चोरी के जेवरात खपाने वाले सिंडिकेट पर आधी रात छापा, खंगाले गए CCTV, कई बड़े कारोबारी हिरासत में
मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के जिलों में सक्रिय शातिर चोरों, डकैतों और उनके 'व्हाइट कॉलर' खरीदारों (रिसीवर) के गठजोड़ को तोड़ने के लिए पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। शनिवार (27 जून 2026) की देर रात जिला पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स, जिला खुफिया इकाई (DIU) और स्थानीय थानों की पुलिस ने शहर के मुख्य आभूषण बाजार (सूतपट्टी और सर्राफा मंडी क्षेत्र) को अचानक चारों तरफ से घेर लिया।
पुलिस की दर्जनों गाड़ियां जब सायरन बजाते हुए इस व्यस्त आभूषण मंडी में दाखिल हुईं, तो पूरे बाजार में हड़कंप मच गया। पुलिस ने यह कार्रवाई हाल ही में पकड़े गए अंतर-जिला चोर गिरोह के चौंकाने वाले बयानों के आधार पर की है। जांच के दौरान कई नामी आभूषण दुकानों के स्टॉक, लेजर बुक और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR/CCTV फुटेज) को जब्त किया गया है। मौके से पुलिस ने कबाड़ और चोरी के सोने को अवैध रूप से गलाने वाले मैकेनिज्म का पर्दाफाश करते हुए कुछ मुख्य संदिग्धों और स्वर्ण व्यवसायियों को हिरासत में लिया है, जिनसे गुप्त स्थान पर बेहद कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।
रात 11 बजे का एक्शन: कैसे शुरू हुआ 'ऑपरेशन सर्राफा'?
आमतौर पर आभूषण मंडियों में पुलिस दिन के समय जांच करने से बचती है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े और व्यापारियों में डर न फैले। लेकिन शनिवार की रात एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने बिल्कुल 'फिल्मी स्टाइल' में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
घेराबंदी और सीलिंग: रात करीब 11:00 बजे जब अधिकांश दुकानें बंद हो चुकी थीं और कुछ सर्राफा व्यापारी अपने काउंटरों को समेट रहे थे, तभी पुलिस की अलग-अलग टीमों ने मंडी के सभी एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स को सील कर दिया।
लारेंस और शूटरों से मिले थे इनपुट: पुलिस सूत्रों के अनुसार, पिछले हफ्ते जिले में पकड़े गए तीन कुख्यात चोरों ने रिमांड के दौरान कबूला था कि वे वीआईपी कॉलोनियों और बंद घरों से जो भी जेवरात चुराते हैं, उन्हें बिना किसी बिल या पहचान पत्र के इसी मंडी के कुछ चुनिंदा सुनारों को आधी कीमत पर बेच देते थे।
सीसीटीवी फुटेज और 'सीक्रेट लॉकर' की सघन जांच
शनिवार रात करीब 3 घंटे तक चली इस सघन तलाशी के दौरान पुलिस ने मुख्य रूप से उन आभूषण दुकानों को टारगेट किया, जिनका नाम चोरों ने अपने कबूलनामे में लिया था।
पुलिसिया जांच के मुख्य बिंदु (Key Investigation Metrics):
CCTV फुटेज का मिलान: पुलिस ने दुकानों में पिछले 15 दिनों के भीतर बैकअप किए गए सीसीटीवी फुटेज को खंगाला। पुलिस यह देखना चाहती थी कि क्या जेल में बंद चोरों का इन दुकानों में रात या अलसुबह आना-जाना था। कई संदिग्धों के फुटेज मिलने की भी बात सामने आ रही है।
बिना बिल के सोने का स्टॉक: दुकानों के भीतर मौजूद सेफ (Safe) और अंडरग्राउंड लॉकरों को खुलवाया गया। जांच में कुछ दुकानों से भारी मात्रा में बिना हॉलमार्क और बिना वैध कागजात वाले सोने के बिस्कुट और पिघले हुए जेवरात बरामद हुए हैं।
गलाने वाली भट्टियों पर नजर: पुलिस ने उन वर्कशॉप (कारखानों) पर भी छापा मारा जहां कबाड़ या पुराने सोने को गलाया जाता है। आशंका है कि चोरी के तुरंत बाद जेवरात की पहचान मिटाने के लिए उन्हें तुरंत इन भट्टियों में गलाकर ईंट या बार का रूप दे दिया जाता था।
