जनसुनावियों में तेजी; जिलाधिकारी ने बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत की द्वितीय अपीलों की सुनवाई, भूमि विवाद और प्रमाणपत्र मामलों में त्वरित कार्रवाई के दिए सख्त निर्देश

भागलपुर, मुख्य संवाददाता: आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से समाधान सुनिश्चित करने के प्रशासनिक संकल्प को आगे बढ़ाते हुए भागलपुर में जिला प्रशासन द्वारा जनसुनवाई प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। इसी कड़ी में भागलपुर के जिलाधिकारी (District Magistrate) ने बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत दर्ज द्वितीय अपीलों की मैराथन सुनवाई की। समाहरणालय सभागार में आयोजित इस उच्चस्तरीय सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ने विभिन्न मामलों से जुड़े अपीलकर्ताओं (Appellants) और संबंधित विभागों के प्राधिकारियों (Authorities) की दलीलें आमने-सामने बैठकर सुनीं। सुनवाई के दौरान भूमि विवाद, जमीन पर अवैध कब्जे, समय पर प्रमाणपत्र जारी न किए जाने और विभिन्न योजनाओं के लाभ से वंचित किए जाने से जुड़ी कई महत्वपूर्ण शिकायतें सामने आईं, जिन पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए।

क्या है बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम और इसकी महत्ता?

बिहार सरकार द्वारा लाई गई यह एक अत्यंत ही क्रांतिकारी और जनहितकारी व्यवस्था है, जिसके तहत आम नागरिकों को सरकारी विभागों से जुड़ी अपनी शिकायतों के निवारण के लिए एक तय समय-सीमा की गारंटी मिलती है।

यदि किसी नागरिक का आवेदन प्रथम अपीलीय प्राधिकार स्तर पर संतोषजनक तरीके से हल नहीं होता है, तो वह द्वितीय अपील के तहत जिलाधिकारी या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी गुहार लगा सकता है।

इस कानून का मुख्य उद्देश्य शासन और प्रशासन में जवाबदेही तय करना है, ताकि कोई भी आम आदमी सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को विवश न हो और उसे समय पर न्याय मिल सके।

सुनवाई के दौरान पहुंचे विभिन्न मामले: भूमि विवाद और प्रमाणपत्रों के पेच

जिलाधिकारी की अदालत में सुनवाई के लिए पहुंचे मामलों में सबसे बड़ी संख्या भूमि विवाद (Land Disputes) और राजस्व से जुड़े मामलों की थी। इसके अलावा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, दाखिल-खारिज (Mutation), और प्रशासनिक स्तर पर प्रमाणपत्र जारी करने में हो रही देरी से जुड़े कई आवेदन भी शामिल रहे।

भूमि विवाद और अवैध कब्जे के मामले: कई अपीलकर्ताओं ने शिकायत की कि उनकी जमीनों पर जबरन कब्जा किया जा रहा है या अंचल कार्यालय (Circle Office) स्तर से उनके मामलों में अनुचित विलंब किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अंचलाधिकारियों (CO) और थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे आपसी समन्वय बनाकर भूमि विवादों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करें।

प्रमाणपत्र जारी करने में विलंब: जाति, आवासीय, आय या अन्य आवश्यक प्रमाणपत्रों के लंबित रहने के मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम (RTPS) के तहत तय समय-सीमा के भीतर कागजात उपलब्ध कराए जाएं। बिना किसी ठोस कारण के फाइलों को लटकाने वाले कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

अधिकारियों को कड़ी चेतावनी: लापरवाही बर्दाश्त नहीं

सुनवाई के दौरान कई ऐसे मामले भी आए जिनमें संबंधित विभागों के अधिकारी या तो खुद अनुपस्थित थे या फिर पर्याप्त जवाब के साथ पेश नहीं हुए। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने सभी जिलास्तरीय और प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को चेतावनी दी कि वे लोक शिकायतों के मामलों को हल्के में न लें।

अधिकारियों को दिए गए प्रमुख निर्देश इस प्रकार रहे:

समयबद्ध निष्पादन (Time-bound Disposal): प्रत्येक शिकायत का निस्तारण निर्धारित समयावधि के भीतर किया जाना चाहिए। यदि किसी मामले में विलंब होता है, तो संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।

गुणवत्तापूर्ण समाधान: केवल खानापूर्ति के लिए मामलों का बंद किया जाना स्वीकार्य नहीं होगा। शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए और उसकी समस्या का संतोषजनक समाधान होना चाहिए।

फील्ड विजिट और भौतिक सत्यापन: भूमि और अतिक्रमण से जुड़े मामलों में केवल कागजी रिपोर्ट पर भरोसा न करते हुए अधिकारी खुद मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करें।

आम जनता और अपीलकर्ताओं में जगी उम्मीद

जिलाधिकारी द्वारा खुद व्यक्तिगत रूप से मामलों की सुनवाई करने और मौके पर ही त्वरित निर्देश देने से अपीलकर्ताओं में काफी संतोष देखा गया। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से अपनी फरियाद लेकर पहुंचे कई नागरिकों ने बताया कि इस प्रकार की उच्चस्तरीय सुनवाई से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद काफी बढ़ गई है। कई मामलों में तो जिलाधिकारी ने सुनवाई के दौरान ही फोन पर संबंधित अधिकारियों को बुलाकर तुरंत समाधान निकालने का आदेश दिया, जिससे जनता का प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

भागलपुर में जिलाधिकारी द्वारा बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत की गई यह उच्चस्तरीय समीक्षा और सुनवाई सुशासन की दिशा में एक ठोस कदम है। जब प्रशासनिक मुखिया खुद जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हैं और लापरवाह अधिकारियों पर नकेल कसते हैं, तो व्यवस्था में अपने आप सुधार आने लगता है। यह पहल न केवल लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण में मददगार साबित हो रही है, बल्कि भागलपुर के आम नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाने की गारंटी भी बन रही है।