ हाईस्कूलों में विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। इन प्रशिक्षणों में सिलाई-कढ़ाई, एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और स्पीकर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत का कौशल शामिल है।

शिक्षा विभाग की इस पहल का उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें ऐसे हुनर से जोड़ना है, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। विभाग का मानना है कि स्कूली शिक्षा के दौरान ही यदि छात्रों को व्यावसायिक कौशल प्रदान किया जाए तो वे रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकते हैं और स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।

पाठ्यक्रम के साथ कौशल विकास पर जोर

वर्तमान समय में रोजगार के क्षेत्र में केवल डिग्री ही पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। उद्योग और व्यवसाय के बदलते स्वरूप को देखते हुए कौशल आधारित शिक्षा की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

महमदपुर सहित आठ हाईस्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को नियमित पढ़ाई के साथ अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को अपने रुचि के क्षेत्र में व्यावहारिक जानकारी मिल रही है।

सिलाई-कढ़ाई से लेकर इलेक्ट्रॉनिक रिपेयरिंग तक का प्रशिक्षण

व्यावसायिक शिक्षा के तहत छात्रों को कई प्रकार के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। इसमें सिलाई-कढ़ाई जैसे पारंपरिक कौशल के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण भी शामिल हैं।

छात्रों को एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और स्पीकर जैसे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत के बारे में जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को उपकरणों के अलग-अलग हिस्सों, खराबी पहचानने के तरीके और मरम्मत की तकनीक सिखाई जाती है।

इससे छात्र भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक रिपेयरिंग का काम शुरू कर सकते हैं या किसी कंपनी में तकनीकी कर्मचारी के रूप में रोजगार हासिल कर सकते हैं।

छात्रों में दिख रहा उत्साह

व्यावसायिक प्रशिक्षण को लेकर छात्रों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। कई विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें पढ़ाई के साथ ऐसा हुनर सीखने का मौका मिल रहा है, जो भविष्य में उनके लिए उपयोगी साबित होगा।

छात्रों का मानना है कि इस तरह की शिक्षा से आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने पैरों पर खड़े होने के लिए तैयार हो सकते हैं।

कुछ छात्रों ने बताया कि पहले उन्हें तकनीकी कार्यों के लिए बाहर से प्रशिक्षण लेना पड़ता था, लेकिन अब स्कूल में ही इसकी सुविधा मिलने लगी है।

शिक्षकों और प्रशिक्षकों की भूमिका अहम

इस योजना को सफल बनाने में शिक्षकों और प्रशिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रशिक्षक छात्रों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।

शिक्षकों का कहना है कि छात्रों को कम उम्र में ही कौशल से जोड़ना उनके भविष्य निर्माण के लिए बेहद जरूरी है। इससे उनमें समस्या समाधान की क्षमता, तकनीकी समझ और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है।

रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

शिक्षा विभाग का मानना है कि व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र आगे चलकर रोजगार के नए अवसर तलाश सकेंगे। तकनीकी कौशल वाले युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत का काम आज के समय में एक अच्छा व्यवसाय बन चुका है। ऐसे में स्कूल स्तर पर इसकी जानकारी मिलना छात्रों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

सरकार की कौशल विकास आधारित शिक्षा नीति का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। स्कूल स्तर से ही छात्रों को रोजगारपरक शिक्षा देने की पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि छात्रों को पढ़ाई के साथ कौशल प्रशिक्षण मिलता है तो वे शिक्षा पूरी करने के बाद केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले भी बन सकते हैं।

ग्रामीण छात्रों को मिलेगा विशेष लाभ

ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए यह पहल काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई छात्र उच्च तकनीकी प्रशिक्षण के लिए बाहर नहीं जा पाते हैं।

स्कूलों में ही प्रशिक्षण मिलने से ऐसे छात्रों को कम खर्च में बेहतर कौशल सीखने का अवसर मिल रहा है। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के रास्ते खुल सकते हैं।

विभाग करेगा प्रशिक्षण की निगरानी

शिक्षा विभाग द्वारा इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की नियमित निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।

छात्रों की भागीदारी, प्रशिक्षण की प्रगति और प्राप्त कौशल का मूल्यांकन भी किया जाएगा ताकि योजना का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक पहुंच सके।

भविष्य में और स्कूलों तक विस्तार की संभावना

अधिकारियों के अनुसार, यदि यह पहल सफल रहती है तो आने वाले समय में इसे जिले के अन्य स्कूलों तक भी विस्तार दिया जा सकता है। अधिक से अधिक छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

इससे जिले में कौशलयुक्त युवाओं की संख्या बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बिहारशरीफ क्षेत्र के महमदपुर समेत आठ हाईस्कूलों में शुरू की गई व्यावसायिक शिक्षा की पहल छात्रों के भविष्य को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ सिलाई-कढ़ाई, एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और स्पीकर रिपेयरिंग जैसे कौशल सीखकर छात्र आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहे हैं।

यह पहल न केवल छात्रों को रोजगार के लिए तैयार करेगी, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और तकनीकी क्षमता का भी विकास करेगी। आने वाले समय में इस तरह की कौशल आधारित शिक्षा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं के लिए बेहतर भविष्य की नींव बन सकती है।