मुख्य सचिव की अध्यक्षता में टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा, संक्रमित मरीजों की पहचान और उपचार पर जोर

पटना: बिहार सरकार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में टीबी मुक्त भारत अभियान की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में राज्य में चल रहे टीबी उन्मूलन अभियान की प्रगति, मरीजों की पहचान, जांच व्यवस्था, उपचार और जागरूकता कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि टीबी संक्रमण की पहचान के लिए अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाए और संक्रमित मरीजों का समय पर इलाज शुरू कराया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य को टीबी मुक्त बनाने के लिए सभी स्तरों पर प्रभावी प्रयास किए जाएं।

टीबी उन्मूलन अभियान की हुई समीक्षा

बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, जिलों के प्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। मुख्य सचिव ने जिलावार टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की स्थिति की जानकारी ली और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि टीबी एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और नियमित उपचार से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए मरीजों की जल्द पहचान और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना सबसे महत्वपूर्ण है।

स्क्रीनिंग अभियान को तेज करने का निर्देश

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि टीबी मरीजों की पहचान के लिए स्क्रीनिंग अभियान को और तेज किया जाए। विशेष रूप से वैसे क्षेत्रों पर ध्यान देने को कहा गया जहां संक्रमण का खतरा अधिक है।

उन्होंने कहा कि केवल अस्पतालों तक पहुंचने वाले मरीजों की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि समुदाय स्तर पर जाकर संभावित मरीजों की पहचान करनी होगी। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्तर के कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

संक्रमित मरीजों के उपचार पर विशेष ध्यान

बैठक में टीबी संक्रमित मरीजों के उपचार की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी चिन्हित मरीजों का इलाज समय पर शुरू हो और उन्हें नियमित रूप से दवा लेने के लिए प्रेरित किया जाए।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि टीबी का इलाज लंबी अवधि तक चलता है, इसलिए मरीजों की लगातार निगरानी जरूरी है। दवा बीच में छोड़ने से बीमारी गंभीर हो सकती है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाएं

बैठक में बताया गया कि सरकार की ओर से टीबी मरीजों को कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जांच, दवा और उपचार की सेवाएं सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से दी जा रही हैं।

इसके अलावा मरीजों को पोषण सहायता और अन्य आवश्यक सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे बेहतर तरीके से इलाज पूरा कर सकें।

जागरूकता अभियान को मजबूत करने पर जोर

मुख्य सचिव ने कहा कि टीबी को खत्म करने के लिए केवल इलाज ही नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता फैलाना भी जरूरी है। कई बार जानकारी के अभाव में लोग समय पर जांच नहीं कराते हैं और बीमारी बढ़ जाती है।

उन्होंने निर्देश दिया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जाए। लोगों को टीबी के लक्षण, जांच की आवश्यकता और इलाज की उपलब्धता के बारे में जानकारी दी जाए।

जिलों की भूमिका अहम

टीबी मुक्त भारत अभियान की सफलता में जिलों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। अधिकारियों से कहा गया कि वे अपने-अपने जिलों में अभियान की नियमित समीक्षा करें और लक्ष्य के अनुसार काम सुनिश्चित करें।

जिलों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सक्रिय रहने और टीबी मरीजों की पहचान से लेकर उपचार पूरा होने तक निगरानी रखने का निर्देश दिया गया।

आधुनिक तकनीक का किया जाएगा उपयोग

बैठक में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम में तकनीक के उपयोग पर भी चर्चा हुई। मरीजों की जानकारी, जांच रिपोर्ट और उपचार की निगरानी के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि तकनीक के इस्तेमाल से मरीजों की ट्रैकिंग आसान होगी और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

टीबी मुक्त बिहार बनाने का लक्ष्य

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि बिहार को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार अभियान चला रहा है और विभिन्न स्तरों पर योजनाएं लागू की जा रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में सरकार, स्वास्थ्य कर्मियों और आम लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है। सामूहिक प्रयास से ही इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक में संक्रमित मरीजों की पहचान, स्क्रीनिंग बढ़ाने और समय पर उपचार सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। सरकार का उद्देश्य है कि राज्य में टीबी संक्रमण को कम किया जाए और अधिक से अधिक मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि बेहतर निगरानी, जागरूकता अभियान और प्रभावी उपचार व्यवस्था के माध्यम से बिहार टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।