पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार का जानकीनगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालय में औचक निरीक्षण: शैक्षणिक गतिविधियों, भवन मरम्मत और छात्र सुविधाओं पर लिया कड़ा फीडबैक
पूर्णिया: शिक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और सरकारी आवासीय विद्यालयों में रह रहे छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, पूर्णिया के जिलाधिकारी (District Magistrate) अंशुल कुमार ने आज जिले के जानकीनगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालय (Dr. Bhimrao Ambedkar Residential School) का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया। डीएम का यह दौरा अचानक होने के कारण विद्यालय प्रशासन और वहां तैनात अधिकारियों में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने न केवल शिक्षण कार्यों की गुणवत्ता को परखा, बल्कि विद्यालय भवन की स्थिति, छात्रों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और परिसर में जलजमाव जैसी गंभीर समस्याओं का भी बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कई खामियों पर गहरी नाराजगी जताई और संबंधित विभागों के अधिकारियों को युद्ध स्तर पर सुधार कार्य पूरा करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए।
औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य: छात्रों की सुविधाओं और शिक्षा पर जोर
आवासीय विद्यालय, जहां छात्र न केवल शिक्षा ग्रहण करते हैं बल्कि वहीं रहते भी हैं, वहां की व्यवस्था का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। जिलाधिकारी अंशुल कुमार का मुख्य ध्यान छात्रों के सर्वांगीण विकास और उनके सुरक्षित परिवेश पर केंद्रित था।
शिक्षण गतिविधियों का फीडबैक: डीएम ने क्लासरूम में जाकर छात्रों से सीधे संवाद किया। उन्होंने शिक्षकों की उपस्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता और पाठ्यक्रम (Syllabus) के पूरा होने की स्थिति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवासीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर उच्च गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी प्रतिस्पर्धा में कहीं पीछे न रहें।
भवन मरम्मत और आधारभूत संरचना: विद्यालय भवन के जीर्ण-शीर्ण हिस्सों की मरम्मत को लेकर डीएम ने काफी कड़ाई बरती। उन्होंने निर्देश दिया कि समय रहते भवन का रख-रखाव और पेंटिंग का काम पूरा किया जाए ताकि छात्रों को एक सुरक्षित वातावरण मिल सके।
जलजमाव की समस्या: डीएम का सख्त रुख
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय परिसर और उसके आसपास जलजमाव (Waterlogging) की समस्या को देखा, जो वहां रह रहे छात्रों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई है।
अधिकारियों पर बरसी नाराजगी: विद्यालय परिसर में जलजमाव देखकर जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने वहां मौजूद अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि आवासीय परिसर के भीतर या उसके आसपास पानी का जमा रहना न केवल बीमारियों को न्योता देता है, बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता प्रमाण है।
त्वरित निकासी का आदेश: डीएम ने तत्काल प्रभाव से जल निकासी (Drainage) की व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि जलजमाव की समस्या का समाधान तुरंत नहीं निकाला गया, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने जल निकासी के लिए एक पक्का ड्रेनेज सिस्टम बनाने पर जोर दिया ताकि भविष्य में छात्रों को इस समस्या का सामना न करना पड़े।
छात्र सुविधाओं और मेस (Mess) का निरीक्षण
आवासीय विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता छात्रों के स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
भोजन और सफाई का जायजा: डीएम ने विद्यालय की मेस और किचन का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां बनने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच की और मेस के कर्मचारियों को साफ-सफाई के प्रति विशेष सतर्क रहने को कहा। उन्होंने छात्रों से भोजन की गुणवत्ता के बारे में पूछा और किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने के निर्देश दिए।
शौचालय और स्वच्छता: विद्यालय में शौचालयों की स्थिति, पेयजल (Drinking Water) की उपलब्धता और सफाई व्यवस्था का भी उन्होंने बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक निर्देश और भविष्य की कार्ययोजना
निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंचना चाहिए और इसमें कोई भी लापरवाही अक्षम्य है।
समयबद्ध कार्य: उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी और स्थानीय अनुमंडल अधिकारियों को निर्देशित किया कि मरम्मत कार्यों और जल निकासी समाधान के लिए एक समय सीमा (Timeline) तय की जाए और उस समय के भीतर कार्य पूर्ण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
सतत मॉनिटरिंग: डीएम ने यह भी आश्वासन दिया कि वे खुद समय-समय पर इन विद्यालयों का औचक निरीक्षण करते रहेंगे, ताकि व्यवस्था में सुधार बना रहे।
पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार का डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालय का यह औचक निरीक्षण प्रशासनिक सक्रियता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। जलजमाव जैसी समस्याओं के प्रति उनकी सख्ती और शैक्षणिक गुणवत्ता पर उनका जोर यह दर्शाता है कि प्रशासन छात्रों के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर है। इस तरह के निरीक्षण न केवल कार्यशैली में पारदर्शिता लाते हैं, बल्कि संस्थागत स्तर पर सुधारों को गति भी प्रदान करते हैं। उम्मीद है कि डीएम के इन निर्देशों का अनुपालन जल्द ही विद्यालय की सूरत बदल देगा।