मुजफ्फरपुर में पीएलवी के महत्व पर विशेष कार्यशाला: जिला जज श्वेता कुमारी सिंह ने कहा — पारा लीगल वालेंटियर वंचित वर्गों को कानूनी समानता दिलाने में निभाते हैं अहम भूमिका, एसकेजे लॉ कॉलेज में हुआ आयोजन — विस्तृत रिपोर्ट
बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एसकेजे लॉ कॉलेज (SKJ Law College) में पारा लीगल वालेंटियर (PLV - Para Legal Volunteers) की भूमिका और महत्व को रेखांकित करने के लिए एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद जिला जज श्वेता कुमारी सिंह ने पीएलवी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ये स्वयंसेवक समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े वंचित, शोषित और पीड़ित वर्गों तक न्याय पहुँचाने में एक मजबूत सेतु का काम करते हैं। जिला जज ने स्पष्ट किया कि पीएलवी का मुख्य उद्देश्य समाज में कानूनी साक्षरता फैलाना और हर नागरिक को उसके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्य (Background and Objective of the Program)
देश के दूरदराज और पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों तथा समाज के उपेक्षित वर्गों तक मुफ्त कानूनी सहायता (Legal Aid) पहुँचाने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) द्वारा पारा लीगल वालेंटियर की नियुक्ति की जाती है।
न्याय तक सबकी पहुँच: इस विशेष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लॉ के छात्रों और नए स्वयंसेवकों को यह समझाना था कि कैसे एक पीएलवी समाज में बदलाव का माध्यम बन सकता है।
कानूनी अधिकारों की जानकारी: समाज के गरीब और असमर्थ लोग अदालतों की जटिल प्रक्रियाओं से अनजान होते हैं, ऐसे में पीएलवी उन्हें सही कानूनी सलाह और सहायता दिलाने में सहायता करते हैं।
जिला जज श्वेता कुमारी सिंह का संबोधन (Address by District Judge Shweta Kumari Singh)
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला जज श्वेता कुमारी सिंह ने पीएलवी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।
वंचितों को कानूनी समानता: जिला जज ने अपने संबोधन में कहा, "संविधान द्वारा हर नागरिक को समानता का अधिकार दिया गया है, लेकिन जागरूकता के अभाव में कई लोग आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं। ऐसे में पारा लीगल वालेंटियर समाज के अंतिम व्यक्ति को कानूनी समानता और न्याय दिलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।"
सच्चे समाज सेवक: उन्होंने कहा कि पीएलवी केवल एक पद नहीं है, बल्कि यह समाज सेवा का एक ऐसा माध्यम है जहाँ निस्वार्थ भाव से लोगों की कानूनी उलझनों को सुलझाने में मदद की जाती है। उन्होंने कानून के छात्रों को बढ़-चढ़कर इस दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
एसकेजे लॉ कॉलेज में विधिक मंथन (Legal Deliberations at SKJ Law College)
मुजफ्फरपुर के प्रतिष्ठित एसकेजे लॉ कॉलेज में आयोजित इस संगोष्ठी में कॉलेज के प्राध्यापकों, कानून के विद्यार्थियों और कई न्यायिक अधिकारियों ने भी अपने विचार रखे।
छात्रों की सहभागिता: विधि (Law) के विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देते हुए बताया गया कि कैसे वे अपनी कानूनी पढ़ाई का उपयोग समाज के कमजोर तबके की भलाई के लिए कर सकते हैं।
प्रशिक्षण और कार्यप्रणाली: कार्यशाला के दौरान पीएलवी के चयन, उनके दायित्वों, और जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं व मुफ्त कानूनी सहायता को पहुँचाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।
समाज में पीएलवी की वास्तविक भूमिका (Real-World Role of PLVs in Society)
पारा लीगल वालेंटियर न्याय व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, जो जनता और अदालत के बीच की कड़ी का काम करते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु: "जहाँ तक अदालतें और वकील सीधे तौर पर नहीं पहुँच पाते, वहाँ एक प्रशिक्षित पीएलवी अपनी सक्रियता से पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने का रास्ता दिखाता है।"
विवादों का समाधान (Mediation): छोटे-मोटे घरेलू या सामाजिक विवादों को थाना या कचहरी ले जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर सुलझाने में पीएलवी मध्यस्थता की भूमिका निभाते हैं।
जागरूकता अभियान: गांवों में चौपाल लगाकर महिलाओं, बच्चों और मजदूरों के अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना इनका मुख्य कार्य होता है।
मुजफ्फरपुर के एसकेजे लॉ कॉलेज में आयोजित यह कार्यशाला इस बात का प्रमाण है कि जिला प्रशासन और न्यायपालिका समाज में विधिक जागरूकता बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जिला जज श्वेता कुमारी सिंह के मार्गदर्शन में पीएलवी के महत्व पर हुई इस चर्चा ने न केवल कानून के छात्रों को प्रेरित किया, बल्कि समाज में न्याय और समानता के संदेश को भी मजबूती प्रदान की है।