शिशु स्वास्थ्य और मातृ पोषण पर वक्ताओं ने दिए महत्वपूर्ण विचार, महिलाओं को किया गया जागरूक

भागलपुर/टीएमबीयू: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के स्नातकोत्तर (PG) गृह विज्ञान विभाग में शुक्रवार को 'विश्व स्तनपान सप्ताह' के अवसर पर एक विशेष संगोष्ठी और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विभाग परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं के शुरुआती जीवन में मां के दूध के अतुलनीय महत्व, शिशु स्वास्थ्य, और पोषण संबंधी जागरूकता को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना था। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि स्तनपान केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह बच्चे के संपूर्ण मानसिक और शारीरिक विकास की सबसे मजबूत नींव है।

कार्यक्रम की शुरुआत और अतिथियों का स्वागत

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, विभाग के अध्यक्ष, शिक्षकों और शोधार्थियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। पीजी गृह विज्ञान विभाग की छात्राओं ने स्वागत गान प्रस्तुत कर आए हुए अतिथियों का अभिनंदन किया। विभाग की ओर से सभी मुख्य वक्ताओं को अंग वस्त्र और पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण और जीवन के संवर्धन का एक सुंदर संदेश दे रहा था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभाग के अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में कई बार माताएं आधुनिकता के प्रभाव में आकर शिशु को मां के दूध से वंचित कर देती हैं, जो बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि मां का पहला पीला गाढ़ा दूध (जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है) किसी भी नवजात शिशु के लिए दुनिया का पहला टीका (Vaccine) होता है, जो उसे कई गंभीर बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।

'स्तनपान: जीवन की आधारशिला' विषय पर हुई चर्चा

कार्यक्रम के दौरान 'स्तनपान और शिशु स्वास्थ्य' विषय पर एक विस्तृत व्याख्यान सत्र आयोजित किया गया। इसमें विभाग की प्राध्यापिकाओं और चिकित्सा विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण से स्तनपान के फायदों पर प्रकाश डाला।

शिशु के लिए वरदान: विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म के पहले घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान कराना अनिवार्य है। मां के दूध में वे सभी पोषक तत्व, विटामिन और एंटीबॉडीज मौजूद होते हैं जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत करते हैं।

माता के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी: संगोष्ठी में यह भी बताया गया कि नियमित स्तनपान कराने से माताओं में प्रसव के बाद होने वाली कई प्रकार की स्वास्थ्य जटिलताओं, स्तन कैंसर और गर्भाशय से जुड़े रोगों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

मानसिक और भावनात्मक विकास: मां और बच्चे के बीच का यह नजदीकी रिश्ता बच्चे के मानसिक और भावनात्मक विकास में एक अहम भूमिका निभाता है।

छात्राओं ने पोस्टर और भाषण के जरिए दी जागरूकता की प्रस्तुति

विश्व स्तनपान सप्ताह के इस विशेष अवसर पर पीजी गृह विज्ञान विभाग की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छात्राओं ने रंग-बिरंगे पोस्टरों के माध्यम से स्तनपान के फायदों, भ्रांतियों और इसके सामाजिक महत्व को बेहद खूबसूरती से दर्शाया। इसके अलावा, कई छात्राओं ने अपने भाषणों के जरिए समाज में फैली उन भ्रांतियों पर करारा प्रहार किया जो महिलाओं को स्तनपान से दूर करती हैं।

निर्णायक मंडली द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया। छात्राओं की इस रचनात्मकता ने वहां मौजूद सभी लोगों का मन मोह लिया और यह संदेश दिया कि युवा पीढ़ी इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को लेकर कितनी जागरूक है।

समाज के हर वर्ग तक संदेश पहुंचाने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्राओं ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे अपने परिवार, आसपास के समाज और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरूक करेंगे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जागरूकता की यह कड़ी घर-घर तक पहुंचनी चाहिए ताकि कोई भी नवजात शिशु इस बुनियादी अधिकार से वंचित न रहे।

टीएमबीयू के पीजी गृह विज्ञान विभाग में आयोजित यह संगोष्ठी न केवल अकादमिक दृष्टिकोण से सफल रही, बल्कि इसने समाज को एक सकारात्मक और स्वास्थ्यप्रद संदेश देने का भी काम किया। कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन के साथ राष्ट्रगान गाकर सत्र का समापन किया गया।