जीवन कौशल की कक्षाओं से जगा रही हैं बदलाव की अलख, शिक्षा से हर बेटी को जोड़ने का है बुलंद सपना

बेगूसराय/धरहरा: बिहार के ग्रामीण अंचल से अक्सर ऐसी प्रेरणादायक और संघर्ष भरी कहानियां सामने आती हैं, जो समाज की तसवीर बदलने का माद्दा रखती हैं। ऐसी ही एक असाधारण महिला की कहानी बिहार के धरहरा प्रखंड से प्रकाश में आई है, जिसने अपनी मेहनत, दृढ़ संकल्प और समाज के प्रति समर्पण भाव से यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो विपरीत परिस्थितियां भी रास्ते की रुकावट नहीं बन सकतीं। धरहरा प्रखंड की रहने वाली 25 वर्षीय रेखा कुमारी आज ग्रामीण इलाकों की बेटियों और महिलाओं के लिए एक मिसाल और प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। वह अपने क्षेत्र की महिलाओं और किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जीवन कौशल (Life Skills) की कक्षाएं संचालित कर रही हैं और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर रही हैं। रेखा का एकमात्र और सबसे बड़ा सपना यह है कि देश की कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहे और हर लड़की अपने पैरों पर खड़ी हो सके।

संघर्षों से भरा सफर: कैसे शुरू हुई बदलाव की यह अनूठी पहल?

रेखा कुमारी का यहां तक का सफर आसान नहीं रहा है। ग्रामीण परिवेश की कई सामाजिक और आर्थिक बाधाओं का सामना करते हुए उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने महसूस किया कि आज भी हमारे समाज के दूरदराज के गांवों में बेटियां और महिलाएं शिक्षा, जागरूकता और अपने बुनियादी अधिकारों से महरूम हैं।

शिक्षा के महत्व को समझना: रेखा ने खुद समाज में महिलाओं की स्थिति को बहुत करीब से देखा था। उन्होंने यह ठान लिया कि वह अपनी उच्च शिक्षा और ज्ञान का उपयोग केवल अपने तक सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि अपने गांव और आसपास की अन्य बेटियों व महिलाओं का जीवन संवारने में लगाएंगी।

जीवन कौशल कक्षाओं की शुरुआत: इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने ग्रामीण स्तर पर किशोरियों और महिलाओं के लिए विशेष जीवन कौशल कक्षाओं का संचालन शुरू किया। इन कक्षाओं में उन्हें न केवल शिक्षा के प्रति प्रेरित किया जाता है, बल्कि दैनिक जीवन से जुड़े हुनर, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आत्मविश्वास और आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जाते हैं।

महिलाओं और बेटियों को कर रही हैं जागरूक: सामाजिक बदलाव की बयार

रेखा कुमारी द्वारा चलाई जा रही इन कक्षाओं का असर अब धरातल पर साफ दिखने लगा है। उनके प्रयासों से गांव की सैकड़ों महिलाओं और युवतियों की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है।

आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की सीख: रेखा महिलाओं को बताती हैं कि वे सिर्फ चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें देश और समाज को आगे बढ़ाने की अपार क्षमता है। वह महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं, वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) और उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी देती हैं, ताकि वे किसी भी परिस्थिति में डरकर न रहें बल्कि डटकर मुकाबला करें।

ड्रॉपआउट बेटियों को स्कूल से जोड़ना: ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर आर्थिक तंगी या सामाजिक रूढ़ियों के कारण बेटियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं (School Dropouts)। रेखा ऐसी बेटियों और उनके अभिभावकों से व्यक्तिगत रूप से मिलती हैं, उन्हें शिक्षा का महत्व समझाती हैं और उन बेटियों को वापस स्कूल या शिक्षा के मुख्यधारा से जोड़ने का सराहनीय कार्य करती हैं।

"कोई बेटी न रहे शिक्षा से वंचित" — रेखा का बुलंद सपना

रेखा कुमारी का मुख्य सपना और उद्देश्य यही है कि धरहरा प्रखंड या उसके आसपास का कोई भी क्षेत्र ऐसा न बचे जहां कोई बेटी अनपढ़ रह जाए। उनका मानना है कि शिक्षित मां ही एक शिक्षित और सुसंस्कृत समाज की नींव रखती है।

समाज और प्रशासन से उम्मीदें: रेखा के इस नेक काम में अब स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिलाओं का भरपूर सहयोग मिल रहा है। हालांकि, उनका मानना है कि अगर प्रशासनिक स्तर पर और अधिक सहयोग मिले, तो इस अभियान को पूरे जिले और राज्य स्तर पर फैलाया जा सकता है, जिससे हजारों और बेटियों का भविष्य उज्जवल हो सके।

प्रेरणा का स्रोत: आज धरहरा प्रखंड की हर गली और चौराहे पर रेखा कुमारी के इस साहसिक कदम की चर्चा हो रही है। ग्रामीण महिलाएं उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखती हैं और अपनी बेटियों को उनके जैसी बनने की प्रेरणा देती हैं।

रेखा कुमारी जैसी बेटियां इस बात का प्रमाण हैं कि समाज में बदलाव लाने के लिए बड़े पदों की नहीं, बल्कि बड़े इरादों और सच्ची निष्ठा की जरूरत होती है। उनकी यह पहल न केवल ग्रामीण महिलाओं के जीवन में नया सवेरा लेकर आ रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उम्मीद की एक ऐसी किरण बन गई है जो कभी बुझ नहीं सकती।