भागलपुर में स्मृति मंच द्वारा हुआ विचार गोष्ठी का आयोजन

भागलपुर: महान शिक्षाविद, प्रखर राष्ट्रवादी और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृतियों को संजोने और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मृति मंच' के तत्वावधान में शहर के चैती दुर्गा स्थान स्थित सामुदायिक भवन में एक विचार गोष्ठी और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की।

राष्ट्रवाद और अखंड भारत के पुरोधा

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। स्मृति मंच के सदस्यों ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का पूरा जीवन राष्ट्रवाद के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि उनका यह स्पष्ट मानना था कि 'एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चल सकते।' कश्मीर के विलय और भारत की अखंडता को बनाए रखने के लिए उन्होंने जो बलिदान दिया, वह आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

वक्ताओं ने चर्चा करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी शिक्षाविद भी थे। कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति (Vice-Chancellor) के रूप में उनका कार्यकाल आज भी शिक्षा जगत में अनुकरणीय माना जाता है। उन्होंने शिक्षा को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने की वकालत की थी।

सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण: चैती दुर्गा स्थान पर मंथन

चैती दुर्गा स्थान का सामुदायिक भवन डॉ. मुखर्जी के विचारों के मंथन का साक्षी बना। स्मृति मंच के अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में जब देश वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के एकात्म मानववाद और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है।

उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि:

विचारों का प्रसार: डॉ. मुखर्जी के लेखन और उनके भाषणों को युवाओं के बीच ले जाने की आवश्यकता है।

सामाजिक समरसता: उनके जीवन से सीख लेते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और राष्ट्रवाद की भावना को पहुंचाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

शिक्षा पर जोर: उन्होंने जिस प्रकार कलकत्ता विश्वविद्यालय में सुधार किए, उसी तरह आज हमें भी शिक्षा में नवाचार की आवश्यकता है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। वक्ताओं ने युवाओं को डॉ. मुखर्जी के जीवन के उन संघर्षों के बारे में बताया, जब उन्होंने सत्ता के मोह को त्यागकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। एक वक्ता ने कहा, "आज का युवा अक्सर करियर की दौड़ में अपने सांस्कृतिक मूल्यों को भूल जाता है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन हमें सिखाता है कि कैसे हम अपने करियर के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी पूरी कर सकते हैं।"

स्मृति मंच की भविष्य की योजनाएं

कार्यक्रम के दौरान 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मृति मंच' ने भविष्य में कई रचनात्मक कार्यों की घोषणा की:

स्कूली स्तर पर वाद-विवाद प्रतियोगिता: जिले के विभिन्न स्कूलों में उनके जीवन पर आधारित निबंध और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

साहित्यिक भंडार: एक डिजिटल लाइब्रेरी विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें डॉ. मुखर्जी के विचारों और उन पर आधारित पुस्तकों का संग्रह होगा।

समाज सेवा शिविर: मंच के माध्यम से समय-समय पर स्वास्थ्य और शिक्षा शिविर लगाने की योजना है, जो डॉ. मुखर्जी के मानवीय दृष्टिकोण को समर्पित होंगे।

 एक संकल्प का समापन

यह कार्यक्रम न केवल एक श्रद्धांजलि सभा थी, बल्कि एक संकल्प था कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के भारत को 'समर्थ और अखंड' बनाने का सपना हम सब मिलकर पूरा करेंगे। सामुदायिक भवन में गूंजे उनके नारे और उनके जीवन पर हुई चर्चा ने सभी के मन में राष्ट्र प्रेम की भावना को और प्रगाढ़ कर दिया।

कार्यक्रम के अंत में स्मृति मंच के सचिव ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया और आशा व्यक्त की कि अगले वर्ष इस स्मृति मंच का दायरा और बड़ा होगा, जिससे अधिक से अधिक लोग डॉ. मुखर्जी के विचारों से जुड़ पाएंगे। भागलपुर की इस धरती पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृतियों का यह आयोजन निश्चित रूप से एक नई वैचारिक चेतना का संचार करेगा।