कई बड़े संदिग्ध हिरासत में: अंडरवर्ल्ड लिंक खंगाल रही पुलिस
इस आधी रात की छापेमारी में पुलिस ने केवल जेवरात बरामद नहीं किए, बल्कि इस पूरे काले कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य मोहरों को भी दबोचा है।
| छापेमारी का समय | मुख्य लक्षित क्षेत्र | पुलिस की बरामदगी | वर्तमान स्टेटस |
|---|---|---|---|
| शनिवार रात 11:00 से 2:00 बजे | आभूषण मंडी, मुजफ्फरपुर | बिना बिल का सोना, सीसीटीवी डीवीआर | कई संदिग्ध हिरासत में, पूछताछ जारी |
पुलिस ने सर्राफा बाजार के दो नामी स्वर्ण व्यवसायियों और उनके तीन कारीगरों को हिरासत में लिया है। इन कारीगरों पर आरोप है कि ये चोरों से माल मिलते ही महज आधे घंटे के भीतर गैस कटर और केमिकल की मदद से सोने की बनावट को नष्ट कर देते थे। हिरासत में लिए गए लोगों को नगर थाने और अन्य सुरक्षित थानों में रखकर पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सिंडिकेट के तार पटना, बंगाल या नेपाल के तस्करों से तो नहीं जुड़े हैं।
सर्राफा संघ में खलबली, पुलिस ने दी सफाई: "ईमानदार व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं"
इस अचानक हुई छापेमारी के बाद रविवार की सुबह मुजफ्फरपुर सर्राफा व्यवसायी संघ के बीच हड़कंप मच गया। कुछ व्यापारियों ने पुलिस की इस कार्रवाई का दबे स्वर में विरोध करते हुए इसे व्यापारियों का उत्पीड़न बताया।
हालांकि, स्थिति को भांपते हुए नगर पुलिस उपाधीक्षक (Town DSP) ने साफ तौर पर कहा कि पुलिस किसी भी वैध और ईमानदार व्यापारी को परेशान नहीं कर रही है।
पुलिस प्रशासन का आधिकारिक बयान: "हमारे पास कोर्ट और रिमांड पर लिए गए अपराधियों के पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य (Digital Evidence) हैं। कुछ लोग कबाड़ और चोरी का सोना खरीदकर न केवल अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि सरकार को लाखों के राजस्व (GST) का चूना भी लगा रहे हैं। जो व्यापारी नियमों के तहत पक्के बिल पर काम करते हैं, उन्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। लेकिन जो लोग अपराधियों के 'फाइनेंसर' या 'रिसीवर' बने हुए हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।"
चोरी की घटनाओं पर लगेगा ब्रेक? क्यों जरूरी था यह एक्शन
मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में हाल के दिनों में बंद घरों को निशाना बनाने वाले शातिर 'चोर गिरोहों' का आतंक काफी बढ़ गया था। पुलिस की थ्योरी कहती है कि चोर तब तक चोरी करना बंद नहीं करते जब तक बाजार में उनके चोरी के माल को तुरंत कैश (नकद) में बदलने वाले खरीदार मौजूद हों।
सप्लाई चेन पर प्रहार: सुनार चोरी के जेवरात को बहुत कम दाम (जैसे 30% से 40% कीमत) पर खरीद लेते हैं और उसे गलाकर नया रूप देकर ऊंचे दामों पर बेचते हैं।
अपराधियों की कमर टूटेगी: इस सप्लाई चेन पर प्रहार करके पुलिस अपराधियों के आर्थिक तंत्र को ध्वस्त करना चाहती है।
शनिवार रात मुजफ्फरपुर पुलिस द्वारा आभूषण मंडी में की गई यह 'सर्जिकल स्ट्राइक' इस बात का संकेत है कि जिला प्रशासन अब अपराधियों के साथ-साथ उनके मददगारों के खिलाफ भी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रहा है। हिरासत में लिए गए स्वर्ण व्यवसायियों और संदिग्धों से पूछताछ में कई अन्य बड़े नामों के खुलासे होने की उम्मीद है। यदि पुलिस इस मामले में पुख्ता चार्जशीट दाखिल करने में सफल रहती है, तो यह आने वाले दिनों में मुजफ्फरपुर में चोरी और लूट की वारदातों पर अंकुश लगाने में एक गेम-चेंजर (Game-Changer) साबित होगा। बाजार में अभी भी भारी पुलिस बल की गतिविधियों पर व्यापारियों की नजरें टिकी हुई हैं।