90 किलो वजनी कांवर लेकर बाबा वैद्यनाथ धाम के लिए रवाना, कांवरिया पथ पर बने आकर्षण का केंद्र
सुल्तानगंज/देवघर (निज संवाददाता): देवाधिदेव महादेव की आराधना और पावन श्रावणी मेला के इस पवित्र अवसर पर बिहार के सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट से एक ऐसा विहंगम दृश्य देखने को मिला, जिसने देश भर से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं को अचरज और श्रद्धा से भर दिया है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से पहुंचे 25 शिवभक्तों का एक विशाल और अनुशासित जत्था इन दिनों सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले कांवरिया पथ पर चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है। यह जत्था कोई सामान्य यात्रा नहीं कर रहा है, बल्कि इनकी भक्ति और संकल्प की पराकाष्ठा ऐसी है कि वे अपने कंधों पर लगभग 90 किलो वजनी विशाल कांवर उठाकर बाबा बैद्यनाथ धाम की कठिन और लंबी पदयात्रा पर निकले हैं। इस भारी-भरकम और पवित्र कांवर को सभी कांवरिये आपस में मिलकर बारी-बारी से संभाल रहे हैं, जिन्हें देखने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर भक्तों का तांता लगा हुआ है।
कोलकाता से सुल्तानगंज तक आस्था का सफर
सनातन संस्कृति में कांवर यात्रा को सबसे कठिन तपस्या माना जाता है, लेकिन कोलकाता के इन 25 शिवभक्तों ने अपनी अटूट निष्ठा से इस यात्रा को एक मिसाल बना दिया है:
कोलकाता से विशेष तैयारी: कोलकाता के विभिन्न क्षेत्रों से आए इन शिवभक्तों ने बाबा भोलेनाथ और माता के प्रति अपनी गहरी आस्था के चलते इस भव्य कांवर यात्रा की योजना कई महीने पहले ही बना ली थी। वे अपने साथ विशेष रूप से सजाए गए 90 किलो वजनी इस धार्मिक कांवर को लेकर वाहन के जरिए सुल्तानगंज पहुंचे।
गंगा तट पर संकल्प और जलभरी: गुरुवार को सुल्तानगंज के ऐतिहासिक उत्तरवाहिनी गंगा तट पर पहुंचकर इन 25 भक्तों ने विधि-विधान के साथ मां गंगा का पूजन-अर्चन किया। इसके बाद पवित्र गंगा जल अपने पात्रों में भरा और 90 किलो के भारी-भरकम कांवर को अपने कंधों पर उठाकर बाबा बैद्यनाथ के जयकारों के साथ अपनी पदयात्रा का श्रीगणेश किया।
90 किलो का कांवर और 25 भक्तों का अद्भुत समन्वय
इतनी भारी-भरकम कांवर को उठाकर मीलों का सफर तय करना किसी साधारण मनुष्य के वश की बात नहीं है, इसके लिए अत्यधिक शारीरिक बल और मानसिक दृढ़ता की आवश्यकता होती है:
सहयोग और सामंजस्य की मिसाल: जत्थे के 25 सदस्यों ने मिलकर इस 90 किलो वजन को उठाने की जिम्मेदारी आपस में बांट रखी है। जब एक समूह के कांवरिये थक जाते हैं, तो तुरंत दूसरे सदस्य उनके स्थान पर कांवर को अपने कंधों पर संभाल लेते हैं। यह आपसी तालमेल और सहयोग उनकी अटूट एकता को दर्शाता है।
भक्ति में सराबोर अनुशासन: कोलकाता का यह पूरा जत्था पूरी तरह से अनुशासन में बंधा हुआ आगे बढ़ रहा है। उनके चेहरों पर लंबी पदयात्रा और भारी वजन की कोई थकान नहीं दिख रही है, बल्कि भोलेनाथ की भक्ति में झूमे इन भक्तों के चेहरों पर एक अलग ही तेज और ऊर्जा नजर आ रही है। रास्ते भर उनके मुंह से निकल रहे "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयकारों से पूरा कांवरिया पथ गूंज रहा है।
कांवरिया पथ पर बने कौतूहल और श्रद्धा का केंद्र
गुरुवार को जब इस 25 सदस्यीय जत्थे ने 90 किलो के कांवर के साथ अपनी यात्रा शुरू की, तो यह पूरे रास्ते में आकर्षण का केंद्र बन गया:
राहगीरों और दुकानदारों की भीड़: सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले 105 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर चलने वाले अन्य कांवरिये और स्थानीय ग्रामीण इस भव्य और भारी कांवर को देखने के लिए रुक जा रहे हैं। लोग अपने मोबाइल फोन से इस अद्भुत क्षण को कैद करने में जुटे हुए हैं।
दर्शन और पूजन की होड़: रास्ते में पड़ने वाले हर विश्राम स्थल और पड़ाव पर जब यह जत्था रुकता है, तो इस विशाल कांवर के दर्शन करने और माथा टेकने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। लोगों का मानना है कि इतनी भारी वजन को कांवर में लेकर चलना साधारण मनुष्य की शक्ति नहीं, बल्कि इसमें ईश्वरीय कृपा और सच्ची श्रद्धा का वास है।
भक्तों की जुबानी: "बाबा की कृपा से हल्का हो जाता है वजन"
मीडिया और स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए जत्थे के सदस्यों ने अपनी भावनाएं साझा कीं:
मनोकामना पूर्ण होने का विश्वास: भक्तों ने बताया कि उन्होंने कठिन व्रतों का पालन करते हुए यह संकल्प लिया था कि वे इस भारी कांवर को अपने कंधों पर लेकर देवघर पहुंचेंगे और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करेंगे।
कष्ट और थकान हुए बेमानी: उन्होंने कहा कि 90 किलो का वजन सुनने में भले ही बहुत भारी लगे, लेकिन जब कांवर कंधे पर होता है और मुंह से भोलेनाथ का नाम निकलता है, तो यह वजन तिनके के समान हल्का प्रतीत होता है। रास्ते के छाले और पैर की पीड़ा उनकी इस भक्ति के आगे पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा इंतजाम
इस विशेष जत्थे के आकर्षण और कांवरिया पथ पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद है:
सुरक्षित आवागमन: स्थानीय पुलिस और प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस भारी कांवर को लेकर चल रहे जत्थे को किसी प्रकार की असुविधा न हो। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल लगातार निगरानी रख रहा है।
स्वास्थ्य और चिकित्सा सहायता: प्रशासन और विभिन्न सेवा शिविरों द्वारा इन कांवरियों के लिए जगह-जगह पानी, ग्लूकोज, फल और मेडिकल हेल्प की व्यवस्था की गई है ताकि वे सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पूरी कर सकें।
सुल्तानगंज के कांवरिया पथ पर कोलकाता से आए 25 शिवभक्तों द्वारा 90 किलो वजनी कांवर के साथ शुरू की गई यह पदयात्रा भारतीय सनातन संस्कृति की उस अटूट और अगाध आस्था का जीवंत उदाहरण है, जहां कठिन से कठिन लक्ष्य भी सच्ची श्रद्धा और सामूहिक एकता के सामने छोटे पड़ जाते हैं। इन भक्तों का यह समर्पण न केवल सुल्तानगंज से देवघर के इस मार्ग पर इतिहास रच रहा है, बल्कि यह लाखों अन्य शिवभक्तों के लिए भी प्रेरणा का एक बहुत बड़ा स्त्रोत बन गया है।