गोलंबर से ज्योति चौक तक प्रस्तावित फोरलेन बाइपास परियोजना अटकी, पेड़ों की कटाई और वैकल्पिक भूमि हस्तांतरण बना सबसे बड़ा रोड़ा
जागरण संवाददाता। शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित गोलंबर से ज्योति चौक तक फोरलेन बाइपास सड़क का निर्माण फिलहाल अटक गया है। लगभग ढाई किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर इन दिनों अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही कई प्रशासनिक और पर्यावरणीय बाधाएं सामने आ गई हैं, जिनके कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती सड़क किनारे मौजूद पेड़ों की कटाई और वन विभाग को वैकल्पिक भूमि का हस्तांतरण नहीं हो पाना है। जब तक इन दोनों प्रक्रियाओं को पूरा नहीं किया जाता, तब तक निर्माण कार्य शुरू होना संभव नहीं माना जा रहा है।
शहर की यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परियोजना
गोलंबर से ज्योति चौक तक प्रस्तावित फोरलेन बाइपास सड़क को शहर की सबसे महत्वपूर्ण यातायात परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। इस सड़क के बनने से शहर के मुख्य मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा और लोगों को जाम की समस्या से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
वर्तमान में इस मार्ग पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे और भारी वाहन गुजरते हैं। सड़क की सीमित चौड़ाई और बढ़ते यातायात के कारण अक्सर लंबा जाम लग जाता है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।
परियोजना की सबसे बड़ी बाधा बने पेड़
परियोजना के लिए सड़क किनारे स्थित बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाना आवश्यक बताया गया है। लेकिन पर्यावरणीय नियमों के तहत किसी भी पेड़ की कटाई से पहले वन विभाग की अनुमति लेना और उसके बदले निर्धारित मानकों के अनुसार वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है।
इसी प्रक्रिया में देरी के कारण परियोजना की गति थम गई है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही पेड़ों की कटाई की अनुमति मिल सकेगी।
वन विभाग को वैकल्पिक भूमि हस्तांतरण लंबित
जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए वन विभाग को वैकल्पिक भूमि हस्तांतरित करने की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। जब तक विभाग को निर्धारित भूमि उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक अंतिम स्वीकृति मिलने की संभावना कम है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
निर्माण कार्य पर लगा ब्रेक
सभी आवश्यक स्वीकृतियां नहीं मिलने के कारण निर्माण एजेंसियां भी कार्य शुरू नहीं कर पा रही हैं। परियोजना से जुड़े कई प्रारंभिक कार्य पूरे हो चुके हैं, लेकिन मुख्य निर्माण अभी तक प्रारंभ नहीं हो सका है।
इसका असर परियोजना की समय-सीमा पर भी पड़ सकता है। यदि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में और देरी होती है, तो निर्माण कार्य निर्धारित अवधि से पीछे जा सकता है।
लोगों को है परियोजना से बड़ी उम्मीद
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फोरलेन सड़क बनने से शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। प्रतिदिन जाम से जूझने वाले हजारों लोगों को राहत मिलेगी और यात्रा का समय भी कम होगा।
व्यापारियों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी तथा शहर का आर्थिक विकास तेज होगा।
पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क निर्माण जैसी विकास परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व देना आवश्यक है। इसी कारण पेड़ों की कटाई के बदले व्यापक स्तर पर पौधारोपण और वैकल्पिक भूमि की व्यवस्था की जाती है।
वन विभाग की मंजूरी प्रक्रिया का उद्देश्य विकास कार्यों को रोकना नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।
प्रशासन कर रहा समाधान का प्रयास
सूत्रों के अनुसार संबंधित विभागों के अधिकारी नियमित रूप से बैठकें कर परियोजना की बाधाओं को दूर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। प्रशासन चाहता है कि सभी आवश्यक अनुमतियां जल्द पूरी हों ताकि निर्माण कार्य समय पर शुरू किया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को प्राथमिकता दी जा रही है और विभागीय स्तर पर लंबित प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने का प्रयास जारी है।
यातायात दबाव लगातार बढ़ रहा
शहर के विस्तार और वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण गोलंबर से ज्योति चौक तक का मार्ग लगातार व्यस्त होता जा रहा है। सुबह और शाम के समय इस मार्ग पर भारी जाम लगना आम बात हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीघ्र ही सड़क चौड़ीकरण और बाइपास निर्माण का कार्य पूरा नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में यातायात की समस्या और गंभीर हो सकती है।
परियोजना पूरी होने पर होंगे कई लाभ
फोरलेन सड़क बनने के बाद शहर में यातायात का दबाव कई हिस्सों में कम होगा। आपातकालीन सेवाओं को बेहतर मार्ग मिलेगा, माल परिवहन में तेजी आएगी और आम लोगों का समय बचेगा।
इसके अलावा सड़क सुरक्षा में सुधार, ईंधन की बचत और प्रदूषण में कमी जैसे सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं।
गोलंबर से ज्योति चौक तक प्रस्तावित करीब 2.5 किलोमीटर लंबी फोरलेन बाइपास सड़क परियोजना फिलहाल पेड़ों की कटाई और वन विभाग को वैकल्पिक भूमि हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं के कारण अटकी हुई है। प्रशासन इन बाधाओं को दूर करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन जब तक आवश्यक स्वीकृतियां नहीं मिलतीं, तब तक निर्माण कार्य शुरू होना संभव नहीं है।
शहर के लोगों को इस परियोजना से बड़ी उम्मीदें हैं, क्योंकि इसके पूरा होने से यातायात व्यवस्था में सुधार, जाम से राहत और शहरी विकास को नई गति मिलने की संभावना है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि लंबित प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और यह महत्वपूर्ण सड़क परियोजना आखिरकार कब धरातल पर उतरती है।