तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में लगा 'छात्र दरबार', एक ही दिन में सौ से अधिक डिग्रियों का हुआ हाथों-हाथ वितरण; परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनोद कुमार ओझा ने छात्रों की समस्याओं का किया त्वरित समाधान

भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) परिसर में छात्रों की पेंडिंग समस्याओं और प्रमाण-पत्रों से जुड़ी कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से एक विशेष 'छात्र दरबार' का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस दरबार में छात्रों की उमड़ी भारी भीड़ के बीच सौ से अधिक मूल डिग्रियों (Degrees) का हाथों-हाथ वितरण किया गया। इस अनूठी और छात्र-हितैषी पहल से लंबे समय से अपनी डिग्री का इंतजार कर रहे छात्र-छात्राओं के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। कार्यक्रम के दौरान परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनोद कुमार ओझा ने खुद मोर्चा संभालते हुए न केवल डिग्रियां बांटी, बल्कि छात्रों की समस्याओं को सुनकर उनका ऑन-द-स्पॉट (तत्काल) निष्पादन भी किया।

छात्र दरबार में उमड़ी भीड़, समस्याओं का हुआ त्वरित निबटारा

टीएमबीयू परीक्षा विभाग में आयोजित इस छात्र दरबार को लेकर विद्यार्थियों में सुबह से ही काफी उत्साह देखा गया:

लंबी कतारों से मुक्ति: सामान्य दिनों में छात्रों को अपने अंकपत्र (Marksheets), प्रोविजनल सर्टिफिकेट या मूल डिग्री के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं और कई बार महीनों इंतजार करना पड़ता है। लेकिन छात्र दरबार के माध्यम से एक ही छत के नीचे सिंगल विंडो सिस्टम जैसी व्यवस्था देखने को मिली, जहाँ आते ही छात्रों के आवेदनों का सत्यापन कर उन्हें तुरंत डिग्रियां सौंप दी गईं।

विभिन्न सत्रों के छात्र हुए लाभान्वित: इस दरबार में स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) के विभिन्न सत्रों के वैसे छात्र पहुँचे थे जिनके रिजल्ट तो काफी पहले आ चुके थे, लेकिन किन्हीं तकनीकी कारणों या कागजी औपचारिकताओं के कारण उनकी डिग्री अटकी हुई थी। परीक्षा विभाग के कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए सभी कागजात पूरे किए और सौ से अधिक डिग्रियां मौके पर ही वितरित कर दी गईं।

परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनोद कुमार ओझा की पहल: "छात्रों का हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता"

छात्र दरबार के दौरान परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनोद कुमार ओझा ने व्यक्तिगत रूप से काउंटर पर मौजूद रहकर पूरी प्रक्रिया का जायजा लिया और छात्रों से संवाद किया:

पारदर्शिता और त्वरित सेवा: मीडिया से बातचीत करते हुए परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनोद कुमार ओझा ने जानकारी दी कि परीक्षा विभाग अब पूरी तरह से पारदर्शी और छात्र-उन्मुख प्रणाली पर काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि "विश्वविद्यालय प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र को अपने शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। जो छात्र आज अपनी डिग्री लेने आए थे, उनमें से 100 से अधिक विद्यार्थियों को उनकी डिग्रियां सौंप दी गई हैं।"

पेंडिंग मामलों पर सख्ती: प्रो. ओझा ने संबंधित शाखा के कर्मचारियों को भी कड़े निर्देश दिए कि जिन छात्रों के कागजात दुरुस्त हैं, उनके मामलों को लंबित न रखा जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस तरह के छात्र दरबार का आयोजन नियमित अंतराल पर किया जाएगा, ताकि दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों का समय और श्रम दोनों बच सके।

विद्यार्थियों में खुशी की लहर, विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना

हाथों-हाथ मूल डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं ने परीक्षा विभाग और इस विशेष पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की:

छात्रों की प्रतिक्रिया: डिग्री लेने पहुँचे एक छात्र ने बताया, "मैं पिछले कई महीनों से अपनी डिग्री के लिए कॉलेज और यूनिवर्सिटी के चक्कर काट रहा था, लेकिन यहाँ आकर कुछ ही घंटों में मेरी समस्या का समाधान हो गया और मुझे मेरी मूल डिग्री मिल गई। ऐसी व्यवस्था हर महीने होनी चाहिए।"

विश्वास का माहौल: इस आयोजन से विश्वविद्यालय और छात्र समुदाय के बीच एक सकारात्मक संवाद स्थापित हुआ है। छात्रों ने माना कि इस प्रकार की पहल से प्रशासनिक सुस्ती दूर होती है और कार्यों में तेजी आती है।

टीएमबीयू में आयोजित यह छात्र दरबार और एक ही दिन में सौ से अधिक डिग्रियों का वितरण विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यसंस्कृति में सुधार का एक बेहतरीन उदाहरण है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनोद कुमार ओझा के नेतृत्व में उठाए गए इस कदम ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो प्रशासनिक जटिलताओं को आसानी से दूर किया जा सकता है। यह पहल न केवल भागलपुर विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए वरदान साबित हुई है, बल्कि आने वाले समय में अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल बन गई है।